बुधवार, 23 सितंबर 2026

वो चाहे शाम को घूमे या आधी रात को घूमे...

                                                                                             Source - BBC बीबीसी

 

वो चाहे शाम को घूमे या आधी रात को घूमे।

अगर वह भींगना चाहे भरी बरसात में घूमे।।

तुम्हें किसने दिया है हक ये दुर्व्यवहार करने का।

वो एक लड़की की मर्जी है वो किसके साथ में घूमे।।


नज़रिया अपना बदलो, उसपे पहरे क्यों बिठाते हो?

उसी की आज़ादी पर तुम सवाल संगीन उठाते हो?

सड़क,  राहें या कोई सुनसान कोना,

वो निर्भय हो के अपने ख़्वाब में घूमे।।


दरिंदों को सिखाओ पाठ, तुम इंसान होने का,

गुनाहगारों को दो डर,  ज़मीं पर चैन खोने का।

जमुई की  पावन धरा हो, या देश का कोई  कोना,

उसे हक़ है, कि वो अपने स्वाभिमान में घूमे।।


संस्कारों की झूठी आड़ में, तुम उसकी साँसें मत छाँटो,

जो घिनौना काम करे, उस दरिंदे में गुनाह बाँटो।

उसे हक़ है, ज़माने की बंदिशों को तोड़ आगे बढ़ने का,

वो अपनी रोशनी लेकर, घने ज़ुलमात (अंधेरे) में घूमे।।


तुम्हारी सोच छोटी है, मगर उसके क़दम हैं ऊँचे 

ज़माना के डर से वो क्यों पीछे खिंचे?

तुम्हें किसने दिया अधिकार, उसकी राह रोकने का। 

वो जिसकी हमफ़सर बनना चाहे, उसी के साथ में घूमे।।


वो चाहे शाम को घूमे या आधी रात को घूमे...

उसे आज़ाद रहने दो, वो अपनी शान से घूमे!


वो चाहे शाम को घूमे या आधी रात को घूमे।

अगर वह भींगना चाहे भरी बरसात में घूमे।।

तुम्हें किसने दिया है हक ये दुर्व्यवहार करने का।

वो एक लड़की की मर्जी है वो किसके साथ में घूमे।।