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रविवार, 9 अगस्त 2026

तोहरा बिनाs


गीत-गजल कइसे लिखब ? अब हम तोहरा बिना।

आपन मन के हालात कइसे व्यक्त करब? अब तोहरा बिना।

छोड़ के जात समय तु त तनको ना सोचलू...

गुनगुनाइब अब कईसे, अब तोहरा बिना।


बचपन के ऊ किस्सा, आ ऊ मस्ती के दिन,

 सब याद आवत रहीs, अब तोहरा बिना।

काश!!! तु बस एक बेर देखे खातिर पीछे मुड़ गइल रहतीं...

ओही याद पर हम हम जी लेती, तोहरा बिना।


तू कहत रहलू कि तू हमेशा हमरा साथे में रहबु।

बतावऽ, अब हम कईसे रही तोहरा बिना। 

चाँद भी अब हमरा से पूछेला...

"तू अकेले छत पर का कर रहल बाड़s, अब ओकरा बिना?


नदीयां उजाड़ हो गईल, बगइचा बिरान हो गईल,

फूलवो में भी अब सुगंध नइखे  अब तोहरा बिना।!

यदि हम चहती त तहरा के रोक लेती,

लेकिन उ देह के हम करती भी का, तोहरा आत्मा  के बिना ?


गीत-गजल कइसे लिखब ? अब हम तोहरा बिना।

आपन मन के हालात कइसे व्यक्त करब? अब तोहरा बिना।

छोड़ के जात समय तु त तनको ना सोचलू...

गुनगुनाइब अब कईसे, अब तोहरा बिना।


विश्वजीत कुमार✍️

इस कविता का हिंदी अनुवाद

बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

छठ पूजा के कहानी : सुरुज भगवान के भक्तिपूर्वक पूजा-पाठ.


         छठ पूजा भारत के एगो पुण्य एवं धार्मिक पर्व ह। एह उत्सव के दौरान बहुत संख्या में भक्त लोग सूर्य देवता आ उनकर जीवनसाथी (मेहरारू) उषा, जेकरा के भोर आ सांझ (Morning & Evening) के देवी के रूप में पूजा कईल जाला। सब लोग ई पूजा में आपन परिवार के सब बेंकत (Member) के भलाई खातिर आशीर्वाद माँगेला आ जीवन चलावें वाला ऊर्जा के खातिर आभार व्यक्त करेला। एह मौका पर सब परिवार एकजुट होके छठी मइया के पूजा संस्कार में लाग जाला, आ एके संगे समय बितावेला। अनुशासन के प्रयोग, आपन मन के साफ-सफ़ाई, आ भगवान खातिर आपन समय देबे के ई सही समय होला। आईं छठ पूजा, एकर कहानी, संस्कार, औरी महत्व आदि के बारे में विस्तार से जानल जावं।


छठ पूजा के कहानी

बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, अवरी नेपाल के कुछ हिस्सा में छठ पूजा खूब धुम-धाम से मनावल जाला। लेकिन आज ऐह सब राज्य के अलावे भी भारत ही ना विदेशन में भी आज ई त्यौहार मनावल जाता। एकरा से कई गो लोकप्रिय कहानी भी जुड़ल बाड़ी सनऽ। सबसे पहिले हम बात करऽ तानी छठ पूजा के महाभारत से जुड़ाव के बारे में...


महाभारत से जुड़ाव 

    छठ पूजा के उत्पत्ति से जुड़ल एगो लोकप्रिय लोककथा महाभारत में मिले ला। एह कहानी के मुताबिक वनवास के समय में द्रौपदी औरी पांडव के बेहद गरीबी औरी कष्ट के सामना करे के पड़ल। धौम्या ऋषि (पांडव के राज पुरोहित आ धार्मिक मार्गदर्शक) सलाह देहनी कि सूर्य देवता के पूजा कइला से तारा लोग के सब समस्या से मुक्ति मिल जाई आ आपन खोवल राज्य भी वापस आ जाई। ओकरा बाद द्रौपदी ईमानदारी से छठ पूजा कइली औरी सूर्य भगवान के सुबेरे औरी साझी के अर्ध्य दिहली। एकरा से पांडव के समस्या के समाधान हो गईल। एहमें भगवान सूरज के ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता आ सम्मान के महत्व के भी रेखांकित कइल गइल बा।


