गुरुवार, 11 अगस्त 2022

सीवान जिला पर निर्मित विभिन्न शायरियां पढ़े। Read various poems composed on Siwan district.


 (1)

नए मिज़ाज के शहरों में, 

अब मेरा मन नहीं लगता।


जीं चाहता हैं पुराने वक़्तों का, 

फिर से मैं सीवान हो जाऊँ।


(2)

यदि आप तहज़ीब और नज़ाकत से, 
इत्तेफ़ाक़ रखते हैं।

तो बेशक मुस्कुराइए😊,
क्योंकि आप सीवान में हैं।

(3)

बड़े ही तहजीब से उसने,
मेरा दिल💔 तोड़ा था।

हम भी सीवान के थे।

उसे यकीन भी नहीं हुआ,
जब मैंने उसे छोड़ा था।

(4)


सीवान छुटा तो पटना मिला,
पटना से विछुड़े तो बनारस।

इसके बाद का ठिकाना तो अब तुम ही बताओ
क्योंकि स्वयं को तुम पर ही कर दिए हैं न्योछावर।

(5)

अरे मियां!!! होगी दिल्ली, 
दिल🥰 वालों की।

हमारे 'सीवान' के Sure-Suceess में, 
इश्क़😍 की तालीम दी जाती है।

(6)

अधूरा किस्सा लिख कर, 
पन्ने मोड़ आया हूँ।

खुद का एक टुकड़ा,
सीवान में ही छोड़ आया हूँ।

(7)


धीरे-धीरे ही सही, 
हम अपने किस्से सुनायेंगे।

मिलना कभी हमसे, 
तुम्हे पूरा सीवान घुमाएंगे।

(8)

कहाँ-कहाँ ढूंढेंगे मेरे दिल के कातिल को,
इस सीवान में।

एक काम कीजिए, 
ये इल्जाम भी मेरे ही सर डाल दीजिए।

(9)

कहानी तो छोटे लोगों की,
 लिखी✍️ जाती हैं।

हम तो सीवान वालों हैं,
हमारा तो इतिहास लिखा जाता हैं। इतिहास!!!

(10)

और अंत में मैं तुमसे कहना चाहता हूं.....

मैं अपनी जिंदगी में तुमसे, 
बस इतना चाहता हूँ।

तुम्हारी साड़ी में अपना गमछा बाँध के, 
सत्य-नारायण की कथा सुनना चाहता हूँ।

बुधवार, 10 अगस्त 2022

कविता

एक ऐसी कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है।


 ख्वाहिश नहीं मुझे

 मशहूर होने की,


        आप मुझे पहचानते हो

        बस इतना ही काफी है।


 अच्छे ने अच्छा और

 बुरे ने बुरा जाना मुझे,


        जिसकी जितनी जरूरत थी

        उसने उतना ही पहचाना मुझे !!!


जिन्दगी का फलसफा भी

कितना अजीब है,


        शामें कटती नहीं और

        साल गुजरते चले जा रहे हैं।


एक अजीब सी

'दौड़' है ये जिन्दगी,


        जीत जाओ तो कई

        अपने पीछे छूट जाते हैं और


हार जाओ तो

अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं।


बैठ जाता हूँ

मिट्टी पे अक्सर,


मुझे अपनी

        औकात अच्छी लगती है।


मैंने समंदर से

 सीखा है जीने का तरीका,


चुपचाप से बहना और

अपनी मौज में रहना।


ऐसा नहीं कि मुझमें

 कोई ऐब नहीं है,


  पर सच कहता हूँ

     मुझमें कोई फरेब नहीं है।


जल जाते हैं मेरे अंदाज से

मेरे दुश्मन,


   एक मुद्दत से मैंने

      न तो मोहब्बत बदली

      और न ही दोस्त बदले हैं।


एक घड़ी खरीदकर

हाथ में क्या बाँध ली,


वक्त पीछे ही

  पड़ गया मेरे !!!


सोचा था घर बनाकर

बैठूँगा सुकून से,


   पर घर की जरूरतों ने

       मुसाफिर बना डाला मुझे ।


सुकून की बात मत कर, 

बचपन वाला इतवार अब नहीं आता।


जीवन की भागदौड़ में

क्यूँ वक्त के साथ रंगत खो जाती है ?


