शनिवार, 8 मई 2021

शिक्षा में समाचार पत्र की उपयोगिता (Usefulness of Newspaper in Education.) B.Ed.1st Year, EPC-3.Unit-2 Munger University, Munger.




       समाचार पत्र- समाचार पत्र या अखबार समाचारों पर आधारित एक प्रकाशन है, जिसमें मुख्यत: सम-सामायिक घटनाएं (Occasional Events), राजनीति (Poltics), खेल-कूद (Sports), व्यक्तित्व (Person, Personality) विज्ञापन (Advertisement), इत्यादि। जानकारियां कागज पर छपी हुई होती है।

          समाचार पत्र संचार के साधनों में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। समाचार पत्र प्रायः दैनिक ही होते हैं लेकिन कुछ समाचार पत्र सप्ताहिक (Weekly), पाक्षिक (Fortnightly) Fortnight (पखवाड़ा)
Unit of time
Description:-
A fortnight is a unit of time equal to 14 days. The word derives from the Old English term fēowertyne niht, meaning "fourteen nights". Some wages and salaries are paid on a fortnightly basis; however, in North America it is far more common to use the term biweekly. -Wikipedia. अर्द्धमासिक (Semi monthly) मासिक ( Monthely) छमाही (Half yearly) इत्यादि भी होते हैं। अधिकतर समाचार पत्र स्थानीय भाषाओं में और स्थानीय विषयो पर केंद्रित होते हैं।

शिक्षा में समाचार पत्र का उपयोग-
        समाचार पत्र पूरे संसार भर की खबरों का संग्रह होता है जो हमें विश्व में होने वाली सभी घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है। हमें नियमित रूप से अखबार पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। 
           मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है (मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है यह कथन महान यूनानी दार्शनिक अरस्तू का है। अरस्तू प्लेटो के शिष्य थे एवं सिकंदर के गुरु थे। उनका यह कहना था की अन्य सभी जीवों की तरह इंसान भी एक सामाजिक प्राणी है। जिसे समाज का प्यार और साथ की जरूरत है।) क्योंकि उसमें बुद्धि और ज्ञान होता है। जितना ज्ञान मनुष्य में रहता है वह उससे और अधिक ज्ञान प्राप्त करना चाहता है। इसके लिए वह तरह-तरह के साधनों का अविष्कार करता है, उन्हीं में से एक है- समाचार पत्र।

भारत में समाचार पत्र का आरंभ:-
        भारत में अंग्रेजों के आगमन से पूर्व समाचार पत्रों का प्रचलन नहीं था। 29 जनवरी 1780 को कोलकाता में भारत का सबसे पहला समाचार पत्र प्रकाशित किया गया जिसका नाम बंगाल गैजेट (Bangal Gazette) था इसे हिक्की गैजेट (Hicki Gazette) भी कहां जाता है क्योंकि इसका संपादन जेम्स हिक्की के द्वारा किया गया था। जैसे-जैसे  मुद्रण कला (Typography Art) का विकास होने लगा उसी तरह से समाचार पत्रों की भी संख्या बढ़ने लगी।
कंपनी सरकार की आलोचना के कारण बंगाल गजट को जब्त कर दिया गया। इसके उपरांत 30 मई 1826 को पहला हिंदी समाचार पत्र प्रकाशित हुआ जिसका नाम था -उदंत मार्तंड।

उदंत मार्तंड का अर्थ होता है- समाचार सूर्य (बिना दांत का बाल सूर्या)- विकिपीडिया के अनुसार।

उदंत मार्तण्ड के प्रथम प्रकाशन की तिथि 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है उदंत मार्तण्ड एक सप्ताहिक अखबार था इसे 1827 में दबाव के चलते बंद करना पड़ा।


 समाचार पत्र की उपयोगिता एवं लाभ (Benefits and use of Newspaper)-

समाचार पत्र हमारी रोज की आदतों के साथ-साथ हमारे लिए बेहद उपयोगी भी हैं। इसकी उपयोगिता अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग है। इसके कुछ उपयोगिता एवं लाभ निम्न हैं-

