का_हs_जिउतिया।
जिउतिया के भुखला में रउरो अपना माई के संगे चिल्हो सियारो के कथा जरूर सुनले होखबs हमहुँ अपना माई के संगे एह कथा के सुनले बानी। पिछला जनम के कइल गइल नीमन बाउर काम के फल अगिलो जनम में जरूर भेटाला इहे एह कथा के कहनाम बा। चिल्हो के तप उनका सन्तान के दीर्घायु बनावेला ओहिजे सियारो के लालच के कारण उनका संतान के नियति के हाँथ में समाये के परेला असमय ही। कथा के अंत में सियारो भी सत्य निष्ठा से जिउतिया के बरत के करsतारी आ अपना पिछला जनम के पाप से मुक्ति पा जात बारी। अउरी लम्बा उमिर तक जिए वाला संतान के महतारी के सुख भोगे के फल भेटाताs। एह बरत के साँच मन के कइला के कारण कछु होखे चाहे ना होखे अपना बाउर करम पर अंकुश लगावे के सिख त जरुर bhetalaa।
जिउतिया के बरत से माई आ संतान के बिच स्नेह के बंधन के मजबूती मिलेला ओकर दोसर तोड़ बिरले ही बा। जहां संतान के मन में ई बिस्वास रहेला की ओकरा माई के तप ओकरा पर संकट ना आवे दिहि ओहिजे माई के मन में भी अपना संतान के सुरक्षा के लेके फिकिर कम होला। काहे ना रही, काहे की माई खर जिउतिया कइले बाड़ी। हमनीके भोजपुरिया भाषी गांव में अक्सर हम सुनले बानी कहत की
कथा सुनला के बाद अक्सर माई आँख बन कर के अंचरा हाँथ में लेके हाँथ जोड़ के कहेली