हँसती-खेलती जिन्दगी भी

आम हो जाती है।


एक सबेरा था

जब हँसकर उठते थे हम,


       और आज कई बार बिना मुस्कुराए

     ही शाम हो जाती है।


कितने दूर निकल गए,

रिश्तों को निभाते-निभाते।


 खुद को खो दिया हमने

  अपनों को पाते-पाते।


लोग कहते हैं

हम मुस्कुराते बहुत हैं,


और हम थक गए

दर्द छुपाते-छुपाते।


खुश हूँ और सबको

खुश रखता हूँ,


        लापरवाह हूँ ख़ुद के लिए

        मगर सबकी परवाह करता हूँ।


मालूम है

कोई मोल नहीं है मेरा फिर भी


कुछ अनमोल लोगों से

रिश्ते रखता हूँ।


🙏🌹🌹🙏

मंगलवार, 9 अगस्त 2022

स्लीपर (Sleeper) बोगी में स्लीपर (Slipper) ले गया चोर !


       मुझे याद है भारतीय रेल के जनरल बोगी की वो तमाम यात्राएं जिसमे थोड़ी सी जगह बनाने के लिए, वहां बैठे लोगों से हमेशा हेल्दी ग्रुप डिस्कशन करना पड़ता था, उनको इंप्रेस करना पड़ता था, इतना इंप्रेस तो आज तक किसी लड़की को नहीं किये जितना कि कई बार सिर्फ थोड़ी-सी जगह के लिए वहां बैठे लोगों से कर लिये थे। यदि उसमे से थोड़ा भी इंप्रेस किसी ख़ूबसूरत बला👩‍🦰 को किए रहते तो आज तक शायद सिंगल नही रहते। ख़ैर!!! आपने विषय पर लौटते हैं। हम चर्चा कर रहे थे जनरल बोगी में सीट लेने की, कई बार तो सीट पर बैठे लोगों को भैया, चाचा, सर🙏 सब बोलकर रिश्ता बनाना पड़ता था, तब जाकर लोग कबूल करते थे और थोड़ी सी जगह मिलती थी बैठने की। हालांकि, उस थोड़ी सी जगह को देखकर मेरी तशरीफ भी घबरा जाती थी क्योंकि ट्रेन जब थोड़ी सी भी हिलती थी तो अक्सर मेरी तशरीफ फिसल कर सीट से नीचे उतर जाती थी ।


        जेनरल बोगी की इन तमाम यात्राओं में एक दिन गुस्से में हम एक खतरनाक UP/बिहारी मजदूर से भयंकर झगड़ा हो गया, वो भी जगह बनाने को लेकर। वो जो मजदूर था ना वो मुंबई से लौट रहा था, कमाकर। मुझे तो एक बार ऐसा लगा की उसने अपनी पूरी कमाई के पैसा से बहुत सारा सामान खरीद लिया था और वो सब वहीं सीट के नीचे ऊपर लोड कर दिया था। जब उससे मेरी सीट को लेकर बहस हो रही थी तब उसने मेरी ओर गौर से देखा और उसे यकीन हो गया कि हम फुल फ्रस्टेट बेरोजगार हैं। 


       हम बस इतना बोले कि भाई साहब, सामान का लगेज बुकिंग करवाना चाहिए ना!!! यहां क्यों भर दिए हो। आने-जाने एवं बैठने में परेशानी हो रही है। मेरा इतना बोलते ही वह और भड़क😠 गया और बोला -

      "तोर पैसा से खरीदे हैं का रे.....??? कि एतना समझा रहा है हमको!!! बहुते बैठ के, अफसर बने के शौक है न, तो रिजर्वेशन कराके स्लीपर में काहें नहीं जाता है रे.... 

चला हैं, यहां अंग्रेजी झाड़ने। हमको अनपढ़ समझा है का रे़...."


