- अमानत में खयानत का अर्थ:-
अमानत या धरोहर के रूप में रखी वस्तु को हड़प लेना या चुरा लेना; बुरी नीयत से किसी दूसरे की संपत्ति का गबन कर लेना।
अब जो बाज़ार में रखे हो तो हैरत क्या है,जो भी देखेगा वो पूछेगा की कीमत क्या है।
My skills and Characteristics are Painting, Fashion Photography, Heritage Photography, Logo Designing, Writing, Blogging and Getting things Done in Creative Way.
अमानत या धरोहर के रूप में रखी वस्तु को हड़प लेना या चुरा लेना; बुरी नीयत से किसी दूसरे की संपत्ति का गबन कर लेना।
अब जो बाज़ार में रखे हो तो हैरत क्या है,जो भी देखेगा वो पूछेगा की कीमत क्या है।
ज़िनगी में ग़ज़बें लाचारी भइल बा,
अपने बोझ ढोवल भारी भईल बा।
कहे के सब क़ेहु अपने बाs बाकिर,
बस गरज़ के सभे पुजारी भइल बा।
हँसत बाs लोग बस देख़ावा में ख़ाली,
ना त डाह के सबका बेमारी भइल बाs।
सम्बंध जोगावल भइल बड़ा मुश्किल,
रिश्ता में कुछ लोग व्यापारी भइल बाs।
केकरा के आपन कही केकरा के बैरी,
सगे लोगवा तलवार दुधारी भइल बा।
ज़िनगी में ग़ज़बें लाचारी भइल बा,
अपने बोझ ढोवल भारी भईल बा।
"जिंदगी रूपी भव-सागर"🌊 से,
सारे रिश्ते-नाते छोड़कर,
सारे बंधन तोड़कर,
इस "सागर" से भी विदा ले लूंगा।
जैसे- पटना से 05 साल रहकर विदा लिया था।
02 वर्षो में काशी ने भी गुदगुदाया।
फिर शेखपुरा की पहाड़ियों ने भी अपने आंचल में तीन साल बिठाया।
आगे का सफर भी अनवरत जारी है।
लेकिन, रूह कांप उठती है कभी-कभी ये सोचकर,
एक दिन इस दुनिया🗺️ से भी मुझे विदा लेना हैं।
जैसे सभी जाते हैं, वैसे मैं भी जाऊंगा।
अंत में चिता पर रख कर जला दिया जाऊंगा,
फिर राख बनकर नदियों में बह जाऊंगा!
फिर जब तक जिंदगी हैं।
मैं इतना ज्यादा परेशान क्यों रहता हूँ?
परखें तो कोई अपना नहीं हैं,
वैसे तो सभी अपने हैं।
क्या यही असली ज़िंदगी है? जो मैं जी रहा हूँ।
खुद से ही खुद को खो रहा हूँ,
हक़ीक़त बयां करने पर रो😓 रहा हूँ।
मेरी जिंदगी में अभी बहुत आग🔥 है,
इसलिए तो रौशनी और चमक बरकरार है।
यें सच हैं कि यें "विश्वजीत" भी एक दिन धुआं बनके उड़ जायेगा औऱ यहाँ बची सिर्फ़ इसकी राख रह जायेगी, जो यें आँखों👀 में रौशनी है, चेहरें पर चमक है कहीं इस ब्रह्माण्ड🗺️ में खो जाएगी, रह जायेगी तो बस उसकी यादें सिर्फ यादें.........
मोहब्बत है अगर हमसे, तो जताया भी करो।
हाल औरों से क्यू पूछते हो?, पास आया भी करो।
सुनूँगा सारी बातों को, जो तुमको मुझसे कहना है।
कुछ कह कर भी रुक जाते हो, न छुपाया भी करो।
बनूं हमराज तेरे हर राज का, अगर जो समझो तुम।
जता कर मुझसे अपनापन, बताया भी करो।
सब लोग है वाकिफ, तेरी चाहत जो मुझसे है।
जो कह दो गर मुझे बस तुम, न सताया भी करो।
तेरी सूरत नही मुझको, तेरी बस रूह प्यारी है।
की नजरों को मिलाकर, तुम न झुकाया भी करो।
विश्वजीत कुमार ✍️
साभार:- Social Media.
