मंगलवार, 7 जून 2022

मध्य प्रदेश की यात्रा 🚉 और दीनानाथ की शादी।

       M.F.A. (Master of Fine Art) की पढ़ाई के दरम्यान मध्य प्रदेश, शक्तिनगर, सिंगरौली तो बहुत घुमना हुआ था। पढ़ाई समाप्त होने के उपरांत कई बार निर्णय हुआ लेकिन कोरोना और कई सारी  वजह से दोबारा नहीं जा पाए। अचानक से 18 May 2020 को दीनानाथ कुशवाहा जी का व्हाट्सएप पर मैसेज आता है। अमूमन बहुत कम मैसेज भेजने वाले दीनानाथ  जी का मैसेज📨 आना हमको कुछ खास लगा। जब मैसेज खोला पता चला कि उनकी शादी 31 मई को है।


      उनके द्वारा कहना भाई साहब जरूर आना है यह जो शब्द हैं ना भाई साहब मुझे खींच कर के 2015 में लेकर चला गया। जब दीनानाथ जी से पहली मुलाकात बीएचयू के प्रवेश परीक्षा के दरम्यान हुई थी। उसके बाद से लगातार दो साल का हमारा सफर साथ ही बीता क्योंकि हमारे साथ ही वो भी काशी विद्यापीठ, वाराणसी से अपनी पढ़ाई पूरी किये। जब भी कभी मिलते थे उनके संबोधन का पहला शब्द यही होता था:- भाई साहब आज भी जब उसने भाई साहब कहा तो मैं चाह कर भी इनकार नहीं कर सका और पटना से सिंगरौली के लिए ट्रेन में टिकट कटा लिया।



     ट्रेन में मेरे जो सहयात्री थे वह बिहार के कोसी प्रमंडल से आते थे और बिहार में कोसी नदी और बाढ़ का तो चोली-दामन का साथ है हर साल आना ही है। बिहार में बाढ़ की विभीषिका किसी छिपी नही है। फिर भी कुछ ऐसी बातें जो कि शायद आपको पता नहीं रहती हो। पूरी रात वो बाढ़ से उत्पन्न समस्याएं और उसके समाधान वो कैसे करते हैं उसके बारे में चर्चा करते रहें। मुझे यह सुनकर आश्चर्य हो रहा था कि ये लोग प्रत्येक साल इतनी सारी समस्याओं को झेलते हैं। उनकी बाते चलती रही और सुबह में ट्रेन ससमय तो नहीं लेकिन 07:30 AM तक मुझे सिंगरौली स्टेशन छोड़ दी। ज्यो ही स्टेशन के बाहर निकले सबसे पहले सामना स्वयं के नाम यानी  विश्वजीत नाम की बस से हुआ और यात्रा की शुरुआत भी इसी बस से हुईं।


      During the journey of Madhya Pradesh, as soon as he came out of Singrauli station, he first encountered a bus named after himself i.e. Vishvajeet and the journey also started with this Bus.

      08:00 AM में हम बस में बैठे और बस 09:35 AM में खुली। बस जो थी वह मेरे नाम की थी मेरी नहीं थी। इस पर क्या लिखें ? बस इतना समझ लीजिए कि इतने देर के उपरांत भी आधे से ज्यादा सीटें खाली थी।


       लगभग 10:30 तक हम मध्य-प्रदेश के नवानगर, अमलोड़ी मोड़ के पास आ गए थे। यहां से दीनानाथ जी के घर की दूरी लगभग 03 किलो-मीटर थी और जाने की कोई व्यवस्था नही थी। ऐसे दीनानाथ जी अपने छोटे भाई का नंबर मुझे भेजे और बोले कि वह अभी बाजार में ही है आप को लेकर आ जायेगा। जब मैंने उन्हें फोन किया तो वो बोले कि बनारसी पान दुकान के पास आ जाइए। दिनानाथ जी के घर जाने से पूर्व मिठाई की दुकान से कुछ मिठाइयां लिए और उसी से बनारसी पान दुकान का पता पूछा तो बोला कि सीधे चले जाइए आगे आपको बनारसी पान दुकान दिख जाएगा। हम सीधे आगे बढ़ते गए चौरसिया पान दुकान तो दिखा लेकिन बनारसी नहीं दिखा। चलते-चलते पूरा बाज़ार खत्म हो गया लेकिन हमें बनारसी पान☘️ नामक दुकान नहीं दिखा। हम मन ही मन सोच रहे थे कि पता (Addersh) कोई अच्छे दुकान का देता है पान दुकान का पता मैं पहली बार सुन रहा था। हमने उन्हें अंतिम में कॉल किया और पास में मौजूद Hitchai एटीएम का लोकेशन बताया तब वह वहां पर आए आज मुझे लेकर घर की ओर प्रस्थान किए। दिनानाथ जी अपने घर के बाहर बहुत ही सुंदर तरीक़े से दिल💓 के अंदर दिनानाथ संग आशा लिख रखें थे मैं स्वयं को उसकी फोटो खींचने से नही रोक सका।