      वो और चार्ज होने लगा और उसको देखकर बाकी उसके साथी मजदूर भी जोश में आने लगे, इसलिए माहौल अनुकूल ना देखते हुए हम जल्दी से आगे बढ़ गए। 


        आपको लग रहा होगा कि बात आई गई हो गई लेकिन सच बताएं, वो स्लीपर वाली बात हमको लग गई, बेरोजगार जो थे। बेरोजगारों को कोई भी बात उतनी ही जल्दी खराब लगती है जितनी जल्दी नई बहू को सास की बात।


      उसके बाद हम भी निर्णय कर लिए कि अब और बेइज्जती नहीं करवाएंगे, जाएंगे अब हम भी स्लीपर से ही और वो भी बकायदे रिजर्वेशन कराके। जब टिकट काउंटर पर टिकट लेने गए तब वहां बैठे रेलवे के कर्मचारी ने फॉर्म दिया। नाम था उसका - रिजर्वेशन फॉर्म। परीक्षा का फॉर्म तो हमेशा भरते थे पर उस दिन टिकट कटने वाला एक फॉर्म भरे, मजा आ गया देखकर। बढ़िया सुंदर राइटिंग बना-बना कर फॉर्म भरके जमा किए। टिकट काटने वाले कर्मचारी ने कंप्यूटर में पता नहीं क्या-क्या टाइप किया और मेरी ओर देख कर कुछ बोले- उनके द्वारा बोले गए पहले दो चार शब्द तो हम समझ नहीं पाए बस इतना समझे कि वह पूछ रहे हैं टिकट काट दे ? मैंने जैसे सुना - टिकट काट दे ? मुझे लगा कि जब फार्म भरकर उनको दे ही दिये हैं तब पूछ क्यों रहे हैं ? मैंने पूछा - सीट है ना!!! , क्योंकि मैंने सुना था कि कई बार रिजर्वेशन में सीट नहीं मिलता हैं। तब वो बोले कि सीट तो मिल जाए लेकिन..... उनकी बात पूरी होती उससे पहले ही हम चहकते हुए बोलो - टिकट काट दीजिये। एक बार वो मेरी तरफ़ घुर कर देखे और टिकट प्रिंट होने के लिए दे दिया। आखिरकार टिकट करवा ही लिए थे, स्लीपर का। टिकट बढ़िया प्रिंट हुआ, कागज़ पर। खच-खच करने वाले प्रिंटर से। और जब हम उसको देखे, तो उसपर लिखा हुआ था, RAC 26 । इतना तो पढ़े थे ही हम। समझ गए कि स्लीपर में एक्चुअली रैक जैसा बना रहता है, उसी में आदमी सब सोता है, उसी को RAC (रैक) कह रहा है और हमारा छब्बीस नंबर का रैक है ।


     अगले दिन सुबह 06 बजे ट्रेन थी मेरी। रिज़र्वेशन करा लेने से टेंशन हो गया था क्योंकि हम जो जूता पहन कर जाते थे, वो कई दिनो से अपने सोल से जुदा होने लगा था, इसलिए एक मोची से सिलवा दिए थे। सही में देखने में अच्छा नहीं लग रहा था। कहीं स्लीपर बोगी में बड़े बड़े लोग आएंगे वो हमको गरीब टाइप ना समझें इसलिए हम जल्दी से बढ़िया कंपनी का एकदम नया चमड़ा टाइप वाला स्लीपर 600 रुपया में, बार्गेनिंग कराके ले लिए, एक पास के दुकान से। स्लीपर में रेडियम💎 लगा था जो रात में चमकता था ।


    रिजर्वेशन कराए थे तो ससुरा रात भर नींद😴 भी नहीं आई। ऐसा लग रहा था कि कहीं सोए ना रह जाएं और ट्रेन निकल जाए, कहीं अलार्म धोखा ना दे दे। पर फिर भी, आंखें भले ही लाल😳 हो गईं थी मेरी नहीं सोने से, पर उत्साह दस गुना था हो भी क्यों ना!!! रिजर्वेशन जो था स्लीपर में।


      सुबह होते ही पहुंच गए स्टेशन, मस्त नहा-धोकर, नया शर्ट-पैंट और स्लीपर पहनकर। ट्रेन आई तो घुस गए हम सामने वाली बोगी में और 26 नंबर के सीट पर आ गए। उसपर एक लड़की सो रही थी। हुलिया ऐसा बना हुआ था उसका जैसे बारात में दम भर नाचने के बाद सीधे आकर सो गई हो। अलग टाइप का खर्राटा भी ले रही थी।