अंतिम विकल्प भारी है,
अब युद्ध की बारी है।
शह-मात के खेल में,
लगी मानवता सारी है।
माटी-माटी बंजर होगी,
खून से सनी धरती होगी।
खड़ी फसलें होगी लहूलुहान,
सुनाने को बस कहानी होगी।
घर में सन्नाटा छा जाएगा,
जब हँसाने वाला पिता खो जाएगा।
युद्ध की विभीषिका हुकूमरान क्या जाने,
जब इक मां से बेटा बिछड़ जाएगा।
पल-पल मांगे सुनी होगी,
माँ की साँसे भी थमी होगी।
कलेजा बाहर को आ जायेगा,
जब मासूम के कंधों पे पिता की अर्थी होगी।
हार-जीत का खेल है,
कोई भी जीत जायेगा।
उजड़े घरों के छप्पर,
बरसात में कौन बनायेगा।
कौन देगा बेटे को हौसला,
कोन बेटी के हाथ पीले करवायेगा।
माँ का जनाजा क्या?
बिना बेटे के कंधे के निकल जायेगा।
कलयुग में गीता का सार भूले,
द्वापर में कौरव पांडव का घमासान।
त्रेता में रावण का संहार किया,
फिर भी चाहते हो युद्ध हो इस बार।
द्वापर में कृष्ण ने कौरवों को समझाया
युद्ध का परिणाम विनाश ही लाया
जमीन के टुकड़े के खातिर सबने
मानवता को दांव पे लगाया।
साभार:- Social Media.
लहरों से खेलता हुआ आगे निकल गया,
कश्ती के ही सांचे में जो पतवार ढल गया।
मिल्लत में जो मज़ा है भला जंग में कहां,
क्या रूस को मिलेगा जो यूक्रेन जल🔥 गया।
कुछ बस्तियों का हाल बियाबान से पूछो,
क्या-क्या उड़ा के ले गया तूफान से पूछो।
मिल बैठ के मसलों का समाधान कीजिए,
कितनी बुरी है जंग ये जापान से पूछो।
पत्थर को काटने की जरूरत ही नहीं है,
मरने की, मारने की जरूरत ही नहीं है।
कुदरत ने एकमुश्त ही बख्शा तो सभी को,
धरती को बांटने की जरूरत ही नहीं है।
बहुत अजीब है ये बंदिशें मुहब्बत की ‘फ़राज़’
न उसने क़ैद में रखा न हम फरार हुए।
फ़राज़ का अर्थ:- ऊँचा, ऊँचाई, बुलंदी।हम देश के हैं और पूरा देश हमारा,
मेहनत से हमने चाँद ज़मीं पर है उतारा।
चन्नी जी आज आप जिसे कोस रहे हो,
यूपी बिहार ने ही है पंजाब संवारा।
उसके तराने मुक्तकों में गुनगुना रहा,
आंखों को ख्वाब अब भी उसी के दिखा रहा।
कॉलेज के दिनों में किसी ने चूम लिया था,
अब तक जुबां पे स्वाद लिपस्टिक का आ रहा।
तेरे लिए करता मैं रोज चीयर रहूँगा,
बनकर हमेशा ही मैं तेरा डीयर रहूँगा।
कुछ इस तरह से साथ निभाऊँगा जानेमन,
टैडी रहेगी तू मैं तेरा बीयर रहूँगा।
मन में थी अहिंसा की लगन तन पे लँगोटी,
लाखों में घूमता था लिये सत्य की सोंटी।
वैसे तो देखने में थी हस्ती तेरी छोटी,
लेकिन तुझे झुकती थी हिमालय की चोटी।
कवि प्रदीप✍️
पहला-पहला गणतंत्र दिया,
और अर्थशास्त्र का मंत्र दिया।
नालंदा से हमने जग को,
शिक्षा का पहला तंत्र दिया।
गिनती को शून्य दिया हमने,
गणनायें भी बलिहारी है।
हम धरतीपुत्र बिहारी हैं।
हम धरतीपुत्र बिहारी हैं।
सत्ता मद में जब चूर हुई,
हम जय प्रकाश बन कर डोले।
सिंहासन ख़ाली करो कि जनता आती है।
दिनकर बोले-
हम सिखों के दशमेश गुरु,
बिरसा मुंडा अवतारी हैं।
हम धरतीपुत्र बिहारी हैं।
हम धरतीपुत्र बिहारी हैं।
शम्भू शिखर की गर्लफ़्रेंड ने
काली रात में
काले समंदर के पास
बड़े ही काले मूड में पूछा-
तुम बैठे हो या चले गये ...
