शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

तपोवन महोत्सव, गया बिहार Tapovan Festival Gaya Bihar.

 तपोवन महोत्सव 

        तपोवन बिहार राज्य के गया जिले के मोहड़ा प्रखंड में स्थित एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल है जो राजगीर से 18 किमी . की दूरी पर टेटारू गाँव के समीप स्थित है। प्रकृति के अनुपम उपहार के रूप में यहाँ गर्म जल के चार कुण्ड हैं जो रोगहारी (रोग को दूर करने वाला) एवं अद्वितीय माने जाते हैं। 

       तप्त जल में स्नान के उद्देश्य से यहाँ बड़ी तादाद में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। तवोवन में ही ब्रह्मा के चार पुत्रों सनक, सनंदन, सनातन और सनत कुमार ने तप किया था। इन्हीं ऋषि पुत्रों के नाम पर चारों गर्म कुण्ड आज भी विद्यमान हैं। यहाँ प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। 14 जनवरी 2015 को मकर संक्रांति के अवसर पर यहाँ मुख्यमंत्री नितीश कुमार द्वारा तपोवन महोत्सव का शुभारम्भ किया गया।

वैशाली महोत्सव Vaishali Festival

 

वैशाली महोत्सव 

        महावीर स्वामी से सम्बंद्ध ग्रन्थों में वैशाली का संकेत बहुत ही कम हुआ है। वैशाली के स्थान पर वहाँ अवस्थित महावीर की जन्मस्थली कुण्डलपुर (क्षत्रियकुण्डग्राम) का या फिर विदेह क्षेत्र का चित्रण उपलब्ध होता है। इसके विपरीत, बौद्धग्रन्थों में वैशाली की बहुत ही मनोरम सांस्कृतिक और ऐतिहासिक साथ ही राजनीतिक झाँकी प्रस्तुत की गई है, जिसमें बुद्ध और आम्रपाली की हृदयावर्जक कथा, प्रवृत्ति और निवृत्ति, राग और विराग के अन्तर्द्वन्द्व की भावना से तो अधिक उज्जवल होकर उभरी है। 

      इस प्रकार वैशाली महावीर और बुद्ध दोनों महापुरुषों की समयुगीन संस्कृति की युगपत अभिव्यंजना करने वाली ऐतिहासिक नगरी के रूप में लब्धप्रतिष्ठ है। हालांकि वैशाली महोत्सव का आयोजन विशेष रूप से जैन धर्म के प्रवर्तक महावीर पर ही केन्द्रित होता है।

चम्पारण महोत्सव Champaran Festival, Champaran Bihar.

 चम्पारण महोत्सव 

      चम्पारण शब्द दो शब्दों चम्पा और आरण्य से मिलकर बना है, जहाँ चम्पा एक फूल🌼 का सूचक है, वहीं आरण्य का अर्थ- जंगल🌳 होता है।


        नेपाल की सीमा से लगे हुए बिहार राज्य के तिरहुत प्रमंडल के अन्तर्गत अवस्थित चम्पारण जिला एक ऐतिहासिक स्थल है। वर्तमान में चम्पारण पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी) और पश्चिमी चम्पारण (बेतिया) के रूप में विभक्त है।

      चम्पारण महोत्सव एक ऐसा महोत्सव है जो हमारी आजादी की संघर्ष गाथा को बयाँ करता है तथा अपनी आजादी🇮🇳 बनाये रखने की प्रेरणा देता है। यह महोत्सव संस्कृति, कला, परम्पराओं की प्रतिनिधि गतिविधिया तथा अपनी समृद्ध ऐतिहासिक गाथाओं को बयाँ करता है। 

       यह महोत्सव महान सम्राट अशोक के वैभवशाली राजनैतिक हस्तक्षेप का पाठ पढ़ाता है तथा राष्ट्र की एकता अखंडता को बरकरार रखने का जज्बा प्रदान करता है। यह बुद्ध के बताये मार्ग पर चलने तथा जीवन को संतुलित बनाने की प्रेरणा देता है। 