      15 मिनट छोड़ दिए कि जाने दो, लड़की है। सो लेगी थोड़ा देर, फिर उठा देंगे। विवेकानंद से सीखे थे कि लड़की औरत का इज्जत करना चाहिए, इसलिए किए। थोड़ी देर बार उसको उठाए तो नींद में कह रही है कि "कौन हो, जाओ यहां से, ये मेरी सीट है, क्यों डिस्टर्ब कर रहे हो और सो गई "। 


     हम उसको बताए कि मेरी है ये सीट, मैने रिजर्वेशन कराया है। तभी एक ठो लौंडा जो उसकी हवा से उड़ती हुई जुल्फों को देखकर बहुत देर से आशिकी फ़िल्म का गाना "बस एक सनम चाहिए आशिकी के लिए" गाते हुए टाइम पास कर रहा था। हम को देखते हुए बोला कि - 


"ढेर अंग्रेजी बोल रहा है तुम। लड़की देख के यहां नाटक कर रहा है, आए हो यहां तुम लौंडियाबाजी करने।" 


      हम भी जोश में आ गए और उसको अपना टिकट दिखाए तो हंस के कहता है अनपढ़े हैं का रे, RAC टिकट में सुत के जाएगा। हमको समझ में नही आ रहा था कि वह कहना क्या चाहता हैं ??? उससे हम बहस कर ही रहे थे कि तभी टीटी  महोदय आ गये मैंने उनको बताया कि मेरी सीट पर लड़की सो रही है और जब कहां तो ये भाई साहब हमसे झगड़ रहे हैं। तब टीटी ने मेरा टिकट लिया और अपने पास स्थित एक बड़े से लिस्ट में मिलान किया और कहां - भाई साहब, कौन कॉलेज में पढ़ते हैं ? S-12 में 07 नंबर का सीट है आपका। सीधे जाइए ये S-2 है। हम चल तो दिए पर अभी भी समझ में नहीं आ रहा था की रेलवे पागल है क्या, जब सीट नंबर अलग है तो हमको 26 नंबर काहे लिख के दिया।


      खैर!!! कई डब्बों को पर करते हुए और लोगों से पूछते हुए अपने सीट पर आ गए। वहां साला अलग ही गांजा हो रखा था। सेम सीट नंबर का उसका भी टिकट था जो मेरे सीट पर बैठा था। हम सोचे कि साला ऊ मजदूरवा के फेर में आज दर-दर का ठोकर खा रहे हैं। मन कर रहा था कि मिल जाता ससुरा तो उसका नरेटी दबा देते। 


       एक घंटा तक बैठ नहीं पाए थे आराम से, और नींद भी आ रही थी और उपर से मेरे सीट पर तीन लोग बैठा हुआ था। अभी सोच ही रहे थे कि वहां बैठा एक आदमी मुस्कुराकर बोला कि - 


"अरे, काहे परेशान हो रहे हैं जी, आइए बैठिए, सबको चलना है एडजस्ट करके चला जाए"। 


     मानना पड़ेगा उस आदमी को। मेरे ही सीट पर हमको एडजस्ट कर दिया। सीट पर बैठे-बैठे उसने मुझे समझाया की RAC का मतलब क्या होता है। आप भी पढ़िए उसी की जुबानी।

"RAC यानी कि एक दुल्हन जिसका दो दूल्हा होता है, दोनो दूल्हा अपनी दुल्हन पर अधिकार दिखाने का कोशिश करता है पर दुल्हन अंत तक उन दोनों में से किसी की नहीं होती"


       हम भी RAC की कहानी सुन हताश होकर चुप-चाप एडजस्ट हो गए और अब आने लगी हमको नींद, रात भर जो सोए नहीं थे। ऊपर की सीट में गिद्ध जैसा गर्दन निकाल कर बैठा था एक आदमी जो झांक रहा था तब से। हमसे कहता है कि नींद आ रही है का ? तो आइए सो जाइए थोड़ी देर ऊपर, हम नीचे बैठ जाते हैं। उस दयालु आदमी को दंडवत  प्रणाम🙏 करने का मन किया। 


     हम जल्दी से चप्पल खोल कर ऊपर जाकर सो गए। करीब दो घंटे बाद नींद खुली तो लोग कम हो गए थे। मैं नीचे उतरा, की चलो थोड़ा नजारा देखा जाए, चाय-वाय☕ पिया जाए। उतरने के बाद अपना नया वाला चप्पल खोजने लगे, दिख ही नहीं रहा था। तभी एक आदमी जो खिड़की के पास बैठकर झाल-मूढ़ी खा रहा था, पूछा कि - का खोज रहे हैं भाई जी ? हम बोले कि "यार, मेरा स्लीपर नहीं मिल रहा" ? पूछा की कैसा था। हम बताए कि "यार, नया था, रेडियम लगा था उसमे" । वो हंसकर बोला कि 

"भाई जी, गया 

मैंने कहां - गया, मतलब!! 