भगवान राम औरी सीता के लोक कथा

एह लोककथा के अनुसार, भगवान राम, सीता, आ लक्ष्मण 14 साल वनवास में बितवले। राक्षस राजा रावण के हरा के उ लोग अयोध्या वापस आ गईले। काहे से की रावण एगो ब्राह्मण रहे ओहि से ब्राह्मण के वध से मुक्ति पावें खातीर राम जी के एगो राजयज्ञ करे के सलाह मिलल। तब, राम जी ब्रह्महत्या मुक्ति यज्ञ के आयोजन कईनी। ओही बेड़ा देवी सीता भी व्रत रखली आ छठी मईया आ सूर्य के पूजा कइली। दुनु जाना मिल के डूबत आ उगत सूरज के अर्घ्य चढ़ावलोऽ

इहो याद राखल जाओ, कि वनवास के समय सूर्य भगवान राम आ सीता के बुद्धि आ बल के इनाम देले रहले, जवना से उ लोग सब कठिनाई के सहन करे में सक्षम हो गईल लोऽ। त, आपन देवता के प्रति आपन आभार व्यक्त करे खातिर दुनु जाना मिल के ओ बेड़ा जवन फल, औरी पारंपरिक मिठाई मिलल, ओकरे से ही पूजा कईल लो। इहे रिवाज आज ले चलत बा।


कर्ण के कहानी : जे सूर्य भगवान के भक्त रहलेऽ

एगो औरी लोककथा के अनुसार, भगवान सूर्य आ कुंती के पुत्र कर्ण महाभारत में एगो वीर योद्धा रहले। उ सूर्य देव के प्रति बहुत भक्ति खातिर प्रसिद्ध रहले। देवता से रक्षा औरी अजेयता के आशीर्वाद लेवे खातिर उ अपार तपस्या कईले। कर्ण, व्रत रख के एगो नदी के किनारे छठ पूजा कईले। उनकर भक्ति से प्रसन्न होके सूर्य देवता कर्ण के विशेष शक्ति दिहले। हालांकि उनकर जिनगी बहुते बुरा तरह से खतम हो गइल बाकिर सूर्य देवता के प्रति उनकर भक्ति के सराहना आजो कइल जाला। महाभारत में इहो लिखल बा की भगवान सूर्य औरी माता कुंती के लईका कर्ण रहले।  


छठी मईया : छठ पूजा के देवी

छठ पूजा के समय भक्त लोग छठी मईया जिनका के प्रजनन आ मातृशक्ति के देवी के रूप में भी पूजा कईल जाला। बिहार अवुरी पूर्वी उत्तर प्रदेश के स्थानीय लोककथा के मुताबिक छठी मईया के पूजा कईला से उनका लोग के स्वस्थ गर्भधारण में माई के आशीर्वाद मिलेला। एकरा से परिवार में समृद्धि भी आवेला औरी सब के निमन स्वास्थ्य सुनिश्चित भी होखेला।


छठ पूजा संस्कार 

छठी मईया के भक्त लोग बहुत श्रद्धा आ अनुशासन से छठ पूजा करेला। ई परब चार दिन ले चले ला। आई ओकरा बारे में विस्तार से जानल जावं :

छठ पूजा के पहिला दिन (नाहाय खाय) 

छठ पूजा के पहिला दिन भक्त लोग साफ पानी के स्रोत जइसे की कवनो नदी, पोखड़ा, नहर में नहा के अपना के शुद्ध करेला। पूजा के समय देवता के चढ़ावे खातिर पुण्य भोजन के सामान तैयार करेलालो औरी बिना लहसुन प्याज के लौकी के तरकारी औरी भात बना के खा के उपवास शुरू होला।