(1) सरकारी योजनाओं की जानकारी:- कोई भी सरकारी योजना हो या किसी विभाग से निकली विज्ञप्ति इसकी जानकारी हमें तुरंत समाचार पत्रों से प्राप्त हो जाती है ताकि हम उसे जानकर उसका फायदा उठा सकें।

(2) विज्ञापन से वस्तुओं के बारे में जानकारी:- समाचार पत्र में प्रकाशित विज्ञापन के जरिए हमें वैवाहिक (शादी-विवाह से संबंधित जानकारी), मोबाइल, घरेलू सामग्री, सुंदरता वाली वस्तुएं, इत्यादि। की जानकारी घर बैठे प्राप्त हो जाती है।

(3) बच्चों के लिए उपयोगी:- आजकल समाचार पत्र बच्चों के लिए विशेष सामग्रियों का प्रकाशन शुरू कर दिए हैं जिससे उनके मनोरंजन के साथ-साथ कई जानकारियां प्राप्त हो जाती है छात्रों में इससे पढ़ने के कौशल का भी विकास संभव हो सका है।

समाचार पत्रों की कमीयां या नुकसान-

समाचार पत्र के कई लाभ हैं परंतु हर वो चीज जो हमारे लिए उपयोगी है उसकी कुछ खामियां भी होती है। ठीक उसी प्रकार समाचार पत्र के भी कई कमियां हैं जो निम्न है:-

(1) विज्ञापन की अधिकता:- प्राचीन समय में समाचार पत्र केवल खबरों के प्रकाशन के लिए काम आते थे परंतु आज  समाचार पत्रों में लाभ कमाने के उद्देश्य से विज्ञापनो की अधिकता हो गई है। पाठक समाचार पत्र खबरों को पढ़ने के उद्देश्य से खरीदते हैं और विज्ञापनों की भरमार के कारण के उनके हाथ निराशा आती है।

(2) प्रभावशाली व्यक्तित्व का प्रभाव:- कई बार हम देखते हैं कि हमारे लोकल समाचार पत्रो में प्रभावशाली व्यक्तियों का प्रभाव नजर आता है। किसी व्यक्ति विशेष से संबंधित खबरों को छुपाया जाता है और कई बार कुछ खबरों को बढ़ा-चढा कर भी प्रस्तुत किया जाता है।

(3) क्षेत्र विशेष की खबरों को प्रधानता:- आज के समय में क्षेत्र विशेष में विज्ञापन की कमाई के लिए राष्ट्रीय खबरों को प्रधानता ना देकर उसमें लोकल न्यूज़ को ज्यादा प्रधानता मिलने लगी है।

(4) समाचार पत्रों की भाषा में परिवर्तन:- पूर्व में समाचार पत्रों की भाषा पूर्ण रूप से साहित्यिक होती थी परंतु अब ऐसा नहीं है। आज के समय में भाषा बदल चुकी है साहित्य से संबंध रखने वाले व्यक्ति आज भी चाहते हैं कि उनके लिए समाचार पत्रों द्वारा अच्छी शैली में कुछ विशेष संपादन किया जाए जिससे आने वाली पीढ़ी को भी साहित्यिक शैली का ज्ञान हो।

(5) कुछ खबरों के प्रकाशन में विलंब:- समाचार पत्रों के कार्य प्रणाली के अनुसार इस में दिनभर की खबरों को एकत्रित किया जाता है फिर रात में छपाई करके सुबह वितरित की जाती है। कई बार ऐसा होता है की छपाई की प्रक्रिया पूर्ण होने के कारण कुछ अहम खबरें प्रकाशित होने से वंचित हो जाती है और इनके प्रकाशन में विलंब होता है।

शुक्रवार, 7 मई 2021

विद्यालय में आई.सी.टी. की भूमिका (ROLE OF I.C.T. IN SCHOOL)

 Q.- विद्यालय में आई. सी. टी. की भूमिका का वर्णन कीजिए। 


उत्तर - आई.सी.टी. की भूमिका (ROLE OF ICT) 

