शुक्रवार, 20 मई 2022

मेरे बचपन की यात्रा। My Childhood journey.


          एक जमाना था... जब चरणसिंह के टमटम यानी खुद के पैरों से ही विद्यालय जाना होता था क्योंकि मोटरसाइकिल, कार, बस, आदि। से हमें भेजने की रीत नहीं थी। स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा या बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे। उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था। पास या फेल ही बस हमको ज्ञात रहता था, प्रतिशत (%) से हमारा कभी भी संबंध ही नहीं रहा।

       9वीं कक्षा में जब पहुंचा तब ट्यूशन लगाई लेकिन चर्चा कही नही की। ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख🐚 समझा जा सकता था।

     किताबों में पीपल के पत्ते, अड़हुल के फूल, मोर का पंख, मोर के पंख को खाने के लिए पेंसिल का बारीक चूर्ण रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी।

    कपड़ो की थैलीयों में... बस्तों में... और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में... किताब/कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी। हर साल जब नई क्लास का बस्ता सजाते थे उसके पहले किताब/कॉपी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था।

     साल खत्म होने के बाद अपनी किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम। एक ही किताब से पूरा मोहल्ला पढ़ाई कर लेता था।


हमारे माताजी-पिताजी को हमारी पढ़ाई बोझ है। ऐसा कभी लगा ही नहीं.... 


    एक दोस्त को साइकिल के अगले डंडे पर और दूसरे दोस्त को पीछे कैरियर पर बिठाकर गली-गली में घूमाना हमारी दिनचर्या थी। इस तरह हम ना जाने केतना बेर गांव घूमे होंगे, हमको याद नही हैं।


    विद्यालय में मास्टर जी के हाथ से मार खाना, पैर का अंगूठा पकड़ कर खड़े रहना, मुर्गा बनना और कान👂🏽 लाल होने तक मरोड़े जाते वक्त हमारा ईगो कभी आड़े नहीं आता था। सही बोले तो ई ससुरा ईगो का होता है!!! यह हमें मालूम ही नहीं था। घर और स्कूल में मार खाना भी हमारे दैनंदिन जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी। मारने वाला और मार खाने वाला दोनों ही खुश रहते थे। मार खाने वाला इसलिए क्योंकि कल से आज कम पिटायें हैं और मारने वाला इसलिए कि आज फिर हाथ धो लिए।


         बिना चप्पल जूते के और किसी भी गेंद के साथ लकड़ी के पटियों से कहीं पर भी नंगे पैर क्रिकेट खेलने में क्या सुख था ? वह बस हमको ही पता है। हमने पॉकेट-मनी कभी मांगी ही नहीं और पिताजी ने कभी दी भी नहीं। इसलिए हमारी आवश्यकता भी छोटी-छोटी सी ही थीं। साल में कभी-कभार दो चार बार सेव, मिक्सचर, मुरमुरे का भेल, गोली टॉफी खा लिया तो बहुत होता था, उसमें भी हम बहुत खुश हो लेते थे। छोटी-मोटी जरूरतें तो घर में ही कोई भी पूरी कर देता था क्योंकि परिवार संयुक्त होते थे।


     दिवाली में नागिन पटाखों की लड़ी को छुट्टा करके एक-एक पटाखा फोड़ते रहने में हमको कभी अपमान नहीं लगा। हमारे मां बाप को कभी बता ही नहीं पाए कि हम आपको कितना प्रेम💓 करते हैं क्योंकि हमको आई लव यू कहना ही नहीं आता था।

      आज हम दुनिया के असंख्य धक्के खाते हुए और संघर्ष करती हुई दुनिया का एक हिस्सा है। किसी को जो चाहिए था वह मिला और किसी को कुछ मिला कि नहीं वह तो नही पता लेकिन इतना जरुर जानते हैं कि जो जहां है खुश😊 जरूर है ?