तब वह मुस्कुराते हुए बोला - गया, स्टेशन अभी क्रॉस हुआ है, आपका स्लीपर गया।


     स्लीपर (Sleeper) बोगी में सबसे पहले आपको स्लीपर (Slipper) का ध्यान रखना चाहिए, इसलिए देखिए, हम बैठे हैं नीचे, लेकिन स्लीपर है मेरा पंखा के ऊपर" । 


      हम ऊपर देख रहे थे उसका स्लीपर (Slipper) वो हमको देखकर मुस्कुरा😊 रहा था और हम सोच रहे थे कि मेरा जनरल बोगी ही अच्छा था। कहां फंस गए इस स्लीपर के चक्कर में.......



75वां आजादी के अमृत महोत्सव पर मेरे छात्रो के द्वारा निर्मित बैनर एवं पोस्टर। Banners and posters manufactured by my students on Amrit Mahotasaw of 75th Independence.

75वां आजादी के अमृत महोत्सव पर मेरे छात्रो के द्वारा निर्मित बैनर एवं पोस्टर।


75वां आजादी का अमृत महोत्सव

Har Ghar Tiranga.
13th - 15th August.

Amrit Mahotsav

आजादी का अमृत महोत्सव

75th आजादी का अमृत महोत्सव

आजादी का अमृत महोत्सव

आजादी के अमृत महोत्सव का 75 वां वर्ष


Freedom is a Priceless Gem, Try to Preserve it.

स्वतंत्रता एक अमूल्य रत्न है, इसे संरक्षित करने का प्रयास करें।

आजादी का अमृत महोत्सव।

आजादी का अमृत महोत्सव का पोस्टर



हर मन का उत्सव आजादी का अमृत महोत्सव 

हर घर तिरंगा।


75 Azadi Ka Amrit Mahotsav.


इस्लामिया टीचर्स ट्रेनिंग (B.Ed) कॉलेज
(Islamia Teacher's Training (B.Ed) College)



सोमवार, 8 अगस्त 2022

नटराज शिव (Natraj Shiva)

 

नटराज, कांस्य, 12वीं शती,चोल काल, 
राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली

       नटराज भगवान शिव का एक नाम है उस रूप में जिस में वह सबसे उत्तम नर्तक हैं। नटराज शिव का स्वरूप न सिर्फ उनके संपूर्ण काल एवं स्थान को ही दर्शाता है, अपितु यह भी बिना किसी संशय स्थापित करता है कि ब्रह्माण्ड में स्थित सारा जीवन, उनकी गति कंपन तथा ब्रह्माण्ड से परे शून्य की नि:शब्दता सभी कुछ एक शिव में ही निहित है। नटराज दो शब्दों के समावेश से बना है – नट (अर्थात कला) और राज। इस स्वरूप में शिव कालाओं के आधार हैं। शिव का तांडव नृत्य प्रसिद्ध है।


       शिव के तांडव के दो स्वरूप हैं। पहला उनके क्रोध का परिचायक, प्रलयकारी रौद्र तांडव तथा दूसरा आनंद प्रदान करने वाला आनंद तांडव। पर ज्यादातर लोग तांडव शब्द को शिव के क्रोध का पर्याय ही मानते हैं। रौद्र तांडव करने वाले शिव रुद्र कहे जाते हैं, आनंद तांडव करने वाले शिव नटराज। प्राचीन आचार्यों के मतानुसार शिव के आनन्द तांडव से ही सृष्टि अस्तित्व में आती है तथा उनके रौद्र तांडव में सृष्टि का विलय हो जाता है। शिव का नटराज स्वरूप भी उनके अन्य स्वरूपों की ही भांति मनमोहक तथा उसकी अनेक व्याख्याएँ हैं।