        दीनानाथ की शादी में जैसा हम सोच रहे थे कि ज्यादा कलाकार तो नहीं आए थे लेकिन बनारस से रमेश भैया जो कि वरिष्ठ कलाकार हैं वो आए थे और वे आलेखन कला में निपुण थे। नाश्ता करने के उपरांत तुरंत खाना आ गया क्योंकि खाना खाने का समय हो चला था। शाम में हम और रमेश जी दिनानाथ जी के गांव घुमने गए। गांव में बमुश्किल ईटों से बने मकान थे ज्यादातर घरे मिट्टी से निर्मित की गई थीं। मेरे लिए तैयार अनुपम दृश्य था। जब आप शहरो में घूमते हैं तो आपको दुर्गा माता, शंकर भगवान, गणेश भगवान, आदि। देवी-देवताओं के मंदिर मिलेंगे लेकिन यदि आप गांव का परिभ्रमण करते हैं तो आपको जिन बाबा, गोरिया बाबा, गुगुल बाबा, सती माई, इत्यादि। भगवान मिलते हैं। ऐसे ही दिनानाथ जी के गांव में भी मुझे श्री ठाढ़ा बाबा मन्दिर दिखाई दिया।



      रमेश जी ने रास्ते में मुझे बताया कि यहां पर हनमना बहुत अच्छा एवं सस्ता मिलता हैं। हनमना शब्द मैं पहली बार सुन रहा था उनसे पूछा कि यह हनमना क्या होता हैं? तब उन्होंने कहा कि चलिए ना आपको खिलाते हैं। वह मुझे एक सब्जी की दुकान पर ले गए और पूछा कि हनमना कैसे हैं? 
सब्जी वाले ने कहा ₹5 किलो।  
मैं सोच रहा था कि इन सारी सब्जियों में हनमना किसे कहते हैं ? सब्जीवाले से मैंने पूछा कि इनमें से हनमना कौन है ? 
     वह मेरी बातों पर ध्यान दिए बिना एक तरबूज़ 🍉 उठा कर तौलने लगा मैं समझ गया कि यहां पर तरबूज को हनमना बोलते हैं ऐसे हमारे यहां इसे लालमी कहते हैं। जैसा रमेश जी बताए थे हनमना/ तरबूज़/लालमी🍉 ताजा एवं स्वादिष्ट था।

    दीनानाथ जी के घर शादी की विधि शुरू हो चुकी थी लेकिन फोटोग्राफर का अता-पता नहीं था। दिनानाथ जी परेशान हो रहे थे उसको फोन किए जा रहे थे वह बार-बार सांत्वना दे रहा था कि आ रहे हैं, आ रहे हैं। मुझसे ये दृश्य देखा नही गया और कहां की हम फोटो खींच दे ? हम अपने साथ कैमरा भी  लेकर लायें हैं। ऐसी स्थिति में भला मना कौन करता है। उन्होंने तुरंत हामी भर दी। दीनानाथ जी के घर वालों से मेरा पहला सामना एक फोटोग्राफर के तौर पर हुआ ऐसे वह पहले यह बता चुके थे कि उनका एक दोस्त प्रोफेसर है और वह आ रहा है। उनकी शादी में बाहर से दो ही दोस्त आए थे हम और रमेश जी। हम तो उनकी नजर में फोटोग्राफर बन गए थे और जो बचे वह प्रोफ़ेसर। कहा भी जाता है ना कि पद के अनुसार ही किसी व्यकित को प्रतिष्ठा भी मिलती है। कुछ ऐसा ही मेरे साथ उस दिन से शुरू हुआ और शादी के बीतने के दिन तक चला। हकीकत का सामना तब हुआ जब रमेश जी शादी के बाद बनारस चले चले गए थे और मैं माडा की गुफाओं का भ्रमण करके आया। उन्हें बहुत अफसोस यह जानकर हुआ कि फोटोग्राफर ही प्रोफ़ेसर है। मैंने कहा कि कोई भी कार्य कोई भी व्यक्ति कर सकता है और किसी भी व्यक्ति को उसके कार्य को देखकर अपना व्यवहार नहीं बदलना चाहिए। ऐसे मेरे साथ गनीमत यह थी कि दीनानाथ जी सभी को यह बता रखे थे कि मुझे फोटोग्राफी📸 में नेशनल अवार्ड भी मिल चुका है जिस वजह से थोड़ी बहुत मान सम्मान भी मिलती रही थी। 