       स्कूल की डबल ट्रिपल सीट पर घूमने वाले हम और स्कूल के बाहर उस हाफ पेंट में रहकर गोली टाॅफी बेचने वाले की दुकान पर दोस्तों द्वारा खिलाए पिलाए जाने की कृपा हमें आज भी याद है।

     वह दोस्त कहां खो गए, वह बेर वाली कहां खो गई, वह चूरन बेचने वाली कहां खो गई, सांभर चटनी बेचने वाले अंकल जी। जब कभी किसी ने उनसे एक्स्ट्रा चटनी मांगा तो ये कहने वाले कि आप के लिए तो जान हाजिर है..... अभी कहां हैं पता नहीं।


      हम दुनिया में कहीं भी रहे पर यह सत्य है कि हम वास्तविक दुनिया में बड़े हुए हैं हमारा वास्तविकता से सामना वास्तव में ही हुआ है।


      कपड़ों में सलवटें ना पड़ने देना और रिश्तों में औपचारिकता का पालन करना हमें जमा ही नहीं।

      

       सुबह का खाना और रात का खाना इसके अलावा टिफिन में अखबार में लपेट कर रोटी ले जाने का सुख क्या है ? आजकल के बच्चों को पता ही नही।


      हम अपने नसीब को कभी भी दोष नहीं देते हैं जो जिंदगी जी रहे हैं वह आनंद से जी रहे हैं और यही सोचते हैं और यही सोच हमें जीने में मदद कर रही है जो जीवन हमने जिया उसकी वर्तमान से तुलना हो ही नहीं सकती।



       हम अच्छे थे या बुरे थे नहीं मालूम, पर हमारा भी एक जमाना था और Most importantly, आज संकोच से निकलकर, दिल से अपने साक्षात देवी-देवता तुल्य, प्रात: स्मरणीय, माता-पिता, भाई एवं बहन को कहना चाहता हूं कि मैं आपके अतुल्य लाड, प्यार, आशीर्वाद, लालन-पालन एवं दिए गए संस्कारो का ऋणी हूं। 🙏


       एक बात तो तय मानिए जो भी इस लेख👆🏻 को पूरा पढ़ेगा उसे अपने बीते जीवन के कई पुराने सुहाने पल अवश्य याद आयेंगे।🙏🏻

बुधवार, 18 मई 2022

प्रोफ़ेसर साहब, लाला, झारखंडी, लाठी और डॉक्टर जी (डाक्टरवां) के बरात।

      लेख✍️ शुरू करने से पूर्व मैं शीर्षक में प्रयुक्त नामों के अर्थ बताता हूं। प्रोफेसर साहब यानी कि मैं विश्वजीत कुमार, लाला यानी की अनीश कुमार, झारखंडी यानी कि मनीष कुमार, लाठी  यानी कि रंजीत कुमार, डॉक्टर जी (डाक्टरवां) यानी कि अनुज कुमार जो कि आज शादी के परिणय-बंधन में बंधने वाले थे। 


      हम सभी जब +2 में थे तो एक ही साथ Sure Success Coaching में साथ पढ़ते थे। ऐसे इन सभी के अलावें और भी थे लेकिन वो डाक्टरवां यानी कि अनुज की शादी में सम्मिलित नही थे इसीलिए इस लेख में उनके बारे में ही चर्चा करते हैं जो शादी में सम्मिलित थे। पूरे ग्रुप के बारे में चर्चा फिर कभी अगले लेख✍️ में......



      09 April 2022 को 10:53 में 🤝🤝Sure Success नाम के Whatsapp Group में एक संदेश आता है। भेजने वाले हैं अनुज और यह उनकी शादी का कार्ड था जिसमें लड़की का नाम पुष्पा लिखा हुआ था। फिर क्या था हाल ही में रिलीज हुई पुष्पा मूवी के डायलॉग से ग्रुप में हलचल होने लगी।


      शादी में शामिल होने का मैंने निर्णय ले लिया क्योंकि सिवान से वो मुझे अपने घर ले जाने पर राजी हो गए थे। भगवानपुर से मौर्य एक्सप्रेस में बैठ सिवान स्टेशन लगभग 01:00 बजे तक पहुंच गए थे। सिवान से मैं कैसे जाऊंगा इसकी व्यवस्था डॉक्टर ने लाला को दे रखा था और लाला ने झारखंडी एवं लाठी को। पूरे 02 घंटे इंतजार के बाद मनीष (
झारखंडी) और रणजीत (लाठी) स्टेशन आये उनके साथ मैं फिर चला। मुझसे मिलने के उपरांत रंजीत जी ने अपने घर फोन कर के खाना बनाने के लिए बोल दिये जबकी अनीश के घर पहले से मेरे लिए खाना  तैयार हो रहा था। 