छठ पूजा के दूसरा दिन (खरना)

सूर्यास्त के बाद भक्त लोग आपन व्रत तोड़ेला। इ लोग सूर्य देव औरी छठी मईया के प्रतीकात्मक प्रसाद के रूप में पुण्य भोजन के सेवन करेला। पुण्य भोजन परिवार के सब सदस्य में भी बांटल जाला। एकरा के कृतज्ञता के प्रतीक मानल जाला। प्रसाद के रूप में रसिआव, रोटी औरी कुछ फल रहेला। 

छठ पूजा के तीसरा दिन (सांझ का अर्ध्य)

एह दिन श्रद्धालु लोग उपवास करत रहेला आ डूबत सूरज के विशेष प्रार्थना करेला। परिवार, दोस्त, रिश्तेदार, आ समुदाय के सब जाना कवनो पानी के स्रोत या नदी के किनारे एकट्ठा हो के बांस के टोकरी (सूप) में सूर्य भगवान के अर्ध्य चढ़ावेला। एक बेर शाम के पूजा खतम होखला के बाद सूरज के डूबे के इंतजार करे लालो औरी सभे जन के भलाई के खातीर छठी मईया से प्रार्थना करे लालो औरी एही दिने रात में सबका घरे कोशी भराला, फेर ओही कोशी के लेके भोर में घाट पर ले जा के फेन से उ प्रक्रिया के दुबारा कईल जाला।   

छठ पूजा के चौथा दिन/अंतिम दिन (उषा अर्घ्य)।

छठ पूजा के आखिरी दिन, एह दिन भक्त लोग सबेरे-सबेरे पानी में खड़ा होके उगत सूर्य के प्रार्थना करेला। भगवान सूर्य के अर्घ्य (जल, फल, आ फूल के विधिवत अर्पण) चढ़ावल जाला, मंत्र के जाप कईल जाला। सब परिवार आपन देवता के प्रति आभार व्यक्त करेला। अर्घ्य चढ़ते ही भक्त लोग आपन व्रत तोड़ेला, आ उत्सव शुरू हो जाला।


छठ पूजा के महत्व

छठ पूजा में पर्यावरण आ प्रकृति के सम्मान करे के विचार के बढ़ावा मिले ला। एह मौका पर सूरज देवता के पूजा कइला से व्यक्ति के कई तरीका से फायदा होला।


सूर्य भगवान के भक्ति

सूर्य देवता स्वास्थ्य आ जीवन शक्ति के प्रतीक हवे। एह मौका पर उनकर पूजा कइला से लोग के उनकर दिव्य आशीर्वाद सुस्वास्थ्य, धन आ समृद्ध जीवन के रूप में मिले ला।


आध्यात्मिक सफाई के काम होला

छठ पूजा के संस्कार/भुखला से आत्मा आ मन के शुद्धि हो सकेला। भक्त लोग नदी या झील में नहा के उपवास करेला आ पूरा भक्ति से देवता से प्रार्थना करेला। ई सब गतिविधि ओह लोग के अध्यात्म के नया ऊंचाई पर ले जाला।


ई पर्व सब लोग के एक साथ ले आवेला 

छठ पूजा परिवार आ समुदाय के एकजुट होखे, एक संगे देवता से प्रार्थना करे, आ परब मनावे के सबसे बढ़िया समय हां। एहसे ओह लोग के रिश्ता मजबूत हो जाला।


एगो पूरा करे वाला छठ पूजा के टिप्स

त्योहार के सही तरीका से मनावे खातिर एह सिफारिश के रउवा सभे पालन करीं : 


जल्दी सबकुछ तइयारी कर लीं

छठ पूजा के तइयारी कुछ दिन पहिले से शुरू कर दीं, आपन सुविधा के हिसाब से, पूजा के जरुरी सब सामान जइसे कि टोकरी, फल आदि खरीदीं पुण्य भोजन के सामान परम सावधानी से तैयार करीं। 


