गुरुवार, 13 जनवरी 2022

मैथिली भाषा। Maithili language


 मैथिली 

      मैथिली आर्य परिवार की भाषा है जो बिहार के अतिरिक्त पड़ोसी राज्य झारखण्ड एवं पड़ोसी देश नेपाल में भी  बोली जाती है। पहले मैथिली भाषा को मिथिलाक्षर या कैथी लिपि में लिखा जाता था जो बँगला एवं असमिया लिपियों से कुछ समानता रखती थी, परंतु वर्तमान में यह देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

     मैथिली बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र की भाषा है, जिसका आरम्भ ज्योतीश्वर ठाकुर की रचना वर्ण रत्नाकर से माना जाता है। महाकवि विद्यापति मैथिली साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकार रहे हैं। कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुषपरीक्षा, गोरक्षा विजय, पदावली, आदि। विद्यापति की प्रमुख रचनाएँ हैं।

      मैथिली साहित्य में वैधनाथ मिश्र (नागार्जुन) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी कृतियों में पत्रहीन नग्न गाछ, पारो तथा बलचनमा आदि प्रमुख हैं। मैथिली का प्रथम प्रमाण रामायण में प्राप्त होता है, जिसमें मिथिला नरेश राजा जनक की राजभाषा मैथिली थी । 

    22 दिसंबर , 2003 को 92वें संविधान संशोधन के माध्यम से भारत सरकार ने मैथिली को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया है। यद्यपि, साहित्य अकादमी द्वारा मैथिली को साहित्यिक भाषा का दर्जा वर्ष 1965 से ही प्राप्त है।

बिहार के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी रचनाएं। Major litterateurs of Bihar and their works.


     रचनाकार                        रचनाएँ  
  • सुरेन्द्र प्रसाद मोहन            बिना डोरी के बंधन
  • निर्मल मिलिन्द।                    गीतिया
  • चन्द्रशेखर श्रीवास्तव             गुलबिया
  • अवधेश्वर अरुण               वज्जिका रामायण
  • बाणभट्ट                        कादम्बरी, हर्षचरित
  • विष्णु शर्मा                         पंचतंत्र
  • चाणक्य।                         अर्थशास्त्र
  • अश्वघोष                  बुद्धचरित, महायान श्रद्धोत्पाद संग्रह 
  • आर्यभट्ट                        आर्यभटट तंत्र
  • मंडन मिश्र                  भाव विवेक, विधि विवेक 
  • ज्योतीश्वर ठाकुर                 वर्ण रत्नाकर
  • विद्यापति    -  कीर्तिलता, कीर्तिपताका, गौरक्षा, विजय भू-परिक्रमा 

  • मुल्ला दाउद                        चंदायन
  • फणीश्वरनाथ रेणु           मैला आँचल, जुलूस, पलटू बाबू रोड 

  • रामधारी सिंह दिनकर - उर्वशी, प्राणभंग, रेणुका, हुंकार, कुरुक्षेत्र, द्वन्द्वगीत, धूप - छाँव, नील कुसुम, सीपी और शंख।

  • बाबा नागार्जुन (वैद्यनाथ मिश्र) - पारों बलचनमा, कुम्भी पाक, मिश्र यात्री, वरुण के बेटे बाबा बटेसरनाथ, रतिनाथ की चाची ।

  • राहुल सांकृत्यायन - बुद्धचर्य्या, विनय पिटक दर्शन, दिग्दर्शन । 
  • नारायण पण्डित   हितोपदेश
  • रामवृक्ष बेनीपुरी - आम्रपाली, संघमित्रा, माटी की मूरतें, चिंता के फूल ।

  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद - इंडिया डिवाइडेड, चम्पारण सत्याग्रह, बापू के कदमों में।

  • देवकी नंदन खत्री - चंद्रकांता संतति, भूतनाथ, नौलखा हार, काजल की कोठरी

  • पं. केशवराम भट्ट                     बिहार बंधु 

  • राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह - कानों में कंगना, बिजली, राम रहीम, पुरुष और नारी, सूरदास, पूरब और पश्चिम, चुम्बन और चाँटा, अपन पराया, धर्म की धुरी ।