     चूंकि रणजीत के घर मैं पहली बार जा रहा था इसीलिए कुछ Sweet ले लिया, अनीश के घर के लिए Sweet मैंने पहले ही ले रखा था। शादी में जाने से पूर्व ही दो बार खाना, खाना पड़ गया। ख़ैर जब तक डॉक्टर साहब (अनुज) के घर पहुंचे पता चला की बारात निकल रही हैं। ऐसे बरात में सारी गाड़ियां निकलने के बाद ही दूल्हा की गाड़ी निकलती हैं लेकिन मैंने वहां देखा कि सबसे पहले दूल्हा की गाड़ी ही निकली। जब बारात से दूल्हा ही निकल चुके थे तो वहां रुकने का कोई खास औचित्य नहीं था इसलिए हम सभी फिर लड़की के घर की ओर प्रस्थान कर गए। 


       वहां पर व्यवस्था बहुत ही जबरदस्त था। जबरदस्त बोले तो पूरा घोड़ो का दौर हो रहा था। बरात में इंसानों के साथ घोड़े भी आए थे जो अपना करतब दिखा रहे थे। बरात में घोड़ों का क्या काम यह मुझे आज तक समझ में नहीं आया है। हमलोगों के सम्मुख ही पटाखा वाला पटाखा फोड़ रहा था मैं यूँ ही एक फ़ोटो खींच लिया क्योंकि मैं अपना कैमरा भी साथ लेकर गया था। जब पटाखा वाला देखा कि कोई उसे अटेंशन दे रहा है तब वह और कला-बाजिया दिखाते पटाखा फोड़ने लगा और हम सभी से अनुरोध किया कि फोटो खींचते रहिए। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भांति हम उसके आदेश को मानकर फोटोशूट करने लगें।


     घर के पास ही एक ऊंचा सा टीलानुमा स्थल था। हमने ऊपर चढ़कर देखा तो पाया कि वहां एक माताजी का मंदिर हैं और भजन-कीर्तन का कार्य चल रहा है। मंदिर में, मैं और अनीश जी प्रवेश किये, मनीष जी मंदिर के बाहर रुके।  इसका वजह मुझे उस समय ज्ञात हुआ जब हम मंदिर से निकले। हमलोगों के मंदिर में प्रवेश करने एवं निकलने का मनीष जी के द्वारा एक सुंदर वीडियो बनाया गया था वो भी स्लो मोशन में। फिर हमें दोबारा मंदिर में प्रवेश करके पुनः वीडियो को शूट कराये। पहली बार हम फोटो/वीडियो खींच नहीं रहे थे बल्कि खिंचवा रहे थे।


      बचपन से ही मुझे बरात में सम्मिलित होने का बहुत शौक रहा है। बरात में जाना और नाश्ता करना मेरी पहली प्राथमिकता रहती थी लेकिन जब से कैमरा📸 संभाल लिया है नाश्ता तो दुर की बात हुई कई बार खाना खाने का भी टाइम नहीं मिलता।



      इसकी वजह यह है कि बरात के पहुंचते ही सबसे पहले द्वार पूजा, जयमाला और फिर कन्या का क्लोज़ अप शूट उसके बाद शादी की फोटो करते-करते बहुत देर हो जाती थी और बड़ी मुश्किल से जब खाना खाने के लिए समय निकाल कर जाते तो पता चलता की बहुत सारा आइटम खत्म हो गया हैं। बड़ी मुश्किल से जुगाड़ कर के खाना खाने बैठते तब तक 02 लोग हल्ला करते आते की आरे!! फोटोग्राफरवां कहां चला गया ? गुरहथनी शुरू हो गया है। कई बार तो टेबल पर ही खाना छोड़कर जाना पड़ता क्योंकि हमारे लिए फोटो खींचना पहली प्राथमिकता रहती।

       अनुज जी की शादी में ऐसा कुछ नहीं हुआ क्योंकि जब तक हम फोटो खींच रहे थे तब तक अनीश जी मेरे लिए नाश्ता ले कर रखे थे। जयमाला की फोटो खींचने के बाद मैंने नाश्ता किया और फिर क्लोजअप सूट के लिए आंगन में गए। क्लोजअप सूट के दरम्यान एक लड़की👩 मुझे बार-बार नोटिस कर रही थी। कुछ देर उपरांत वह मेरे पास आई और बोली:- 

सुनिए ना!!! 

मैंने कहा:- बोलिए ना!!!

तब उसने कहां:- अगले महीने मेरी शादी है।

मैंने कहा:- तो......