      खैर अब कहानी को आगे बढ़ाते हैं। नजदीक की बारात हमेशा लेट निकलती है ऐसा देखा और सुना था लेकिन जब यहां से बारात निकलने में विलंब हो रहा था तो मैं भी सोचा कि शायद बरात नजदीक ही जाने वाली हो। लेकिन बाद में पता चला कि बरात तो छत्तीसगढ़ जा रही है। जाने में लगभग 02 से 03 घंटे लग सकते हैं। शाम के 07:00 बजे या इसे रात कहना ज्यादा उचित होगा बरात निकली। बस में मेरे सहयात्री रमेश जी थे। बराती बनने  से पूर्व वो थोड़ी सी बिहार में नहीं मिलने वाला और UP & MP में जबरदस्त तरीके से मिलने वाला पेय🥂 ले लिए थे। मुझे महसूस तो हो ही रहा था फिर भी उन्होंने थोड़ा खुद को संभालते हुए कहा कि - बुरा मत मानियेगा मैंने थोड़ा सा पी लिया हैं। 
मैंने कहा - कोई बात नहीं। 
फिर उन्होंने कहा - देखिए बरात में क्या भरोसा दीनानाथ जी व्यवस्था करें या ना करें। मैंने तो पहले ही अपना व्यवस्था कर लिया हैं। फिर उन्होंने कहा - देखिए यह एक बुरी चीज़ नही हैं। 
मैंने कहा:- हां, बिल्कुल नहीं है।
उसके बाद पूरे रास्ते वो ड्रिंक करने के फायदे और ना करने के नुकसान गिनाते रहें। अंत में उन्होंने कहा कि देखिए एक कलाकार को थोड़ा-बहुत नशा भी करनी चाहिए ताकि वह अपने कार्य को अच्छे से सम्पन्न कर सके। उनकी ऐसी ही ज्ञानवर्धक बातें तब तक चलती है जब तक की बस एक सुनसान जगह पर ना रुकी। उस समय रात के 11:00 बज चुके थे पता चला कि हम लोग बहुत दूर गलत रास्ते पर निकल आए हैं फिर क्या था वहां से बस को मोड़ा गया और फिर जितना दूर हम लोग आगे निकले थे वापस लौटे। लगभग सभी को भूख भी लग चुकी थी। एक मार्केट को देखकर बस को रोका गया उस मार्केट में दुकान के नाम पर दो-तीन छोटी-छोटी गुमटियां थी और शायद सुबह का बना हुआ समोसा एवं कुछ पकौड़ियाँ रखी हुई थी। भूखे को तो बस भोजन चाहिए तुरंत ही वह समोसा एवं पकौड़ियाँ खत्म हो गई। मैंने भी कुछ पकौड़ी एवं स्प्राइट लिया। बस में वापस लोग बैठे और बस चल दी। बस के चलने के कुछ देर उपरांत पता चला कि दो-तीन व्यक्ति तो वहीं पर छूट गए हैं। लगभग 12 बज चुका था,  यहां पर बस के ड्राइवर ने नीतिशास्त्र का उपयोग किया और बस निरंतर चलाता रहा है क्योंकि 2-3 के चक्कर में यहां पर 60-70 क्यों परेशान हो। कम से कम जो लोग बस में हैं वो तो लड़की के घर पहुंच जाए। फोन कॉल से पता चला कि दूल्हे की गाड़ी तो 02 घंटे पहले ही वहां पहुंच चुकी है और बारातियों का इंतजार किया जा रहा है क्योंकि लगभग सभी बराती उसी बस में थे। बस अपनी पूरी गति से आगे बढ़ती जा रही थी हर किसी को यकीन था कि अब सीधे लड़की के द्वार के पास ही बस रुकेगी। लेकिन फिर बस के ड्राइवर को अचानक से ब्रेक लगाना पड़ा सभी लोग मुँह के बल गिर पड़े। पता चला कि किसी ने बस के आगे एक स्कॉर्पियो खड़ी कर दि हैं। सहसा किसी को यकीन ही नहीं हुआ की यह क्या पागलपन है। उस स्कॉर्पियो से दो-तीन लोग उतरे और बस के ड्राइवर को गाली देते हुए बस में चढ़े। ये वही लोग थे जो वहां पर छूट चुके थे, जहां बस रुकी थी। किसी स्कॉर्पियो की मदद से यहां तक पहुंचे थे। बहुत देर मान-मनोवल के बाद उन्हें बस में बैठाया गया और फिर बस खुली। अभी बस