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आमी मंदिर जिसे माँ अम्बिका स्थान के नाम से भी जाना जाता है। ये मंदिर बिहार मे मौजूद शक्ति पीठों मे से एक है जहा माँ सती ने अपने प्राण त्याग दिये थे। आज इस आलेख में हम अम्बिका भवानी की कहानी को पढ़ते हुए VIRTUAL दर्शन करेंगे। हिन्दू ग्रंथों में माँ अम्बिका भवानी को अम्बे, पार्वती, गौरी, दुर्गा आदि। नामो से भी जाना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्म देव के पुत्र दक्ष प्रजापति का उल्लेख आता है। भगवान शिव के अभिशाप और ब्रह्म देव के झूठ के कारण उन्होंने अपने पांचवें सिर को शिव के सामने खो दिया था। दक्ष को इसी वजह से भगवान शिव से द्वेष था और भगवान शिव और माता सती का विवाह नहीं कराना चाहते थे।
हालांकि, माता सती भगवान शिव की ओर आकर्षित हो गई और माता सती ने कठोर तपस्या की और अंत में भगवान शिव और माता सती का विवाह संपन हुआ।
भगवान शिव से प्रतिशोध लेने की इच्छावश राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। दक्ष ने भगवान शिव और अपनी पुत्री माता सती को छोड़कर सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया। माता सती ने यज्ञ में उपस्थित होने की अपनी इच्छा भगवान शिव के समक्ष व्यक्त की, जिसे भगवान शिव ने रोकने के लिए अपनी पूरी कोशिश की परंतु माता सती यज्ञ में चली गई।
यज्ञ मे पहुंचने के पश्चात माता सती का कोई भी स्वागत नहीं किया गया। इसके साथ ही, दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का घोर अपमान भी किया। माता सती से अपने पिता द्वारा अपने पति का अपमान नहीं सहा गया। और अपमान से क्रोधित होकर माँ सती ने उसी यज्ञ कुंड मे कूदकर अपने प्राण त्याग दिये।
भोजपुरी भाषी क्षेत्र में आज भी एक कहावत प्रचलित है जो इसी घटना को प्रस्तुत करती है। कहावत इस प्रकार है👇👇
बिन बुलवले मत जईह ऐ गौरा, आदर ना होई तोहार।
यानी कहीं भी हमें यदि आमंत्रण नहीं मिला है तो वहां नहीं जाना चाहिए। वहां पर आदर सत्कार नहीं मिलता है। यह सीख भी हमें इस घटना से प्राप्त होती है।
जब भगवान शिव को इस घटना के बारे मे पता चला तब वो बहुत ही क्रोधित हो गये और वीरभद्र अवतार के रूप में प्रजापति के यज्ञ को नष्ट करने के साथ ही उनका सिर धर से अलग कर दिये। देवताओं के अनुरोध के बाद दक्ष को वापस जीवित किया गया और एक बकरे का सिर लगाया गया।
दु:ख में डूबे शिव ने माता सती के शरीर को उठाकर, विनाश का दिव्य तांडव शुरू कर दिया। यह देख देवताओं ने भगवान विष्णु को इस विनाश से बचाने का अनुरोध किया। जिस पर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत शरीर के 52 टुकड़े कर दिए। शरीर के विभिन्न हिस्से भारतीय उपमहाद्वीप (नेपाल, श्रीलंका ,बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत) के कई स्थानों पर गिरे और वह शक्ति पीठ के रूप में स्थापित हुए। उन्ही पीठों मे से एक है अम्बिका मंदिर या माँ अम्बिका स्थान जिसे हम आमी मंदिर के नाम से भी जानते है।
फेसबुक पर एक पोस्ट दिखा जो दिल को झकझोर दिया। लेखक की अनुमति से मैं साझा कर रहा हूं आप भी पढ़े।
बस से उतरकर जेब में हाथ डाला तो मैं चौंक गया!!! जेब कट चुकी थी। जेब में था भी क्या, कुल 90/- रुपए और एक खत, जो मैंने माँ को लिखा था कि- मेरी नौकरी छूट गई है, अभी पैसे नहीं भेज पाऊँगा। तीन दिनों से वह पोस्टकार्ड जेब में पड़ा था। पोस्ट करने को मन ही नहीं कर रहा था। मेरे 90 रुपए जा चुके थे। यूँ तो 90 रुपए कोई बड़ी रकम नहीं थी, लेकिन जिसकी नौकरी छूट चुकी हो, उसके लिए 90/- रुपए 900/- से कम नहीं होते। कुछ दिन गुजरे, माँ का खत मिला। पढ़ने से पहले मैं सहम गया। जरूर पैसे भेजने को लिखा होगा। लेकिन, खत पढ़कर मैं हैरान रह गया। माँ ने लिखा था- "बेटा, तेरा 1000 रुपए का भेजा हुआ मनीआर्डर मिल गया है। तू कितना अच्छा है रे!!!... पैसे भेजने में कभी लापरवाही नहीं बरतता। " मैं इसी उधेड़-बुन में लग गया कि आखिर माँ को मनीआर्डर किसने भेजा होगा???