(1) आई.सी.टी. के प्रयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पारम्परिक शिक्षण पाठ्यक्रम में बदलाव हुआ है एवं पाठ्यचर्या को अधिगम केन्द्रित बनाया गया है। 

(2) शिक्षण के बोझ को कम करके, शिक्षण की गुणवता को बढ़ावा दिया जाता है। 

(3) इसके द्वारा पाठ्यचर्या लचीली हो गई है। आई.सी.टी. के द्वारा पाठ्यचर्या को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया, परिवंश, उपलब्धता तथा रुचि के अनुरूप बदला जा सकता है। 

(3) पाठ्यचर्या को शीघ्रता से संचालित करने में आई. सी. टी. का योगदान रहा है तथा पाठ्यचर्या के अद्यतीकरण (Updating) में आई. सी. टी. की मुख्य भूमिका रहती है।

 (4) आई.सी.टी. के द्वारा पाठ्यचर्या को विविध रूपो के माध्यम से पढ़ाया जा सकता है। जिससे छात्रों को  दत कार्यों (Assignments) को करने में सुबिधा मिलती हैं।

 (5) छात्रों में स्व-अधिगम (Self learning) का भाव जागरूक करने में आई. सी. टी. की प्रमुख भूमिका है। नवीन तकनीकों के द्वारा छात्र स्वयं सूचना एकत्रित करके अध्ययन करता है। 

शिक्षक की भूमिका के सन्दर्भ में परिवर्तन- 

आई.सी.टी. के उपयोग से शिक्षको की भूमिका में निम्न परिवर्तन हुए हैं-

 (1)  शिक्षक की भूमिका सुविधादाता (Facilitator) के रूप में हुई है। छात्रों को अधिगम में सुविधा देने की भूमिका अहम् होती है। आई.सी. टी. के उपकरणों के प्रयोग से शिक्षक अधिगम को सरल बना सकते हैं।

(2) शिक्षक को ज्ञान प्रक्रमक (Knowledge Processor) के रूप में भी देखा जाता है। शिक्षक कठिन विषयों को आई.सी.टी. के माध्यम से सरल रूप में प्रस्तुत कर सकते है जो छात्रों के लिए अधिक उपयोगी हो जाता है। व्यक्तिगत (Personal) विभिन्नता की स्थिति में भी छात्र समान रूप से अधिगम करते हैं। 

(3) शिक्षक छात्रों को अनुशासित करने तथा उनकी अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए अधिक समय दे पाते है। इससे छात्रों का सन्देह स्पष्ट रूप से दुर हो जाता हैं।

(4) छात्रों को दिशा-निर्देश (Guidance) करने में ऊर्जा व समय की बचत होती है। 

(5) परीक्षा/प्रोजेक्टर/कलात्मक प्रस्तुति को लेकर छात्रों को निर्देशित किया जा सकता हैं। इससे सम्बन्धित तथ्यों को एकत्रित करने का माध्यम बना सकते है, जिससे छात्रों को प्रस्तुति में सरलता हो एवं शिक्षक स्वयं भी उन तथ्यों को आई. सी. टी. के द्वारा एकत्रित कर छात्रों को दिखा सकते है। 

शिक्षण विधियों के सन्दर्भ में परिवर्तन- 

आई. सी. टी. के उपयोग से शिक्षण विधियों के सन्दर्भ में निम्न परिवर्तन हुए हैं- 

(1) आई. सी. टी. के माध्यम से शिक्षण विधियों को रुचिकर बनाया जा सकता है। 

(2) शिक्षण विधियाँ यथार्थ अनुभव के निकट प्रतीत होती हैं। 

(3) शिक्षण में तकनीकी का प्रयोग करके, उसे प्रभावशाली बनाया जा सकता है, जिससे समय व शक्ति दोनों को बचत होती है।

(4) आज के परिदृश्य में शिक्षण, कौशल आधारित हो गया है न कि पाठ्य-वस्तु पर आधारित। शिक्षण कौशलों का अभ्यास करने में आई. सी. टी. सहयोग प्रदान करता है। 