       केसरिया राष्ट्रीय महत्व का पुरातात्विक स्थल है। इसकी सतह पर राजनीति का पराक्रम अशोक की लाट (शिलालेख) के रूप में विराजमान है तो बोधिसत्व की करूणा इसके कण-कण और वातावरण में व्याप्त है। यह बापू की कर्मभूमि है। सत्य, अहिंसा के प्रणेता के रूप में सम्पूर्ण राष्ट्र को बापू के सत्याग्रह की याद दिलाता है।

गुरुवार, 6 जनवरी 2022

विक्रमशिला महोत्सव भागलपुर, बिहार। Vikramshila Festival Bhagalpur, Bihar.

 


विक्रमशिला महोत्सव 

         धर्मपाल (783-820) द्वारा स्थापित नालंदा विश्वविद्यालय के ही समान विश्व प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय को 1203 ई. में मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने किला समझकर ध्वस्त कर दिया था। तिब्बती ग्रंथों यह विश्वविद्यालय श्रीमद्विक्रमशीलदेव - महाविहार के नाम से प्रसिद्ध था। वर्तमान में इसके भग्नावशेष बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव (अंतीचक) में स्थित हैं। यह विश्वविद्यालय तंत्रवाद की शिक्षा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध था। इसके साथ ही यहाँ वेद, वेदांत, उपवेद, हेतु विद्या, सांख्य, योग, व्याकरण, तत्व मीमांसा, , तर्कशास्त्र, चिकित्सा, शिल्पशास्त्र और अभिधम्म का अध्ययन किया जाता था। 

        इस विश्वविद्यालय में देश-विदेश के प्रकांड विद्वान विचारों का आदान-प्रदान करने आया करते थे, जहाँ देश ही नहीं बल्कि चीन, तिब्बत, वर्मा, जापान, मलेशिया, श्रीलंका, जावा, सुमात्रा, आदि। देशों के सैकड़ों ज्ञान पिपासु छात्र अध्ययन करते थे।

      इस प्रकार शिक्षा-जगत् में प्राचीन काल से अपनी वैश्विक पहचान रखने वाले विक्रमशिला विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटकीय महत्व को देखते हुए बिहार सरकार ने वर्ष 2007 में पहली बार तीन दिवसीय विक्रमशिला महोत्सव का आयोजन किया गया।

         प्रत्येक वर्ष पर्यटन विभाग तथा जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वाधान में इस महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिससे इस प्राचीन विरासत को एक नया आयाम मिला। इस महोत्सव में देश-विदेश के पर्यटक बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।

एक ऐसा मेला जहां दूल्हे बिकते हैं। सौराठ मेला, मधुबनी बिहार। Saurath Fair, Madhubani Bihar.

            यह मेला बिहार में मधुबनी जिले के सौराठ नामक गाँव में ज्येष्ठ-आषाढ़ माह में पन्द्रह (15) दिनों के लिए आयोजित किया जाता है। यह मेला एक सभा की तरह होता है। यह शादी-विवाह के अर्थों को अति सरल बनाने तथा इसमें मितव्ययिता लाने में सहायक सिद्ध होता है। 

       इस मेले में विवाह योग्य युवकों एवं उनके अभिभावकों की उपस्थिति आकर्षण का मुख्य केन्द्र बिन्दु होती है। 

        विवाह योग्य कन्याओं के अभिभावक यहाँ योग्य युवकों के साथ विवाह सम्बन्धी निर्णय लेते हैं। पंजीकारों द्वारा विवाह सम्बन्धी निर्णय को स्वीकृति दी जाती है। विवाह तय होने के उपरान्त तात्कालिक विवाह का आयोजन भी हो जाता है। इस मेले में ज्योतिष, संस्कृत, वेद और दर्शन इत्यादि के बड़े-बड़े विद्वान् उपस्थित होते हैं।

बुधवार, 22 दिसंबर 2021

National Institute of Fashion Technology. अनुबंध के आधार पर सहायक प्रोफेसर के पदों पर भर्ती RECRUITMENT TO THE POSTS OF ASSISTANT PROFESSOR ON CONTRACT BASIS


NIFT Recruitment: Apply For 190 Assistant Professor Posts; Basic Pay Rs 56,100 Plus Central Govt Allowances.