कुछ दिन बाद, एक और पत्र मिला। चंद लाइनें थीं- आड़ी तिरछी। बड़ी मुश्किल से खत पढ़ पाया। लिखा था-
"भाई, 90 रुपए तुम्हारे और 910 रुपए अपनी ओर से मिलाकर मैंने तुम्हारी माँ को मनीआर्डर भेज दिया है। फिकर न करना।.... माँ तो सबकी एक जैसी होती है न!!! वह क्यों भूखी रहे ?
तुम्हारा- जेबकतरा.
A post appeared on Facebook that shocked the heart. With the permission of the author, I am sharing you too.
Getting off the bus and putting my hand in my pocket, I was shocked !!! The pocket was cut. What was there in the pocket, a total of Rs. 90 / - and a letter, which I wrote to my mother that - I have missed my job, I will not be able to send money now. For three days, he was lying in a postcard pocket. Did not feel like posting at all. My 90 rupees were gone. Though there was no huge amount of Rs 90, but for the one who has missed the job, Rs 90 / - is not less than Rs 900 / -. A few days passed, mother's letter was received. I agreed before reading. Must have written to send money. But, I was surprised to read the letter. Mother wrote- "Son, you have received a money order sent of 1000 rupees. You are so good,!!! ... Never take care of sending money." Who would have sent the money order to ???
A few days later, another letter was received. There were few lines - diagonally slanted. Read the letter with great difficulty. Wrote -
"Brother, 90 rupees for you and 910 rupees on your behalf, I have sent MoneyOrder to your mother. Do not worry. Mother is the same everyone !!! Why should she be hungry?"
आप सभी को मातृ दिवस की हार्दिक बधाइयां। दुनिया में कोई भी ऐसी कलम नहीं जो माँ के त्याग एवं उनकी खूबियों के बारे में वर्णन कर सके। मैंने माँ के ऊपर कुछ पंक्तियां लिखने का साहस किया है। आप पढ़े और जरूर बताएं कि मेरा यह प्रयास कैसा है?