     नटराज शिव की प्रसिद्ध प्राचीन मूर्ति के चार भुजाएँ हैं, उनके चारों ओर अग्नि के घेरें हैं। उनका एक पाँव से उन्होंने एक बौने(अकश्मा) को दबा रखा है, एवं दूसरा पाँव नृत्य मुद्रा में ऊपर की ओर उठा हुआ है। उन्होंने अपने पहले दाहिने हाथ में (जो कि ऊपर की ओर उठा हुआ है) डमरु पकड़ा हुआ है। डमरू की आवाज सृजन का प्रतीक है। इस प्रकार यहाँ शिव की सृजनात्मक शक्ति का द्योतक है। ऊपर की ओर उठे हुए उनके दूसरे हाथ में अग्नि है। यहाँ अग्नि विनाश का प्रतीक है। इसका अर्थ यह है कि शिव ही एक हाथ से सृजन करतें हैं तथा दूसरे हाथ से विलय। उनका दूसरा दाहिना हाथ अभय (या आशीष) मुद्रा में उठा हुआ है जो कि हमें बुराईयों से रक्षा करता है।


       इनका उठा हुआ पांव मोक्ष का द्योतक है। उनका दूसरा बाया हाथ उनके उठे हुए पांव की ओर इंगित करता है। इसका अर्थ यह है कि शिव मोक्ष के मार्ग का सुझाव करते हैं। इसका अर्थ यह भी है कि शिव के चरणों में ही मोक्ष है। उनके पांव के नीचे कुचला हुआ बौना दानव अज्ञान का प्रतीक है जो कि शिव द्वारा नष्ट किया जाता है। शिव अज्ञान का विनाश करते हैं। चारों ओर उठ रही आग की लपटें इस ब्रह्माण्ड की प्रतीक हैं। उनके शरीर पर से लहराते सर्प कुण्डलिनी शक्ति के द्योतक हैं।


राकेश गोस्वामी✍️

रविवार, 7 अगस्त 2022

कला प्रबंधन (Art Management) पेपर - 05 के अंतर्गत नवाचार (Innovation) का जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के मुख्य परीक्षा का नोट्स। Notes of Main Examination of District Art and Culture Officer.

 




नवाचार (Innovation) 

        नवाचार को अंग्रेजी में Innovation कहते हैं। नवाचार शब्द दो शब्दों के मेल से बना है नव + आचार जिसमें नव का अर्थ होता है नया (New) और आचार का अर्थ हुआ आचरण या परिवर्तन (Conduct or Change). नवाचार किसी उत्पाद, सेवा, प्रक्रिया में परिवर्तन लाने से है नवाचार के अंतर्गत कुछ नया और उपयोगी तरीका अपनाया जाता है। 

जैसे :- नई विधि, नई तकनीक, नया कार्य, नई सेवा, नया उत्पाद, इत्यादि। नवाचार को अर्थतंत्र (Economy) का सारथी भी माना गया है।

        नवाचार वह परिवर्तन है जो पूर्व में स्थित विधियों और पदार्थों में नयापन लाने का प्रयास करता है। नवाचार को विभिन्न मनोवैज्ञानिकों ने निम्नलिखित रूप में परिभाषित करने का प्रयास किया है।

  • नवाचार वह विचार (Idea) है जिसका प्रयोग व्यक्ति अपने नवीन कार्यों के रूप में करें।    -रोजर्स
  • नवाचार एक विचार है, व्यवहार है अथवा एक पदार्थ है जो नवीन (New) है और वर्तमान स्वरूप से भिन्न है।    -वारनेट
  • नवाचार आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में एक मूल्य (Value) जोड़ने वाले नवीनता का उत्पादन है। यह एक प्रक्रिया भी है और परिणाम भी।       -क्रोसन एवं अपयदिन
  • नवाचार एक समझ बूझ कर किया जाने वाला नवीन और विशिष्ट परिवर्तन है जिसे किसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु तैयार किया जाता है।       -माइल्स

नवाचार की शुरुआत 
(Started of innovation)