मानसिक रूप से तइयार रहे के चाहीं 

याद रखीं कि छठ पूजा में सूरज देवता औरी छठी मईया के प्रार्थना कइल जाला। पानी में खड़ा होखल, आ लमहर व्रत ई होला। एह संस्कारन खातिर अपना के तइयार करीं. एह से रउरा एह मौका के बहुते भक्ति से आ बिना कवनो दिक्कत के मनावे में मदद मिली। 


आपन घर औरी आसपास के सफाई करीं

याद रखी कि छठ पूजा में साफ-सफाई के बहुत महत्व बा। एही से आपन घर, आसपास, आ नदी के किनारे के साफ करीं। पूजा खातिर सही जगह चुनीं। अगर नदी ना जा पाईं त पास के इलाका में पूजा खातिर अस्थायी पानी के स्रोत बनाईं, साफ-सुथरा पोखरा भी पूजा खातिर उपयुक्त बा।


एगो अंतिम बात

छठ पूजा एगो मशहूर परब हऽ जवना में जीवन, प्रकृति, ऊर्जा, आ सूरज देवता के मनावल जाला। एह दिन लोग परिवार के साथे मिल के संस्कार में भाग लेला, पुण्य भोजन आ अभिवादन साझा करेला, प्रियजन से मिले जाला, आ लंबा समय तक चले वाला छाप छोड़ेला। रउआ सभे बहुत श्रद्धा से छठ पूजा 2025 मनाईं, समृद्ध आ पूर्ण जीवन खातिर सूर्य भगवान आ छठी मईया से आशीर्वाद मांगी। 

सब लोग के छठ पूजा के हार्दिक शुभकामना।🙏

बुधवार, 11 दिसंबर 2024

जब केहू दिल💕 में उतरs जाला।


मुरझाईल फूलवा🥀, लागे ला महके🌹,

चंचल चिरईया मन के लागे ले चहके🐥।

दीया, मन में पिरितिया के जर🪔 जाला,

जब केहू दिल💓 में उतरs जाला।


नीक नहीं लागे ला केहू के बतिया🗣️,

हर जगे लउके बस उहे सुरतिया👱🏻‍♀️।

दोसरा में बस जाला, आपन प्राणवाँ🥰।

जियरा ना माने ला अपने कहानवाँ,

केतना आस मन के घवद पर फर जाला,

जब केहू दिल💓 में उतरs जाला।


आसान नाही होला, ई नेहिया💕 के काम।

सुख-चैन सब कुछ, हो जाला नीलाम।

लागे ना भूख-प्यास, कौनो भी बेला।

लोग अपने ही घर में, हो जाला अकेला🥲।

नैन हँसते-हँसते, लोरवा😢 से भर जाला.

जब केहू दिल💓 में उतरs जाला।


साभार - सोशल मीडिया 

मंगलवार, 12 नवंबर 2024

खोइंछा (Khoencha)

खोइंछा

               हमनी के बिहार में एगो विधि बा जवन महिला सशक्तिकरण के दिखावे ला या कह सक तानी की बेजोड़ नमूना बा। जब कवनो शादी भईल मेहरारू चाहे घर (मायके) से ससुराल जाली, चाहे ससुराल से घरे (मायके) जाली तब उनका के खोइंछा दिआला। खोइंचा के यदि परिभाषित कईल जाव तs कह सकत बानी की - चाउर के कुछ दाना, हरिहर दुभी के पत्तई, कुछ पईसा अवरी हल्दी। अब ई सब काहे दिहल जाला ऐकर एगो ना!!! और कई को कारण बतावल जाला। एगो तs ई कारण बा  - जब कभी बेटी चाहे बहू घर से बाहर जाली तब उनका लागी की जवन उनका हाथ में ई जवन गठरी बा उ ओकर परिवार हां औरी उनके साथे जाता अउर ओकरा परिवार के कमी ना खली। ऐहीसे का होई कि उनका लागी की हमार परिवार हमरे साथे बा औरी उनका कबो परिवार के कमी ना महसूस होई।