साई कॉलेज ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग,ओनामा के माननीय अध्यक्ष महोदय, उपाध्यक्ष, मुख्य अतिथि, प्राचार्य, प्राध्यापकगण, प्रशासनिक कर्मचारी, हमारे प्रिय प्रशिक्षु एवं नए आगुन्तक प्रशिक्षुगण मैं विश्वजीत कुमार आप सभी का साई कॉलेज के प्रांगण में स्वागत करता हूं। सबसे पहले मैं अपने बारे में आपको कुछ बता दूं मैं आपको इस महाविद्यालय में ललित कला (Visual Art) की शिक्षा दूंगा। कला के बारे में आपके मन में बहुत सारे विचार उत्पन्न हो रहे होंगे। उन्हीं विचारों एवं भावों को जब आप पेपर और कैनवास पर व्यक्त करना शुरू करते हैं तब वही विचार दर्शक के लिए कला बन जाती हैं और आप कलाकार।
आप इस महाविद्यालय में कला से कलाकार एवं एक भावी शिक्षक बनकर निकलेंगे मैं इसकी कामना करता हूं। सबसे पहले मैं आप सभी को B.Ed. कोर्स और सबसे अच्छा कॉलेज चुनने के लिए आपकी इस पसंद की सराहना करता हूं। इस महाविद्यालय में अध्ययन के साथ-साथ आपको संगीत, नृत्य, नाटक, कला, शारीरिक स्वास्थ्य एवं वृक्षारोपण का भी प्रशिक्षण दिया जाता है। जिससे कि आप एक सर्वगुण संपन्न शिक्षक बनकर इस महाविद्यालय से निकले और अपने जीवन में हमेशा सफलता के शिखर पर उपस्थित रहें। सफलता के बारे में ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी का विचार है-
When your signature turns into Autograph, you have achieved success.
(जब आपका हस्ताक्षर ऑटोग्राफ में बदल जाए उस समय आप सफल हो चुके हैं।)
और अंत में मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आप अपने जिंदगी में कुछ ऐसे कार्य करें कि दुनिया आपको फेसबुक पर नहींगूगलपर सर्च करें।
साई कॉलेज ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, ओनामा के माननीय अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य अतिथि, प्राचार्य, प्राध्यापकगण, प्रशासनिक कर्मचारी, प्रशिक्षु एवं हमारे नए आगुन्तक प्रशिक्षुगण। आज आप सभी का साई कॉलेज के प्रांगण में स्वागत🙏 है। मेरा नाम विश्वजीत कुमार है और मैं आप सभी को कला की शिक्षा दूंगा। कला के बारे में बस इतना ही कह सकते हैं कि मन में उत्पन्न भावों को कैनवास पर व्यक्त करना ही कला है।
मैं आप सभी को प्रशिक्षण के लिए डी.एल.एड. कोर्स और सबसे अच्छा कॉलेज चुनने के लिए आपकी पसंद की सराहना करता हूं और आप पूरी लगन और निष्ठा से अपना कोर्स पूरा करेंगे इसकी कामना भी करता हूं। आप एक शिक्षक बनने के उद्देश्य से इस महाविद्यालय में नामांकन कराएं हैं और एक शिक्षक को सर्वगुण संपन्न होना चाहिए। इसी उद्देश्य से इस महाविद्यालय में अध्ययन के साथ-साथ खेल, लेखन कला, नृत्य, संगीत, इत्यादि। की भी शिक्षा प्रदान की जाती है ताकि आपके अंदर सभी तरह के नेतृत्व, टीम वर्क, आत्मविश्वास, सम्मान, इत्यादि। जैसे व्यक्तिगत गुणों का विकास हो सके। मैं आपको सलाह देना चाहूंगा कि आप हर कार्य में असाधारण बने और जो भी कार्य आप कर रहे हैं उसे पूरे दिल से करें तभी आप सफलता प्राप्त कर सकते हैं। सफलता से मुझे एक घटना याद आ रही है- एक बार ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से किसी ने पूछा कि सफलता की परिभाषा को हम कैसे माप सकते हैं? एक इंसान को कब समझना चाहिए कि वह सफल हो चुका है? तब कलाम जी ने कहा था-
"When your signature turns into Autograph, you have achieved success."