  • वाचस्पति मिश्र - भाष्य समिति, ब्रह्मासिद्धि टीका (तत्वसमीक्षा)
  • आचार्य शिवपूजन सहाय - देहाती दुनिया
  • उदय शंकर भट्ट - सागर, लहरें और मनुष्य
  • रांगेय राघव  - कब तक पुकारू
  • अमृत लाल नागर  - बूँद और समुद्र
  • देवेन्द्र सत्यार्थी - ब्रह्मपुत्र
  • लक्ष्मीनारायण लाल - बया का घोंसला, साँप ।
  • शैलेश मटियानी - बोरीवली से बोरीबंदर तक ।
  • राम दरश मिश्र - अलग-अलग वैतरणी 
  • शिव सागर मिश्र - दूब जनम छायी
  • बैजनाथ प्रसाद - गरजते दृष्य बदलती करवटे, कोचवान और रिक्शावाला

  • राजेन्द्र यौधेय          बिसेसरा
        बिहार की गायिका शारदा सिन्हा को लोक गीत के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए वर्ष 2018 के पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। ये बिहार की सबसे प्रसिद्ध गायिका हैं जो भोजपुरी, मगही तथा मैथिली भाषाओं में गीत गाती हैं।

         स्वामी निरंजना नंद सरस्वती को योग के क्षेत्र में योगदान हेतु वर्ष 2017 का पद्म भूषण पुरस्कार दिया गया। 

     अभिनेता मनोज वाजपेयी को फिल्म अलीगढ़ में उत्कृष्ट अभिनय के लिए 10वाँ एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवार्ड प्रदान किया गया।

बुधवार, 12 जनवरी 2022

बिहार सामान्य ज्ञान। Bihar General Knowledge.

 


  • बिहार का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र बिहार बंधु था जो केशवराम भट्ट के द्वारा वर्ष 1872 में पटना से प्रकाशित हुआ।
  • गुरु प्रसाद सेन के द्वारा वर्ष 1875 में बिहार के पहले अंग्रेजी समाचार पत्र द बिहार हेराल्ड का प्रकाशन किया गया।
  • पृथक बिहार के निर्माण में पत्रिका द बिहारी (वर्ष 1906 से प्रारंभ) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई इसका प्रकाशन महेश प्रसाद द्वारा किया गया। 
  • बिहार का पहला हिन्दी दैनिक समाचार पत्र सर्व हितैषी वर्ष 1880 में पटना से प्रकाशित हुआ।  
  • वर्ष 1917 में द बिहारी के स्थान पर सर्चलाइट का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ, जिसके प्रथम संपादक सैयद हैदर हुसैन थे। सर्चलाइट ने सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा भारत छोड़ो आंदोलन में भारतीयों के पक्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
  • दरभंगा से आर्यावर्त समाचार पत्र का प्रकाशन होता था। 
  • बिहार राज्य का पहला उर्दू समाचार पत्र नुरुल अन्वार था, जिसे आरा से मोहम्मद हाशिम द्वारा प्रकाशित किया जाता था।
  • दरभंगा से एक साहित्यिक पत्रिका किरण का प्रकाशन होता था। 
  • असहयोग आंदोलन के दौरान मजहरूल हक द्वारा पटना से द मदरलैण्ड का प्रकाशन प्रारम्भ किया गया।  
  • बिहार के साहित्यकार एवं पत्रकार प्रो. अमलेंदु शेखर पाठक को मैथिली साहित्य में वर्ष 2017 के बाल साहित्य पुरस्कार हेतु चुना गया है। उन्हें यह पुरस्कार चर्चित उपन्यास लालगाछी हेतु प्रदान किया गया है।  

  • चंदन कुमार झा का चयन उनके कविता संग्रह धरतीस अकास धरि के लिए युवा पुरस्कार प्रदान किया गया।