       दोसर कारण ई बतावल जाला की, ई जेतना चीज़ जैसे  - चाउर के कुछ दाना, हरिहर दुभी, कुछ पईसा अवरी हल्दी इनका के दिआइल बा सबके कवनो ना कवनो मतलब बोला। चावल जवना के ई मतलब होखेला की बेटी के घर में कबो भी अन्न के कमी न होखे। पईसा ई बतावेला की बेटी के घर में कबो लक्ष्मी के कमी न होखे। जवन दुभ के पतई होखेला ऊ संजीवनी के दर्शावेला। संजीवनी यानी की अमृत। अवर जवन ऊ गांठ होखेला जेईमे ऊ सब के बांधल जाला ऊ ई दर्शावेला की जवन ई बेटी होली ऊ इन सब के आपस में जोड़ के रखेली जेकरा से पूरा घर आच्छा से चलेला। अवरी जवन ई काम बातें ऊ बस घर के बहू या बेटी ही कर सकs तारीs ई पूरा ब्यौरा हां, हमनी के यहां खोइंचा के.....

शनिवार, 10 अगस्त 2024

लाहे लाहे जिंदगी के दगड़त बा गाड़ी


लाहे-लाहे जिंदगी के दगड़त बा गाड़ी,

 रोज एक-एक दिन कटत बाs हिम्मत के बरियारी।

 चले के तs मन तनको नईखे करतs,

 बाकीर थके नईखे देतs हमरा घर के जिम्मेदारी।


लाहे-लाहे जिंदगी के...


अपना हिस्सा के सुख-दुख अपने झेलअs तानीs,

 नईखे केहू देत दिलासा नईखे मिलत अकवारी।

 हँस के लोर छिपावे के आदत हमहु सीख ले ले बानी,

 जान गईनी की काम ना आई कवनो रिश्तेदारी।


लाहे-लाहे जिंदगी के...


 निमन बाउर कुछ ना होला सब समय के फेरा हs -२

 नियति कबहु हंसाई कबहु रुलाई सबके पारा-पारी -२


लाहे-लाहे जिंदगी के दगड़त बा गाड़ी,

 रोज एक-एक दिन कटत बाs हिम्मत के बरियारी।


 साभार - सोशल मीडिया 

शुक्रवार, 2 अगस्त 2024

भोजपुरी ग़ज़ल


हर जात में कउवा बा, 

हर जात में कुत्ता बा।

हर जात में हो भइया, 

मिल जात सपूता बा।


साधु जे बा साधक बा, 

सम्मान मिलो उनुका।

सधुवे का भेसवा में,

इहां ढेरे कुकुरमूत्ता बा।


झुठऊ के हवे अगड़ा,

झुठऊ के हवे पिछड़ा।

ऊहे नूँ जुलूम ढावे,

जेकरा बलबूता बा।


बा काम कवन अइसन,

जे होइ सकेला ना।

संगवा में जहाँ जेकरा,

चनिया के जूतावा बा।


हम होखीं चाहे रउवा,

हाक़िम इजलासो के।

कुछ ना कुछ सभे पापी,

केहु ना ऐहिजा अछूता बा।


सीसा-लोहा टूटी,

साँचा में ढला जाई।

टूटी त कहां जूटी,

जे नेह के सूता (धागा) बा।


            महेश ठाकुर चकोर ✍🏻

मंगलवार, 23 जुलाई 2024

भोजपुरी सोहर गीत (Bhojpuri sohar Geet/song)



कवना मासे बाबा मोरऽ विवाह कईले, 
कवना मासे विदा कईले हो।
हे लालना, कवना मासे सुतली सेजारियां की, 
देहियां मोरा भाड़ी भईले हो -२