 (5) शिक्षण एक द्विमुखी प्रक्रिया है। छात्र-शिक्षक दोनों सक्रिय रूप से इस प्रक्रिया में अपना योगदान देते हैं। ICT के द्वारा यह कार्य और भी आसान हो जाता है।

(6) आई. सी. टी. के द्वारा शिक्षण की नवीन विधियों का प्रायोगिक रूप में उपयोग किया जा सकता हैं। सफलता मिलने पर इस प्रयोग की गई विधि को शिक्षण विधि के रूप में प्रतिपादित भी कर सकते हैं। 

कक्षा-कक्ष वातावरण के सन्दर्भ में परिवर्तन- 

आई. सी. टी. के उपयोग से कक्षा-कक्ष के वातावरण के सन्दर्भ में निम्न परिवर्तन हुए हैं- (1) कक्षा वातावरण में सबसे बड़ा परिवर्तन आभासी कक्षाओं (Virtual Classes) से है। आई.सी.टी . के द्वारा आभासी कक्षाओं का आयोजन किया जाता है, किन्तु इनमें कोई भी दृश्य शिक्षक प्रत्यक्ष रूप में शिक्षण कार्य नहीं करता है। 

(2) स्मार्ट क्लास रूम आधुनिक तकनीकी का उदाहरण है। जिसमें छात्रों को बड़े पर्दे पर पाठ्य-वस्तु की सक्रिय शिक्षा दी जाती है जो रोचक और उत्साहवर्धक होती है। 

(3) आई. सी.टी. के उपयोग से कक्षा का वातावरण सक्रिय रहता है। छात्र अपनी ओर से सक्रिय योगदान देते हैं। विषय से सम्बन्धित प्रश्नों को पूछकर सही उत्तर देकर कक्षा के वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं। 

(4) कक्षा को छात्रों के अनुकूल बनाया जा सकता है। कक्षा का वातावरण अधिगम में सहयोग करने वाला होता है तथा छात्रों को एकाग्रचित करने में सहायता प्रदान करता है। 

(5) ICT की मदद से मिश्रित कक्षाओ का संचालन सफल रूप में किया जा सकता है। विशिष्ट तथा सामान्य छात्रों को आई. सी. टी. के माध्यम से एक साथ शिक्षा दी जा सकती है। 

मूल्यांकन प्रक्रिया के सन्दर्भ में परिवर्तन— 

आई. सी. टी. के उपयोग से मूल्यांकन प्रक्रिया के सन्दर्भ में निम्न परिवर्तन हुए हैं 

 (1) ICT के द्वारा परीक्षा प्रणाली में  बदलाव किये गये हैं। आई. सी. टी. के द्वारा ऑनलाइन परीक्षा, साक्षात्कार आदि। किया जाता है जिसमें कम्प्यूटर द्वारा सम्प्रेषण लिखित व मौखिक दोनों रूपों में किया जाता है।  

(2) आई. सी. टी. के द्वारा बिना कागज-कलम (Paper/Pen) परीक्षा, शिक्षण अधिगम किया जाता है, जिसका पृष्ठ-पोषण (Feed-Back) तुरंत प्राप्त हो जाता है। छात्रों को प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती है। 

(3) आंकलन की प्रस्तुति ग्राफ द्वारा रोचक ढंग से दिखायी जा सकती है।

Click & Find More Notes.

मंगलवार, 4 मई 2021

"कोरोना में शादी का निमंत्रण"




"कोरोना में शादी का निमंत्रण"

कोरोना काल में, किसी की शादी का निमंत्रण आया है।
उस निमंत्रण पत्र में, उन्होंने ये लिख कर भिजवाया है।।

कृपया आप पत्र में लिखी सभी जानकारी, ध्यान से पढ़ें।
और शादी में आने की सोचने से पहले, करोना से डरें।।

बस निमंत्रण पत्र भेजा है, आपको हमने नहीं बुलाया है।
क्या हम चाहते हैं, पत्र में ही ये सब हमने समझाया है।।