Arun Gemini Ramesh Muskan✍️
इन्सान का पतन उस समय
शुरू हो जाता है जब...!
अपनो को गिराने की सलाह
ग़ैरों से लेना शुरू कर देता है....!!
मुश्किल वक़्त हमारे लिये
आईने की तरह होता है,
जो हमारी क्षमताओं का सही
आभास हमें कराता है…!!
सर्दी में घर से निकले बड़ाई के पात्र हैं।
बैठे हैं जो चुप-चाप दुहाई के पात्र हैं।
शादी-शुदा हैं जो भी लुगाई के पात्र हैं।
और सारे ही कुँवारे रज़ाई के पात्र हैं।
नादान से भी दोस्ती कीजिये जनाब,
मुसीबत के वक्त समझदार लोग रिस्क कम लिया करते है।
किसी के हिस्से काशी आया किसी के हिस्से काबा
मुनव्वर राणा के हिस्से में आए योगी बाबा।
जोगीरा सा रा रा रा रा ।
है डूबती नैया इसे पतवार बना लो,
तलवार में थोड़ी सी और धार बन लो।
मोदी जीं है मौक़ा की अमित शाह को भेजो,
और पाक में भी NDA सरकार बना लो।
लब हिले तो मोगरे फूल खिलते हैं कहीं …
आपकी आँखों में क्या साहिल भी मिलते हैं कहीं …
ये सारे Article Shambhu Shikhar जी के Facebook Wall से ली गई हैं।
कृपया इसे Bihar के दृष्टिकोंण में रखकर पढ़े।👓👀
व्याकुल है मन, कंठ सूखकर छलनी है होने वाला।
पप्पू प्यारे ये लो पैसे, जल्दी जाओ मधुशाला।।
मूंग दाल और आलू भुजिया, साथ मे दुइ ठो डिस्पोजल,
और ले आना गोल्ड फ्लैक का पैकेट भी छोटा वाला।
सोच रहा हूँ नीट पियूँगा बहुत दिनों से प्यासा हूँ,
घूंट गले से उतरे तब जाकर के कहीं बुझे हाला।
ब्रांड बहुत पर भेद नहीं है जो मिल जाये वही सही,
'बूढा साधु', 'हस्ताक्षर' या मिल जाये 'कुत्ता काला'।
पियो मगर ये ध्यान रखो के, होश न खो बैठो ज़ालिम
यूँ ना हो कुत्ते मुंह चाटें, बिस्तर बना रहे नाला।
घर जाओ और जूते बजें फिर बापू बोलें नालायक,
नाम डुबा के खानदान का, कहाँ किया ये मुंह काला।
लेकिन ये क्या? ठेका तो है पांच मिनट की दूरी पर,
आधा घण्टा बीत गया है जाने कहाँ गया साला।
पप्पू प्यारा लौट के आया, मुँह लटकाये गर्दन तक,
कहा उधर तो पुलिस खड़ी है, बन्द पड़ी है मधुशाला।🍾
साभार:- Social Media.