उसने झेंपते हुए कहा कि आप को ही मेरी शादी में फोटो खींचनी है।

मैंने कहा:- आपको मेरी फोटोग्राफी इतनी पसंद आई।

तब उसने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहां की:- तो आपको कह क्यों रहे हैं।

मैंने कहा:- ठीक है। डॉक्टर साहब को बोल दीजिएगा।

अब चौकना उसे था क्योंकि मैंने अनुज को डॉक्टर साहब बोल दिया था। फिर मैंने तुरंत ही अपने शब्दों को सुधारा और कहा कि अनुज जी को बोल दीजिएगा। वह कहेंगे तो हम आ जाएंगे।

      इसके उपरांत वह अपनी खुद की फोटो खिंचवाई शायद डेमो क्लास ले रही थी। डेमो क्लास में तो हर कोई अपना 100% देता है लेकिन मैंने उससे भी ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया।

      हमारा डेमो क्लास और चलता लेकिन तब तक उसके घर वाले विलेन के रूप में यह कहते हुए आ गए कि कब तक फोटो खिंचवाईयेगा गुरहथनी का समय हो गया है। इस तरह हमारे डेमो क्लास का The End हो गया।

      फिर हम खाने की टेबल की ओर बढ़े क्योंकि अभी तो पूरी कहानी बाकी ही थी। खाना खाने के दरम्यान भी पूरा ध्यान उस डेमो क्लास पर ही टिका रहा।


एक गाना भी है ना....,


जहां चार यार मिल जाएं वहां रात हो गुलजार.....


 लेकिन यहां तो 05 थे। प्रोफेसर साहब, लाला,  झारखंडी, लाठी, डॉक्टर जी (डाक्टरवां). हमारी रात तो कुछ ज्यादा ही गुलज़ार होने वाले थी। फिर हमलोग वहां पहुंचे जहां पर आर्केस्ट्रा💃 का कार्यक्रम चल रहा था। पहले तो दो-चार हिंदी गाना बजा उसके उपरांत भोजपुरी के अश्लील गानों पर जो लाइव प्रदर्शन शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा और सभी लोग उस में गोते लगाते रहे। छोटी सी बानगी आप भी देखिए👇👇


धन्यवाद 🙏🏻




सोमवार, 16 मई 2022

तेरी इस मोहब्बत💓 की महफ़िल में.....


हमें भी नज़ाकत से,

 तकता है कोई।


तेरी इस मोहब्बत💓 की महफ़िल में, 

तन्हा नहीं है हम।


संदीप📸✍️


Facebook link. 

🤣 हास्य हंगामा🤩


एक दिन सब्जी मंडी मे मिल गया, 

मुझको मेरा कॉलेज का बिछुड़ा यार।


बाहें पसार मिले🫂 तबीयत से,

दोनो दोस्त बीच बाजार।


हुआ अचानक यह कि टमाटर की थैली🍅 गिर गई नीचे, 

मिलने के चक्कर मे।


दो सांड झपट पडे एक साथ,

धरती🌏 लाल हुई दौनों की भीषण टक्कर मे।


 भारत-पाकिस्तान की तरह दौनों लड़ाके डट गये,

 अपने सींग फंसा कर।


कोहराम मच गया सब्जी मंडी मे, 

सब के सब भागे अपनी जान बचा कर।


सब के सब जो वीर महात्मा सलाह कुशल विश्लेषक,

 भागे सर पे रख के पैर।


मिर्ची वाला खंभे पर आलू वाला पिक् अप पर चढ़,

 मनाए जान की खैर।


मैंने कहा- भाई जरा बताओ? 

किस चक्की का आटा खाते हो।


जब भी मिलते हो हर बार पहले से तुम, 

डबल नजर आते हो।


यह लटका पेट, आंखों पे चश्मा,

दांतों मे सोना और चांदी चमकती बालों में।


गालों पर गलियारे कैसे जरा बताओ, 

ना उलझाओ और सवालों में।


तू तो कालेज का हीरो😎 था, 

तेरे सामने जीरो थे- आमिर, शाहरुख और सलमान।


सभी ल़डकियों को घायल🥰 करता था,

चला नयनों से तीर कमान।💘 


धुक-धुक करती बाईक पर जब घुसता गेट में, 

उड़ाता धुंआ का छल्ला।💨


जैसे घुसा टाइगर भेड़ों के बाड़े मे था, 

मचता कोहराम एवं हो-हल्ला। ।


याद तो होगी वो कोने वाली कानी कमला,  

जो तुझ पर जान छिड़कती थी।


जब होती थी नजरें तीन तुम्हारी, 

तो लिटरेचर वाली मैम भड़कती थी।


और बताओ,


कैसे हो? बाल-बच्चे भाभी कैसे हैं? 