  • मिथिला चित्रकला की कलाकार श्रीमती बौआ देवी को वर्ष 2017 में पदम श्री पुरस्कार प्रदान किया गया है। ये मिथिला चित्रकला से लगभग 60 वर्षों से जुड़ी हुई हैं।
  • 2021 में दुलारी देवी को बिहार की मशहूर लोककला मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। कर्पूरी देवी और महासुंदरी देवी के यहां बर्तन धोने व झाड़ू-पोंछा करने के दौरान ही उन्होंने पेंटिंग सीखना शुरु किया था। उनका जीवन और इस मुकाम तक पहुंचना किसी कहानी के जैसा ही है।

वज्जिका भाषा Vajjika language

 

वज्जिका 

       वज्जिका उत्तर बिहार के उस क्षेत्र की भाषा है, जहाँ भगवान महावीर और महात्मा बुद्ध की जन्म भूमि एवं कर्म भूमि थी तथा विश्व के प्रथम गणतंत्र वज्जि संघ की स्थापना हुई थी। राहुल सांकृत्यायन ने इस भाषा को वज्जिका नाम दिया। उन्होंने अपने लेख मातृ भाषाओं की समस्या में भोजपुरी, मैथिली, मगही और अंगिका के साथ-साथ वज्जिका को हिन्दी के अन्तर्गत जनपदीय भाषा के रूप में स्वीकार किया। 
       प्राचीन काल के वज्जि संघ के प्रदेश को वज्जिकांचल कहा जाता है। वज्जिकांचल क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा को वज्जिका की संज्ञा दी गई है। वज्जिका भाषा मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, चम्पारण, दरभंगा, शिवहर तथा मधुबनी सहित नेपाल के कुछ क्षेत्रों में बोली जाती है। 

अंगिका भाषा Angika Language


       अंगिका शब्द अंग से बना है। अंग प्रदेश (वर्तमान में भागलपुर के आस-पास का क्षेत्र) में बोली जाने वाली भाषा को अंगिका नाम दिया गया है, जो भारतीय आर्य भाषा है। बिहार में अंगिका भाषा भागलपुर, मुंगेर, खगड़िया, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार एवं अररिया जिले में बोली जाती है। अंगिका मैथिली की ही एक उप बोली है, जिसे भागलपुरी के नाम से भी जाना जाता है। अंगिका भाषा का प्राचीनतम उल्लेख वामन जयादित्य द्वारा रचित ग्रंथ काभिकावृति में मिलता है। 
      जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन द्वारा इस भाषा को छिका छिकी की संज्ञा दी गयी। अंगिका का पहला नाटक नरेश पाण्डेय चकोर द्वारा लिखा गया था, जिसका नाम सर्वोदय समाज है। डॉ. तेज नारायण कुशवाहा ने अंगिका बोली का इतिहास लिखकर इस भाषा को लोकप्रिय बनाने में बहुमूल्य योगदान दिया है। अंगिका भाषा में निर्मित पहली फिल्म खगड़िया वाली भौजी वर्ष 2007 में प्रदर्शित की गई। 
अंगिका भाषा की रचनाएँ 

      रचनाकार                            कृति 
  • नरेश पाण्डेय                            विशाखा 
  • परशुराम ठाकुर।                  भाग्य - रेखा
  • अमरेन्द्र।                           ढोल बजै दै , बतुरू के तुतरु 
  • अभयकांत चौधरी                हमरो जीवन के हिलकोर 
  • जगदीश पाठक।                    तीरथ जतरा     
 

मगही maghahi.

 


       मगही भाषा का विकास मगधी से हुआ है जो प्राचीन काल में मगध साम्राज्य की प्रमुख भाषा थी। इसे धार्मिक भाषा के रूप में भी मान्यता प्राप्त थी क्योंकि महावीर और गौतम बुद्ध दोनों उपदेशकों ने मगधी को अपनी उपदेश की भाषा बनाया था। बुद्ध ने भाषा की प्राचीनता के प्रश्न पर स्पष्ट कहा था कि सा मागधी मूल भाषा अतः मगही मूलतः मगधी भाषा से विकसित हुई है। बिहार राज्य में यह भाषा पटना, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, नावादा, नालंदा, अरवल, लखीसराय, शेखपुरा एवं जमुई जिले में बोली जाती है। मगही भाषा के प्रथम कवि ईशान है। महाकवि योगेश आधुनिक मगही के सबसे लोकप्रिय कवि माने जाते हैं।