आरी!!! रहरी के दाल रहरी आवन लागे, भात देखी हुली बड़े हो।
आरे अपने बलमुआं के पवती तऽ खुबे लतीअवती, 
की चुरकी उखारी लेती हो।
तऽ लालना लातन-लातन खुबे लतीअवती
की भाड़सा निकाली लेती हो -२

कवना मासे बाबा मोरऽ विवाह कईले, 
कवना मासे विदा कईले हो।
हे लालना, कवना मासे सुतली सेजारियां की, 
देहियां मोरा भाड़ी भईले हो -२

हे लालना, मन करे खापड़ा चबइती,
खटाई खुबे खइती नु हो।
तऽ लालना लातन-लातन खुबे लतीअवती
की भाड़सा निकाली लेती हो -२
❁´◡`❁

कवन मासे हमरो बियाह भईले,
कवन मासे गवना भईले हो।
हे लालना!!! कवन मासे सईया सेज सुतनी,
त कबों पाँव भारी भईले हो -२

वैशाख मासे हमरो बियाह भईले,
ज्येष्ठ मासे गवना भईले हो।
हे लालना!!! आषाढ़ मासे सईया सेज सुतनी,
सावन में पाँव भारी भईले हो -२

सईया जी के कईल धईल करनी,
त हमरो कमरीयां टूटे हो।
ऐ सासु जी दाबी आके हमरो पजरिया,
त होरिल्ला जन्म लिहे हो -२

लिखले हऽ कुंदन सोहरिया के,
रितिक गावेले हो।
हे लालना!!! गोतनी, देयादिन सबे जुटल,
महल में होखे सोहर हो -२

कवन मासे हमरो बियाह भईले,
कवन मासे गवना भईले हो।
हे लालना!!! कवन मासे सईया सेज सुतनी,
त कबों पाँव भारी भईले हो।

हे लालना!!! कवन मासे सईया सेज सुतनी,
त कबों पाँव भारी भईले हो
❁´◡`❁

अईसन मनोहर मंगल मूरत सुहावन सुन्दर सूरत हो।
ऐ राजा जी ऐकरे तऽ रहल हऽ जरूरत ई मुहूर्रत ख़ूबसूरत हो -२

ऐ राजा जी.....

बबुआ हमार जी.एम. होईये, ओहसे उपरा डी.एम. होईये हो -२
ऐ लालना!!! हिन्द के सितारा सी.एम. होईये,
ओहसे उपरा पी. एम. होईये हो -२

ऐ लालना!!! एकरे तऽ रहला जरूरत मुहूर्रत ख़ूबसूरत हो -२

होईये वाईस चांसलर यूनिवर्सिटी के,
मेयर लंदन सिटी के नु हो -२
ऐ लालना!!! होम सेकेटरी गरमेंत्री के,
तऽ हीरा अपना मिट्टी के नु हो -२

ऐ राजा जी, एकरे तऽ रहला जरूरत मुहूर्रत ख़ूबसूरत हो -२

बबुआ हमार ब्रिलिएंट होईये बेस्ट स्टूडेंट होईये हो-२
ऐ लालना!!! बात-चीत से 100% (हंड्रेड परसेंट) होईये,
अमेरिका के प्रेसीडेंट होईये हो -२

ऐ राजा जी, एकरे तऽ रहला जरूरत मुहूर्रत ख़ूबसूरत हो -२

मुनि बाबा अईसन बबुआ ज्ञानी होईये,
राजाजी जईसन दानी होईये हो -२
ऐ लालना!!! अखिल भूमंडल राजधानी होईये,
तऽ अपना बाबू जी अइसन दानी होईये हो-२

 ऐ राजा जी, अखिल भूमंडल राजधानीन होईये,
बापे अस खानदानी होईये हो।

ऐ राजा जी, ऐकरे तऽ रहला जरूरत मुहूर्रत ख़ूबसूरत हो।

बबुआ हमार महाराज होईये, राजाधिराज होईये हो -२
ऐ लालना!!! धातु में हीरा पोखराज होईये,
सिरवां के ताज होईये हो -२

ऐ लालना.....
❁´◡`❁