बन ठन कर हो जाइये तैयार और फोटो खिंचवा लीजिये।
फिर उसे अपलोड करके, WhatsApp से भिजवा दीजिये।।

उस फोटो को वर वधू की फोटो के साथ, एडिट करा देंगें।
घर बैठे ही आपको शादी में आने का, क्रेडिट दिला देंगें।।

जहाँ घर में खाना खाते हैं, उस जगह को बुहार लीजिये।
फिर पत्र में भेजे व्यंजन की फोटो को, निहार लीजिये।।

नकद नोटों से भी हमने सुना है, कोरोना फैल जाता है। 
सबसे आखिर पन्ने पर जो नंबर है, वो मेरा बैंक खाता है।।

वर-वधू को आपका भरपूर आशीर्वाद, घर बैठे मिल जायेगा। 
अगर कुछ डिपॉजिट, आपकी तरफ से खाते में डल जायेगा।।

हमने भी लिख दिया, निमंत्रण पत्र का उत्तर उन्हें तत्काल।
धन्यवाद है आपको, जो आपने हमारा यूँ रखा ख्याल।।

क्योंकि आप नये तरीके से, हमें शादी में बुला रहे हैं ।
हम भी एक नये तरीके से, आपको पैसे भिजवा रहे हैं।।

हजार दो हजार भेजकर, कितना हम पुण्य कमा पायेंगें।
लाटरी का टिकट संलग्न हैं, शायद लाखों निकल आयेंगें।।

यूँ 50 रू में 10 लाख की लाटरी का टिकट, भिजवा दिया।
और कोरोना में आदर्श बराती होने का दायित्व हमने, निभा दिया।।
साभार:- Facebook.

कुकीज़ क्या होता हैं? Cookies kya hota hai.?



            जब आप कोई भी वेबसाइट अपने ब्राउज़र में खोलते हैं तो वह ब्राउज़र उसकी जानकारी एक फाइल के रूप में आपके मोबाइल या कंप्यूटर में स्टोर कर लेता है वह जानकारी कुछ भी हो सकती है। जैसे:- आपने कौन सा कीवर्ड इस्तेमाल किया? कौन-कौन सी वेबसाइट खोली? किस वेबपेज पर कितना समय व्यतीत किया? इत्यादि। इस तरह की सभी जानकारी एक फाइल में सेव होकर हमारे कंप्यूटर एवं मोबाइल के रोम (ROM) में रख दी जाती है ताकि इसका इस्तेमाल भविष्य में किया जा सके। यह फाइल एक्सटेंशन (.txt) के रूप में होते हैं। .txt फाइल को ही हम इंटरनेट कुकीज़ कहते हैं।

कुकीज़ मुख्यतः चार प्रकार के होते हैं जिनके अलग-अलग कार्य हैं:-

(1) सत्र कुकीज़ (Session Cookies):- सत्र कुकीज में हम उन सभी कुकीज़ को रखते हैं जो वेबसाइट को खुलने के साथ ही डाटा स्टोर करना शुरू करते हैं और वेबसाइट से हटते ही सारी स्टोर की हुई सूचनाएं स्वत: मिटा देते है। लैपटॉप एवं मोबाइल के RAM (रैम) की तरह।

(2) स्थायी कुकीज़ (Persistent Cookies):- यह एक प्रकार का स्थाई कुकीज होता है जो कंप्यूटर बंद होने के बाद भी या कई वर्षों तक रह सकता है। जब भी आप उस वेबसाइट पर जाते हैं तो कुकीज़ में स्टोर सूचनाएं पुनः उस वेबसाइड में आप की गतिविधि को भेज देते हैं।

(3) http Only Cookies (केवल http कुकीज़) यह केवल एच.टी.टी.पी. (http) Hypertext Transfer Protocol में ही खोले गए वेबसाइट द्वारा आपके कंप्यूटर में save किया जाता है और यह केवल एच.टी.टी.पी.में ही कार्य करता हैं। यदि आप सुरक्षित वेबसाइट यानी कि एच.टी.टी.पी.एस. से वही वेबसाइट ओपन करेंगे तो वह कार्य नहीं करेगा।