As per the advertisement, 190 Assistant Professors will be recruited on contract basis for five years (with possibility of regularization following due procedure to assess performance).
Full Notification 👇👇




Vacancy Details

Assistant Professor: 190 posts

Level of Pay As per Pay Matrix (7th CPC): Level-10 Basic

Pay Rs. 56,100, plus other allowances as per Central Government.

Age Limit (as on 31-01-2022): 40 years maximum.

Upper age-limit for NIFT employees may be relaxed up to five years or total length of service rendered (on regular and/or long-term contract basis) whichever is less.

Qualifications And Experience:

(a) Post Graduate Degree from recognized University/Institute in any of the competencies with three years’ experience (including pre-qualification (post UG degree) experience) in teaching or research or in relevant industry in a recognised University/ Institution.

(b) PhD from recognized University/Institution in a subject relevant to any of the competencies as mentioned in Annexure-I, with one year’s experience {including pre-qualification (post UG degree) experience) in a recognised University/Institution in teaching or research or in relevant industry.

Application Fee:

- The candidates are required to pay application fee of Rs. 1,180/- (Rs.1000/- plus GST 18% i.e. Rs. 180/-) through online payment.

- SC/ST/PWD/Women candidates and employees of NIFT (both regular and on long term contract) are exempted from payment of application fee.

How To Apply:

-Online Application process will start on NIFT’s website from 08-12-2021(0900 hours) up to 31-01-2022(midnight)

Interested applicants are requested to apply online in the prescribed format available on Institute’s website (www.nift.ac.in) uploading the self-attested copies of relevant certificates and testimonials in support of age, qualification, caste and experience etc.















मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

ठंडा में ठेठ बिहार का बारात।

 


      बिहार का एगो खास बात है आप चाहे लाख होटल, मैरिज हॉल बनवा लीजिए, बरियाती को ठहराने का जो मजा सरकारी स्कूल में है ऊ दोसर कहीं नहीं।

     ठंडा के दिन रहे तो पुअरा बिछा के दरी के ऊपर टेंट हाउस वाला उजरका एवं गुलाब जामुन जैसा तकिया फेंका-फेंकी में अलग लेवल का आनन्द आता है। खिड़की से सन्न-सन्न पछिवां हवा बह रहा हो और खिड़की का एगो पल्ला गायब हो तब प्रेमचंद्र के हल्कू की याद आ जाती है कि कैसे वो रात में फसल की रखवाली करता था। यदि ठंड से बचने के लिए आप दीवार से पीठ लगाकर बैठिए तs दीवार का आधा चूना झड़ के पीछे ऐसे चिपक जाता था जैसे कि अजंता की दीवारों पर पेंटिंग की गई हो। कुछ पढ़ल-लिखल लईका सब वहां पर उपस्थित ब्लैक बोर्ड पर अपने ज्ञान का प्रदर्शन करने में नहीं चुकते थे और कुछ ही देर में पूरा ब्लैक बोर्ड A+B का होल स्क्वायर से लेकर न्यूटन के सिद्धांत वाले नियम से भर जाता था। उसी बरामदे में बैठे सुदर्शन काका यह दृश्य देखते और कहते थे कि फ़लाना का लईका तs पढ़े में बड़ी तेज है।

    स्कूल के बाहर लड़के का फूफा लड़की के चच्चा से अलगे लड़ते रहते की- “बताइए ई कईसन व्यवस्था है यहां का? पैखाना से लेकर पानी तक का कोई बेवस्थे नहीं है, हमारा लड़का सब रात-विरात कहाँ जाएगा सब? लाइटो का भी कोनो ठीक जोगाड़ नहीं रखे है। देख रहे हैं अभिये हम ई घुप्प अन्हार में जरनेटर के अर्थिंगे पर मूत आते। उs तs अच्छा हुआ कि यहां एक लाइट जल गया नही तs बताइए हमार तs जीवने अन्हार हो जाता। अरे!! पैसा का कमी था तो बताते हमही आकर सब बेवस्था कर जाते इहाँ।”