कैसा है घर परिवार?


सुन लिपट गया वो मुझसे रोने लगा,

बह निकली आंखों से धार। 


निकल कालेज से डिग्री ले, 

पाने नॉकरी दो साल दर दर घूमा।


 बेरोजगार से ब्याह कौन करती, 

मंदिर-मस्जिद के दर को चूमा।


बड़ी मुश्किल से ब्याह हुआ, 

दस साल मे बना दी पूरी कबड्डी टीम।


एक चक्की है चून पीस करता गुज़ारा,  

निगल ग़म और चबाकर नीम। 


आटा, दाल, नमक, बिजली-बिल,

स्कूल फीस कपड़े साड़ी और मोबाइल। 


आमदनी चवन्नी खर्च रुपया और ऊपर से मारती,

 मंहगाई मिसाइल। 


घर गृहस्थी की चक्की  और आटे  की  चक्की, 

दोनों मे पिस रहा हूं।


बस कट रही है जैसे-तैसे जिंदगी  सड़क पर जूते  घिस रहा हूं।


फिर मुँह कान के पास ला कर बोला- 


सुन भाई, 

तुझे एक राज की बात बताऊँ।


तेरी भाभी वो ही कालेज वाली कानी कमला है,

अब बोल कहाँ मर जाऊँ।


🤣🤣🤣🤩🤩


योगेन्द्र शर्मा✍️

रविवार, 15 मई 2022

गजल (Gazal)



बेखुदी में सनम तेरा साथ निभाता ही गया।

अपनी उलझन को यूं हर बार दबाता ही गया।। 


 बेरुखी थी तेरे प्यार की आगोशी।

दर्दे दिल थे फिर भी साथ निभाता ही गया।। 


होंठों पे थी मुस्कान की नमी।

दिल में उठे तूफानों को संभालता ही गया।। 


 रेत सी फिसल रही थी जिंदगी की खुशी।

हर फिसलन पर आह को सहता ही गया।। 


 कोशिशें की बहुत साथ निभाने की।

हर कोशिशों पर पानी फिरता ही गया।। 


 रंजो गम थे मुकद्दर में शायद मेरे।

जहर घुंट को जल समझ पीता ही गया।। 


तेरे प्यार को पाने की उम्मीद में हर बार।

गमें दरिया को पार करता ही गया।। 


                           - पूनम सिंह✍️

Buddha Purnima (बुद्ध पूर्णिमा)


     Buddha's Birthday is a Buddhist festival that is celebrated in most of East Asia and South Asia commemorating the birth of the Prince Siddhartha Gautama, later the Gautama Buddha, who was the founder of Buddhism. According to Buddhist tradition, Gautama Buddha was Born c. 563-483 BCE in Lumbini.


बुद्ध पूर्णिमा


       बुद्ध का जन्मदिन एक बौद्ध त्योहार है जो अधिकांश पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया में राजकुमार सिद्धार्थ गौतम, बाद में गौतम बुद्ध, जो बौद्ध धर्म के संस्थापक थे, के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।  बौद्ध परंपरा के अनुसार, गौतम बुद्ध का जन्म c.  563-483 ईसा पूर्व लुंबिनी, नेपाल में हुआ था।

सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी (General knowledge Quiz)

प्र.1- विश्व का सबसे वैज्ञानिक धर्म कौन सा है ?

उ.- बौद्ध धर्म।

प्र.2- बौद्ध धर्म की शुरुआत किसने की ?

उ.- तथागत बुद्ध ने।

प्र.3- तथागत बुद्ध के माता-पिता का नाम क्या था ?

उ.- महामाया और शुद्धोधन।

प्र.4- तथागत बुद्ध के बचपन का नाम क्या था ?

उ.- सिद्धार्थ।

प्र.5. सिद्धार्थ किस राज्य के राजकुमार थे ?

उ.- कपिलवस्तु।

प्र.6. सिद्धार्थ किस वंश से संबंधित थे ?

उ.- शाक्य वंश।

प्र.7- तथागत बुद्ध का जन्म कब हुआ था ?