(4) Secure Cookies (सुरक्षित कुकीज़):- इस प्रकार की कुकीज एच.टी.टी.पी.एस.(https) Hypertext Transfer Protocol Secure में खोले गए वेबसाइट द्वारा आप के कंप्यूटर में save किया जाता है। इस प्रकार की कुकीज़ को ज्यादा सुरक्षित एवं गोपनीय माना गया है।

इंटरनेट कुकीज़ से हमें निम्न फायदे होते हैं-

(1) Cookies से हमारा समय और डेटा की बचत होती है।

(2) इंटरनेट पर कार्य के दरम्यान यदि आपका ब्राउज़र अचानक से बंद हो जाए तो दोबारा Reopen करने पर उसी को रिस्टोर (Restore) कर देता है। यह फायदे भी हमें कुकीज़ से ही प्राप्त होते हैं।

(3) यदि किसी वेबसाइट पर हम एक बार लॉगिन कर लेते हैं तो कुकीज़ हमारे यूजर आईडी और पासवर्ड को save कर लेता हैं एवं जब दुबारा हम उसी वेबसाइट पर विजिट करते हैं तो हमें Relogin नहीं करना पड़ता।

(4) इसका आकार बहुत कम यानी 4KB तक होता है जिस वजह से हार्ड ड्राइव में ज्यादा जगह नहीं लेता।

(5) shopping Site पर जो Product हमें चाहिए उस तक हम आसानी से पहुंच सकते हैं।

Cookies के नुकसान:-

(1) Cookies से बहुत ज्यादा नुकसान तो नहीं है बस एक ही नुकसान है और वह यह है कि इसमें आपका आईडी एवं पासवर्ड save रहता हैं। यदि हैकर तक यह सूचनाए पहुंच गए गई तो आपको नुकसान हो सकता है।

(2) Online आपसे ठगी की जा सकती है क्योंकि आपके कार्ड का नंबर और एक्सपायरी तिथि Cookies में स्टोर रहता है केवल ओटीपी की मदद से आपके पैसे चुराए जा सकते हैं।

(3) Cookies की फाइल कंप्यूटर के हार्ड ड्राइव मे स्टोर होती है। यदी कंप्यूटर में जगह कम हो तो इसकी वजह से कंप्यूटर slow भी हो सकता है।

Click & Find More Article



विद्यालयों में ICT को समावेशित करने की चुनौतीयां, बिहार के विद्यालयों की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हुए। Challenge of Integrating ICT in School, the scenario of School in Bihar. B.Ed. 1st Year. EPC - 3. Munger Universiyt, Munger

 




       बिहार के विद्यालयों में सूचना एवं संचार तकनीकी (ICT) को समावेशित करने एवं इनका प्रयोग करने में निम्नलिखित चुनौतियां आ सकती है।
(1) आई.सी.टी. से संबंधित सभी सामग्रियां अत्यधिक महंगी होने के कारण एवं इसका रखरखाव कार्य अत्यधिक मुश्किल होने की वजह से भी अधिकतर बिहार के विद्यालयों में यह सभी वस्तुएं उपलब्ध नहीं हो पाती है।

(2) हमारे राज्य के विद्यालयों में अध्यापको तथा अन्य कर्मियों को आई.सी.टी. की प्रभावशीलता एवं उपयोगिता का ज्ञान ही नहीं है। उनकी यह आज्ञानता सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी के प्रयोग में बाधा बनी हुई है।

(3) शिक्षक अपने परंपरागत शिक्षण अधिगम पद्धतियों को नहीं छोड़ना चाहते वह व्याख्यान विधि, प्रदर्शन विधि, जैसी शिक्षण विधियों का ही प्रयोग करना ज्यादा पसंद करते हैं। वे सभी आई.सी.टी. का प्रयोग अपने कक्षा-कक्ष में नहीं के बराबर करते हैं। उनकी यह अरुचि (Anorexia) भी आई.सी.टी. को बिहार के विद्यालय में समावेशित करने में चुनौती के रूप में सामने आकर खड़ी हो जाती है।