     स्कूल के मेन गेट पर रिमझिम बैंड पार्टी का रंगरूट सब फिरंगी वाला आर्मी जैसा ड्रेस पहिने, ढोल-ताशा बजाते-बजाते एकदम से बेहाल हुआ रहता। पिंपनी वाला भी अपना फेफड़ा का पूरा हवा झोंक रहा होता अऊर ऊ स्टार गायक हाथ में आधा घण्टा से माइक लेकर खाली “रेडी वन टू थ्री, वन टू थ्री” कर रहा होता। तब यहां पर फूफा जी का गुस्सा😡 देखने को मिलता था वो गुस्से में बोलते- कारे, तोहरा के खाली यही ला बोलवले बानीs तब वह घबराहट में गाना शुरू करता “अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है।” उधर से लड़के का बाप गला फाड़ते हुए चिल्लाते आते- “साला ई बंदी में भी अभीये दारू पी लिया है का रास्ता में, अचार चटाओ इसको। अलबला गया है। कल पैसा काटेंगे ना तब बुझाएगा ससुरा के..” तब गायक होश में आता और गाना शुरू करता। “झिमी, झिमी, झिमी, आजा!!! आजा!!! आजा!!!” पंद्रह मिनट तक वह यही गाना गाते रहता तब ऐसा लगता था कि इसका कैसेट💽 अटक गया है। गाने में परिवर्तन तब होता है जब दो चार गो लइका के दोस्त आकर कहता कि- आज हमारे यार की शादी है बजाओ। इन सभी से जब, सब उब जाते तब बारी आता नागिन🐍 डांस का और उस डांस में सब ऐसे नाचते जैसे कि आज नागमणि💠 लेकर ही मानेंगे।

       उधर लईका के दोस्त सब ललका ब्लेजर पर गोल्डस्टार का जूता पहीन के विधायक/संसद के तरह भौकाल में टहल रहा होता हैं। ई दोस्त सब के नज़र में जहां ऊ बरियाती आया है ऊ दुनिया का सबसे बेकार😫 गांव है। जहां सुपर मार्केट नहीं है, रेस्टोरेंट नहीं है, एटीएम नहीं है, लैम्बोर्गिनी का शोरूमो नहीं है। क्लासिक मेंथोल का सिगरेट नहीं मिला है तो गोल्ड फ्लेक पीना पड़ रहा है। घरवैया भी सब इनका हीरोपनी समझ रहा है लेकिन आडवाणी लेवल का मौन बन बर्दाश्त किया हुआ है की एक रात का तो बात है जैसे-तैसे काट लों सुबह तो विदा करना ही हैं इनको।

      अब बारात दरवाजे की तरफ बढ़ रहा है। बाराती सब में माइकल जैक्सन का भूत🕺 आ चुका है और वह अब नागिन धुन से कमरिया करे लपालप वाले धुन पर आ चुके हैं। गांव में चाची, काकी, दादी सब गाड़ी में एकदम से झांक-झांक के लईका को देख रही हैं। पूरा हंसी-मजाक चल रहा है....


– ऐ चाची, लईका का उमर थोड़ा ज्यादा नहीं बुझा रहा है..!!!


– रे बजरखसुआ, ऊ लईका का बाप है। लईका तs पीछे बैठा है। तु उ बूढ़वा से काहे मजाक करती हो...!


-तले कोई कहता हैं का बाबा आप काहे काजर लगा लिए हैं, बियाह त बेटवा का है ना?

         ......बाप भी इन सभी बातों को मजाक में उड़ा देता है क्योंकि आज उसके बेटे की शादी जो होने वाली होती है।