उ.- 563 ई.पू.।

प्र.8- राजकुमार सिद्धार्थ का विवाह किससे हुआ ?

उ.-यशोधरा से।

प्र.9- सिद्धार्थ-यशोधरा के पुत्र का नाम क्या था?

उ.- राहुल।

प्र.10- सिद्धार्थ द्वारा गृहत्याग का मूल कारण क्या था ?

उ.- शाक्य-कोलिय (निषाद) वंश के बीच युद्ध को टालना।

प्र.11- सिद्धार्थ द्वारा गृह त्याग के समय आयु कितनी थी ?

उ.- 29 वर्ष।

प्र.12. सिद्धार्थ को राज्य सीमा से बाहर छोड़कर आने वाला नौकर का नाम क्या था  ?

उ.- छन्न।

प्र.13. गृह त्याग के बाद सिद्धार्थ ने क्या निश्चय किया  ?

उ.- ज्ञान प्राप्ति का।

प्र.14- सिद्धार्थ ने ब्राह्मण सन्यासियों का साथ क्यों छोड़ दिया ?

उ.- क्योंकि उनका ज्ञान अपूर्ण काल्पनिक था।

प्र.-15- सिद्धार्थ द्वार शरीर को अत्यधिक कष्ट का क्या परिणाम निकला ?

उ.- शरीर बेहद कमजोर हो गया।

प्र.16- पाँच सन्यासियों के नाम, जो सिद्धार्थ से नाराज होकर चले गये ?

उ.- कौंडनय, भदिय, वज्ज, अस्सजि, महानाम।

प्र.17- जीर्ण शरीर लिए सिद्धार्थ को भोजन किसने खिलाया ?

उ.- सुजाता ने।

प्र.18- अंत में सिद्धार्थ को कहाँ ज्ञान प्राप्त हुआ ?

उ.- बोधि वृक्ष के नीचे।

प्र.19. ज्ञान प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ क्या कहलाये ?

उ.- बुद्ध।

प्र.20- बुद्ध का अर्थ क्या है ?

उ.-राग, द्वेष, मोह से ऊपर उठा पूर्ण ज्ञानी पुरूष।

प्र.21. बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति का उद्देश्य क्या था ?

उ.- मनुष्य के दु:ख व अंधविश्वास को दूर करना।

प्र.22. बुद्ध ने प्रथम उपदेश किसे दिया ?

उ.- पाँच नाराज सन्यासियों को।

प्र.23- त्रिशरण क्या है ?

उ.- मैं बुद्ध की शरण में जाता हूँ, मैं धम्म की शरण में जाता हूँ, मैं संघ की शरण में जाता हूँ।

प्र.24. पंचशील क्या है ?

उ.- प्राणी हिंसा न करना, चोरी न करना, व्यभिचार न करना, निंदा न करना, शराब व मादक पदार्थों का सेवन न करना।

प्र.25. आष्टांगिक मार्ग क्या है ?

उ.- 

  1. सम्यक दृष्टि, 
  2. सम्यक संकल्प, 
  3. सम्यक वाणी, 
  4. सम्यक कर्मान्त, 
  5. सम्यक आजीविका, 
  6. सम्यक व्यायाम, 
  7. सम्यक स्मृति, 
  8. सम्यक समाधि।

प्र.26- मगध के किस सम्राट ने बुद्ध के धम्म को स्वीकार किया ?

उ.- बिम्बिसार।

प्र.27- भिक्षुणी संघ की प्रथम सदस्या कौन थी ?

उ.- महाप्रजापति गौतमी।

प्र.-28- बुद्ध ने किस वर्ण के लोगों को दीक्षा दी ?

उ.-बिना किसी भेदभाव के सभी को।

प्र.29. संघदान हेतु प्रसिद्ध व्यक्ति कौन था ?

उ.- अनाथपिण्डक।

प्र.30- पारलौकिक तत्वों पर बुद्ध के क्या विचार थे ?

उ.- आत्मा-परमात्मा, स्वर्ग-नरक को नहीं मानना।

प्र.31- बुद्ध का महापरिनिर्वाण किस आयु में हुआ ?

उ.- 80 वर्ष।

प्र.32- महापरिनिर्वाण किस स्थान पर हुआ ?

उ.- कुशीनगर।

प्र.33- बौद्ध धर्म का सर्वाधिक प्रसार किस सम्राट के काल में हुआ ?