      1971 ई० में यूनेस्को सम्मेलन के दौरान नवाचार शब्द को परिभाषित किया गया और यह बताया गया कि नवाचार को स्वीकृति तभी मिल सकती है जब वह इन छह (06) चरणों से होकर गुजरे जो कि निम्न है -
  1. खोज (Search) 
  2. परीक्षण (Test) 
  3. मूल्यांकन (Evaluation) 
  4. विकास (Development) 
  5. विस्तार (Spread)
  6. स्वीकृति (Acceptance)
       नवाचार की शुरुआत किसी खोज के द्वारा होती है फिर इस खोज पर एक परीक्षण किया जाता है परीक्षण करने के उपरांत इसका मूल्यांकन कर उचित दिशा में विकास किया जाता है। विकास के उपरांत विस्तार कर समाज में व्यक्तियों के द्वारा इस नवाचार को कितनी स्वीकृति मिल रही है इसको निरीक्षण के उपरांत नवाचार की संज्ञा उसे प्रदान की जाती है।

नवाचार की विशेषता 
(Characteristic of innovation)

     नवाचार की निम्नलिखित विशेषताएं होती है जो कि निम्न है - 
  • नवाचार को सामान्यत: नए विचारों के निर्माण की संज्ञा दी जाती है। 
  • नवाचार की उत्पत्ति का कारण आवश्यकताएं और परिस्थितियां होती है।
  • इसका जन्म क्रिया के दौरान या दार्शनिक विचारों की गहनता से होता है। 
  • यह वर्तमान में उत्पन्न समस्याओं में सुधार लाने का नूतन प्रयास होता है। 
  • इसमें विशेष गुण वाले तत्व विद्यमान रहते हैं जो परंपरागत परिस्थितियों से भिन्न होते हैं।

निष्कर्ष 
(Conclusion) 

नवाचार नवीन विचारों एवं क्रियाओं को जन्म देने वाला एक साधन है इस को अपनाने हेतु व्यक्तिगत व्यवहार में लचीलापन होना आवश्यक होता है।

Reference :-



शुक्रवार, 5 अगस्त 2022

कला प्रबंधन (Art Management) पेपर - 05 के अंतर्गत कार्यक्रम प्रबंधन (Program Management) का जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी के मुख्य परीक्षा का नोट्स। Notes of Main Examination of District Art and Culture Officer.




 
कार्यक्रम प्रबंधन  
(Program Management) 

कार्यक्रम की परिकल्पना, कार्यान्वन एवं समीक्षा 
(Program Design, Implementation and Review)

        कार्यक्रम को अंग्रेजी में Program कहते हैं। इसका शाब्दिक अर्थ होता है - क्रमिक रूप से किया जाने वाला कार्य। 
        समूह कार्य के रूप में कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में जाना जाता है। इसके माध्यम से समूह  गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। वास्तव में कार्यक्रम स्वयं एक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य समूह की क्रियाओं और गतिविधियों को इस प्रकार नियोजित करके संपन्न करना होता है कि जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ हो।

       कार्यक्रम को परिभाषित करते हुए विद्वानों ने निम्न परिभाषाएं दी है - 
  • कार्यक्रम के अंतर्गत वह सभी कार्य आता है जिसे समाज के सदस्यों द्वारा संपन्न किया जाता है। जैसे - शिल्प, अभिनय, नाटक, खेल-कूद, इत्यादि।     
-क्लीन
  • कार्यक्रम शब्द उन क्रियाओं में प्रयोग किया जाता है जो वार्तालाप के स्थान पर करने को अधिक महत्व देते हैं।           
-मिडलमैन

         इन परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि कार्यक्रम एक समूह द्वारा की जाने वाली वे गतिविधियां होती है जो समूह की व्यक्तिगत अभिरुचियों एवं क्षमताओ पर आधारित तथा निर्धारित होती है। इसके द्वारा समूह में समूह की भावना का विकास होता है और समूह अपनी समस्याओं का समाधान खोजता है। कार्यक्रम के माध्यम से समाज के सदस्यों में समूह भावना (Group spirit) के विकास पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है। इस संपूर्ण प्रक्रिया में कार्यकर्ता का यह दायित्व होता है कि वह समूह के सदस्यों की रुचियों एवं क्षमताओं के अनुसार कार्यक्रमों का निर्माण करें एवं सदस्यों को विभिन्न भूमिकाओं के निर्वहन का अवसर प्रदान करें।

कार्यक्रम प्रबंधन
(Program Managment)