(जब आपका हस्ताक्षर ऑटोग्राफ में बदल जाए उस समय आप सफल हो चुके हैं।)
आप सभी फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम पर हमेशा किसी ना किसी को सर्च करते ही होंगे। लेकिन मेरा मानना है कि आप अपने ज़िन्दगी में कुछ ऐसे कार्य करें कि दुनिया आपको फेसबुक पर नहीं गूगल पर सर्च करें।
हम सभी के बीच हमारे मुख्य अतिथि आ चुके हैं उनके गरिमामयी उपस्थिति पर मैं विश्वजीत कुमार उनका हार्दिक स्वागत करता हूं।
or
साई कॉलेज ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, ओनामा के प्रांगण में उपस्थित माननीय अध्यक्ष महोदय, एच.ओ.डी. (H.O.D.) सर, प्रध्यापकगण, कर्मचारीगण एवं हमारे नए आगुन्तक प्रशिक्षुगण मैं विश्वजीत कुमार आप सभी का हृदय से स्वागत💐 करता हूं।
इसी बीच में चाहूंगा कि हमारे बीच उपस्थित साई कॉलेज ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग के माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित एच.ओ.डी. (H.O.D.) सर प्राध्यापकगण एवं प्रशासनिक कर्मचारी आप सभी मंच पर आएं और विद्या की देवी मां शारदा के आगे दीप प्रज्वलित करके आज के इस कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ करें।
Male Voice:- खुदावंत तेरे नाम से आगाज करता हूं,
तेरा बंदा हूं तेरी रहमतों पर नाज़ करता हूं।
फकत तेरी मदद और ताकत के भरोसे पर मुझे उड़ना नहीं आता,
मगर परवाज करता हूं।
Female Voice:- आइए हम सभी उस अलौकिक शक्ति,
अदृश्य शक्ति को याद करें और धन्यवाद करें कि हमें यह सुंदर जीवन मिला है।
हम धन्यवाद करें परमपिता परमात्मा का और इस सृष्टि का।
Male Voice:- आज हमारे बीच उपस्थित है महाविद्यालय के नए प्रशिक्षु आप सभी के स्वागत के लिए एक तरन्नुम भरा स्वागत गीत लेकर आ रही हैं महाविद्यालय की छात्राएं- अक्षिता आनन्द, निधि, रुही, सीमा।
Male Voice:- अतिथि देवो भव:
कहती ये भारत की धरा।
स्वागत करके आपका,
निभा रहे हैं हम यह परंपरा।
इस प्रांगण में उपस्थित प्रशिक्षुओं एवं प्राध्यापकगणों का स्वागत संबोधन करने के लिए मैं आमंत्रित कर रहा हूं इस मंच पर हमारे महाविद्यालय के माननीय अध्यक्ष महोदय को वह आए और आप सभी के स्वागत में दो शब्द कहें। सर के बारे में कहना चाहूंगा-
सुनकर कर दे अनसुना ऐसी इनकी आवाज नहीं,
मिल कर भूल जाएं कोई ऐसे इनके अल्फाज नहीं।
Female Voice:- किसी महफ़िल में छिप जाए,
ऐसे इनके अंदाज नहीं।
सूरज से दमकते हैं,
यह किसी परिचय के मोहताज नहीं।
Male Voice:- स्वीकार आमंत्रण किए रखे हमारा मान कैसे करें कृतज्ञता
स्वागत है आपको श्रीमान.....।
Female Voice:- अब हम मंच पर बुलाने जा रहे हैं हमारे महाविद्यालय के माननीय एच.ओ.डी. (H.O.D.) सर श्री बालदेव प्रसाद जी को वह आए और आप सभी को संबोधित करें। सर के बारे में कहना चाहूंगी
ईश्वर ने भी कीमती रत्न,
गिनती के ही बनाए हैं।
उन रत्नों में सबसे कीमती,
आज हमारे बीच में आए हैं।
Female Voice:- कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अब हम बुला रहे हैं हमारे महाविद्यालय के कला प्राध्यापक विश्वजीत कुमार को जो आप सभी के बीच एक Live Painting का प्रदर्शन करेंगे। सर के बारे में दो शब्द कहना चाहूंगी
महफिल से उठना है तो थोड़ा सोच-समझ कर उठना,
हम सभी के दिल के अजीज आए हैं।
देनी है उन्हें कोई सौगात तो तालियों से सम्मान देना,