       मगही का पहला महाकाव्य गौतम महाकवि योगेश द्वारा वर्ष 1960-62 के मध्य लिखा गया। मगही भाषा में विशेष योगदान हेतु वर्ष 2002 में डॉ. राम प्रसाद सिंह को साहित्य अकादमी भाषा सम्मान प्रदान किया गया। आधुनिक युग में मगही भाषा के विकास में लक्ष्मी नारायण पाठक का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सुरेश दुबे को मगही भाषा का शेली कहा जाता है। मगही भाषा के रचनाकारों में हरिहर पाठक, रामरहस्य साहेब, भैयानंद, बाबा कदमदास, चतुर्भुज मिश्र, श्रीधर मिश्र, वेदनाथ, जलगोविन्द दास आदि प्रमुख हैं। 

सिद्ध वंश की प्रारम्भिक रचनाएँ मगधी भाषा में है।

भोजपुरी Bhojpuri.

 




 भोजपुरी 

          बिहार के प्राचीन जिले भोजपुर के नाम पर भोजपुरी शब्द का निर्माण हुआ है। भोजपुरी आर्य परिवार की भाषा है, जिसका इतिहास 7 वीं शताब्दी से प्रारम्भ होता है। भोजपुरी बिहार राज्य के उत्तरी एवं पश्चिमी क्षेत्रों (बक्सर, आरा, सारण, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण, रोहतास) जिलों में बोली जाती है तथा पड़ोसी राज्य पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बोली जाती है। 

       17 वीं शताब्दी में धरतीदास एवं दरियादास ने भोजपुरी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आधुनिक युग में बाबू रघुवीरनाथ, महेन्द्र मिश्रा एवं भिखारी ने इस भाषा को नई दिशा प्रदान की। 


भोजपुरी भाषा की प्रमुख रचनाएँ 

      

     रचनाकार                                      कृति 

  • भिखारी ठाकुर                                 बिदेसिया
  • हिमांशु श्रीवास्तव                             नदी फिर बह चली     
  • मधुकर मिश्र                                   अर्जुन जिंदा है
  • पं. केदारनाथ मिश्र प्रभात।                कैकेयी , ऋतुवंश , ज्वाला 
           (भोजपुरी भाषा के महाकवि) 
  • मनोरंजन जी                                फिरंगिया, बरोहिया


बिहार की क्षेत्रीय भाषाएं


       भोजपुरी भाषा भारत के अलावा मॉरीशस, त्रिनीडाड एंड टोबैगो, फिजी, गुयाना तथा सूरीनाम आदि देशों में भी बोली जाती है। वर्तमान में भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने हेतु प्रयास किए जा रहे है।

8वीं अनुसूची, 22 भाषा 

प्रारंभ = 14 

21वाँ संविधान संशोधन (1967) = 1 सिंधी 

71वाँ संविधान संशोधन (1992) = 3 (नेपाली, मणिपुरी, कोंकणी) 

92वाँ संविधान संशोधन (2003) = 4 (बोडो, डोगरी, मैथली, संथाली)  

Total = 22 भाषा 

Note :- राजस्थानी, भोजपुरी तथा अंग्रेजी को 8वीं अनुसूची में नहीं रखा गया है। 

शास्त्री (Classical) भाषा :- 1500BC 

1500 ईसा पूर्व की भाषाओं को शास्त्रीय भाषा कहा जाता है। 2004 में इन्हें मान्यता दिया गया। इनकी कुल संख्या 06 है।  कन्नड़, तेलगु, तमिल, मलयालम, उड़िया, संस्कृत 

Note:- कन्नड़, तेलगु, तमिल, मलयालम (South walor charo) को संयुक्त रूप से द्रवित भाषा कहा जाता हैं। 

  • पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान की ब्राहुई भाषा भारत के द्रवित भाषा से मेल खाती है।