     कार्यक्रम प्रबंधन एक या एक से अधिक कार्यक्रमों का संगठन एवं प्रशासन (Organization and Administration) है। इसमें विशेष रूप से जिन बातों पर ध्यान दिया जाता वह है - बजट, संचालन और समीक्षा (Budgeting, Operations and Reviews) इन तीनों के अलावा भी अच्छे संचार एवं विस्तार (Good communication and extension) पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

     कार्यक्रम प्रबंधन और परियोजना प्रबंधन दोनों अक्सर एक समान ही होते हैं जबकि इनके कई कार्य भी एक समान होते हैं/प्रतीत होते हैं। यदि इन दोनों में अंतर की बात की जाए तो सबसे प्रमुख अंतर जो मुझे ज्ञात हो रहा है वह यह है कि कार्यक्रम प्रबंधन एक स्थाई चर है जो कई वर्षों तक चलता रहता है इसके विपरीत परियोजना प्रबंधन एक अस्थाई चर है जो कि परियोजना के समाप्ति के साथ ही वह समाप्त हो जाता है।

कार्यक्रम की परिकल्पना 
(Program Design)

      किसी कार्यक्रम/घटना की व्याख्या करने वाला कोई सुझाव या अलग-अलग प्रतीत होने वाली बहुत सी घटनाओं के आपसी संबंध की व्याख्या करने वाला कोई तर्कपूर्ण सुझाव परिकल्पना कहलाता है। इसे शोध के परिदृश्य में Hypothesis कहते हैं।

       सामान्य रूप से परिकल्पना को हम इस रूप में भी परिभाषित कर सकते हैं जैसे :- परिकल्पना का अर्थ किसी अस्थाई विचार (Provisional Idea) से होता है जिसे अंतिम रूप में व्यक्त करना अभी बाकी होता है।

कार्यान्वयन 
(Implementation)

    कार्यान्वयन का अर्थ होता है किसी चीज को लागू करना या फिर अमल में लाना। इसे हम यूं भी कह सकते हैं कि कार्यान्वयन किसी योजना, विधि या किसी डिजाइन विचार मॉडल भी निर्देश मानक या किसी डिजाइन, विचार, मॉडल, विनिर्देश (Specification), मानक (standard) या कुछ करने की नीति का निष्पादन या अभ्यास है।

      एक कार्यान्वयन योजना एक तरह से परियोजना प्रबंधन है जो किसी लक्ष्य और उद्देश्य को प्राप्त करने के सीढ़ियों की रूपरेखा तैयार करता है। अपने लक्ष्य के आधार पर कार्यान्वयन की योजनाएं भिन्न हो सकती है लेकिन उनमें निम्नलिखित तत्व शामिल रहते हैं -

  • समय रेखा (Time Line) :- कोई भी कार्य को संपन्न करने की एक निश्चित समय सीमा होती हैं। अतः हमें उस कार्य को उसी समय-सीमा में ही संपन्न करना चाहिए।
  • संसाधन योजना (Resource Planning) :- इसमें कार्यान्वयन को पूरा करने के लिए संसाधनों की चर्चा रहती है। 
  • लक्ष्य (Aim) :- यह एक अंतिम परिणाम होता है जिसे एक कार्यान्वयन के द्वारा पूरा करना होता है।
  • उद्देश्य (Objective)  :- लक्ष्य तक पहुंचने के लिए उद्देश्य का पालन करना चाहिए। 
  • भूमिकाएं और जिम्मेदारियां (Roles & Responsibilities) :- कार्यान्वयन के कार्य में सभी कर्मचारियों को अपनी भूमिका और जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए।

समीक्षा (Review) 

      कार्यक्रम की समीक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो शैक्षणिक कार्यक्रमों की स्थिति प्रभावशीलता और प्रगति का मूल्यांकन करती है और उन कार्यक्रमों के भविष्य के विशाल जरूरतों और परंपराओं की पहचान करने में मदद करती है।


Reference :-

https://www.samajkaryshiksha.com/2022/04/meaning-and-process-of-program.html


https://www.netinbag.com/hi/business/what-is-program-management.html


https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE


https://www.techtarget.com/searchcustomerexperience/definition/implementation


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https://www.provost.iastate.edu/academic-programs/accreditation/academic-program-review--purpose-and-process