(4) शिक्षकों को सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी के प्रयोग की जानकारी नहीं है। सेवा पूर्व या सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम द्वारा वह पूर्ण रूप से प्रशिक्षित नहीं हो पाते हैं जिसके कारण उनकी सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी (ICT) का प्रयोग में रुचि नहीं होती।

(5) अधिकतर बार देखा गया है कि विद्यार्थी भी इसके लिए तैयार नहीं दिखाई देते उन्हें शिक्षक द्वारा आसानी से ज्ञान एवं सूचनाएं प्राप्त हो जाती है जिसके कारण वे अतिरिक्त प्रयास नहीं करना चाहते हैं।

        इस प्रकार हम पाते हैं कि सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी का विद्यालय शिक्षा में उपयोग करने में शिक्षकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों एवं अन्य कर्मियों सभी में उदासीनता दिखाई देती है। इसके प्रति उनमें अनभिज्ञता एवं नकारात्मक दृष्टिकोण सबसे बड़ी बाधा है। आज वह समय आ गया है कि सूचना एवं संप्रेषण तकनीकी को शिक्षा के प्रत्येक आवश्यक क्षेत्रों, विद्यालय की समस्त गतिविधियों के संचालन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका निर्धारित की जाए।

Click & Find More Notes.

शनिवार, 1 मई 2021

ऐ बरबीघा मेरी पहचान हो तुम।

         ऐ बरबीघा मेरी पहचान हो तुम। बरबीघा का सुंदर वर्णन एक कविता के माध्यम से किया गया हैं। प्रयास कैसा है ? जरूर बताइएगा। और हां अपने बरबीघा के मित्रों को शेयर करना ना भूले।

अंतिम बात तो मैं कहना ही भूल गया। कविता की कौन सी पंक्ति आपको सबसे अच्छी लगी Comment करके बताइएगा।
उदाहरण स्वरूप:- " थाना चौक की भुजा हो या प्रदीप की दुकान का इंतजार हो तुम
 ऐ बरबीघा मेरी पहचान हो तुम"

















कोरोना 2.0

      Apr. 2021 पता नहीं क्यों मुझे 2020 के जैसा ही लग रहा है होली के बाद कोरोना कि स्थिति बिगड़ना फिर धीरे-धीरे पूरे देश में लॉकडाउन खैर पिछले साल तो सभी ने खूब इंजॉय किया था इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। जब भी टी.वी. खोलो केवल जलती लाशे, रोते-बिलखते लोग, मन में  ख़ौफ़ भरती कोरोना की रफ्तार, इत्यादि। खबरें आती रहती है। हर तरफ, हर चैनल पर केवल नकारात्मक खबरे चलाकर लोगों के अंदर भय एवं डर का माहौल बनाया गया है। स्थिति ऐसी हो गई है कि यदि किसी को बुखार भी हो जाए तो लगता है कि कोरोना ही हो गया है। इस कठिन परिस्थिति में खुद को सकारात्मक रखना बहुत मुश्किल लग रहा है। सकारात्मक स्वयं को रखने के लिए मैंने अपने आप को व्यस्त रखना शुरू कर दिया है। ऑनलाइन क्लास के बाद अपना पूरा समय लेखनी✍️ को ही देने लगा हूं कि शायद इस क्षेत्र में भी कुछ बेहतर कर जाऊं।


यह रचना पिछले साल की हैं


        परिस्थितियां चाहे जैसी भी रहे मुझे लगता है कि यही वह बेहतर समय है जब किसी इंसान को अपने अंदर की कला को निखारना चाहिए। अभी जितने भी मानव धरती पर हैं उन्हें अपने जीवन काल में पुनः ऐसा समय शायद ही मिले। अंत में मैं कहना चाहूंगा।

ये कह के मेरे दिल ने, 
हौसलें बढ़ाए हैं। 
गमों की धूप के आगे
 खुशी के साए हैं।