उ.- अशोक महान के काल में।

प्र.34- कलिंग युद्ध के बाद किसने अशोक को तलवार फेंकने पर मजबूर कर दिया  ?

उ.- बौद्ध भिक्षु उपगुप्त ने।

प्र.35- अशोक ने अपने पुत्र-पुत्री को किस देश में धम्म प्रचार हेतु भेजा ?

उ.- श्रीलंका।

प्र.36- भारत विश्व गुरु कब कहलाता था ?

उ.- मौर्यकाल में।

प्र.37. विश्व प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षक कौन थे ?

उ.- बौद्ध भिक्षु।

प्र.38. अत्त दीपो भव: का अर्थ क्या है ?

उ.- अपना दीपक स्वयं बनो।

प्र.39- विश्व का सर्वश्रेष्ठ धम्म ग्रंथ कौन सा है ?

उ.- बुद्ध और उनका धम्म।

प्र.40- त्रिपिटक क्या है ?

उ.- सुत्तपिटक, धम्मपिटक, विनयपिटक।

प्र.41- वेदों को मरुभूमि समान बंजर किसने कहा?

उ.- तथागत गौतम बुद्ध ने।

प्र.42- सर्वाधिक प्राचीन मूर्तियाँ किसकी मिली है ?

उ.- गौतम बुद्ध की।

प्र.43- सर्वाधिक प्राचीन अवशेष किस धर्म से संबंधित है?

उ.- बौद्ध धर्म से।

प्र.44- बुद्ध के उपदेश की भाषा कौन सी थी ?

उ.- पाली।

प्र.45- विश्व के कितने देशों में बौद्ध धर्म है ?

उ.- लगभग 56 देशों में।

प्र.46- सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में बौद्धों का प्रतिशत है?

उ - 0.07%

प्र.47- हाल ही में विश्व धर्म संसद द्वारा दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धर्म किसे चुना गया?

उ.- बौद्ध धर्म को।

प्र.48- बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांत क्या है ?

उ.- सत्य, अहिंसा एवं स्वतंत्रता।

प्र.49- श्रीलंका के किस क्रिकेट खिलाड़ी ने बौद्ध धर्म अपनाया ?

उ.- सनथ जयसूर्या।

प्र.50- हिंदू राष्ट्र होने के बावजूद भी किस देश में बौद्धों की जनसंख्या तेजी से बढ रही है ?

उ.- नेपाल में।

प्र.51- राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले का जन्म दिवस कब मनाया जाता है ?

उ.- 11 अप्रैल को।

प्र.52- जोतिबा फुले को ब्राह्मण मित्र की बारात से अपमानित हो क्यों लौटना पड़ा ?

उ.- शूद्र (माली) होने के कारण।

प्र.53- ज्योतिबा फुले ने शूद्रों के पिछड़ेपन का मूल कारण किसे माना ?

उ.- अशिक्षा को।

प्र.54- ज्योतिबा फुले की पत्नी का क्या नाम था ?

उ.- सावित्री बाई फुले।

प्र.55- गुलामगिरी पुस्तक के लेखक कौन है ?

उ.- ज्योतिबा फुले।


प्र.56- सावित्री बाई फुले का जन्मदिवस कब मनाया जाता है  ?

उ.- 03 फरवरी को।

प्र.57- ज्योतिबा फुले ने महाराष्ट्र में शूद्र और महिलाओं हेतु कितने विद्यालय खोले ?

उ.- 18.

प्र.58- देश की प्रथम महिला शिक्षिका कौन थी ?

उ.- सावित्री बाई फुले।

प्र.59- सावित्री बाई पर ब्राह्मण कीचड़ क्यों फेंकते थे ?

उ.- क्योंकि वे लड़कियों को पढाने को पाप मानते थे।

प्र.60- सत्य शोधक समाज की स्थापना किसने की ?

उ.- ज्योतिबा फुले ने।

प्र.61- भीमा कोरेगाँव युद्ध कब हुआ ?

उ.- 01 जनवरी, 1818 को।

प्र.62- भीमा कोरेगाँव युद्ध किन-किन के मध्य हुआ ?

उ.- पेशवा (ब्राह्मण) और महार बटालियन के मध्य।

प्र.63- भीमा कोरेगाँव युद्ध में विजयी कौन हुआ ?

उ.- महार बटालियन।

प्र.64- पेशवा के 25000 सैनिकों के मुकाबले कितने महार सैनिक लड़े ?

उ.-500.