कुछ ही दूर चली थी कि फिर एक बार बस को रोका गया अबकी बार वजह कुछ और थी क्योंकि सामने देसी दारु की दुकान दिख रही थी सब कुछ स्पष्ट था। जिसको जितना खरीदना था खरीद लिया और फिर बस में बैठे। अबकी बार जो बस खुली वह सीधे वहां रुकी जहां पर DJ उन बारातियों का इंतजार कर रहा था जो कि नागिन धुन पर कमर हिलाने वाले थे। उस समय तक लगभग 01:00 बज चुका था। सभी की इच्छा थी कि जल्द से जल्द बरात को लेकर द्वार पर चला जाए क्योंकि जयमाला, द्वार पूजा, गुरहथनी, इत्यादि विधियां सम्पन्न करानी थी। लेकिन बराती कहां मानने वाले थे वह तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में आसानी से उपलब्ध पेय पदार्थों🥂 को लेने के बाद एक अलग ही जोश में थे। भले उन्हें भोजपुरी गानो के अर्थ समझ में नहीं आएं लेकिन रात भर ढील दs पर डीजे के पीछे लगातार ठुमके लगाये जा रहे थे। अचानक से किसी को याद आया कि डीजे वाला तो नागिन धुन बजा ही नहीं रहा है। नागिन धुन जैसे ही शुरू हुआ सभी का जोश और दुगुना हो गया और सभी ऐसे उछलने लगे जैसे की तपती दोपहरी में पनिया सांप🐍 को रोड पर छोड़ दिया गया हो। कुछ साँप तो रेंगते-रेंगते सड़क पर से नीचे खेतों में पड़े मिले। क्योंकि मुझे दीनानाथ की शादी की फोटोग्राफी भी करनी थी इसीलिए ज्यादा देर वहां नहीं व्यतीत किए और दो चार ठुमके के बाद ही फिर हम अपने कार्य में लग गये। 
        द्वार पूजा के बाद जयमाला शुरू हुआ। हम जयमाला की फोटोग्राफी कर रहे थे तभी एक साँप सॉरी एक व्यकित मेरे पास झूमते हुए आया और कैमरा मांगने लगा। सहसा मुझे लगा की यह कौन हो सकता हैं। तभी वीडियोग्राफर ने बताया कि यही तो कैमरामैन है। मुझे उसकी स्थिति देख ऐसा लग रहा था कि इससे तो फोटो नहीं click हो पाएगा। लेकिन उसकी जिद्द थी कि जयमाला की फोटो वही click करेगा। मैंने उसका सम्मान करते हुए कैमरा उसे दे दिया और अपने बैग से अपना कैमरा निकाल कर फोटोग्राफी करने लगे। जयमाला के बाद दुल्हन का क्लोज अप शूट हुआ। क्लोज अप के दरमियान भी वह फोटोग्राफर मौजूद रहा। रात के 02:30 हो रहा था। सभी लोग विवाह की तैयारी करने लगे मैंने सोचा कि थोड़ा सा खा लेना चाहिए जब खाने की ओर बढ़े तो देखा कि लगभग आइटम खत्म हो चला था फिर भी खाना परोसने वाले ने थोड़ा बहुत जुगाड़ करके दे ही दिया। रात में भूखे नहीं रहना चाहिए इसलिए मैंने भी थोड़ा अन्न ग्रहण कर लिया। 
       फोटोग्राफर का नशा थोड़ा कम हो चला था और उसे नींद भी आ रही थी वह बोला कि भैया आप फोटो click कर कीजिए हम सोने जा रहे हैं। मैंने कहा:- क्यों आप Photo Click नही करेंगे ? वह बोला:- मुझे नींद आ रही है आप ही Shoot कर दीजिए। मैंने कहां:- ठीक है!!! दीनानाथ जी के लिए यह भी सही। 
      बिहार में जो शादी की विधी संपन्न होती है उससे पूरी तरह से अलग छत्तीसगढ़ में मुझे देखने को मिल रही थी। मेरे लिए सब कुछ नया था। शादी की विधि चूंकि लेट शुरू हुई थी इसीलिए सुबह लेट तक चलती रही। विदाई होते-होते दोपहर हो गया। 
         अगले दिन हम माडा की गुफाएं घुमें और 03 जून को काशी विद्यापीठ परिसर गए। वहां पर सभी सर से मिल एवं एनटीपीसी का परिसर घूम 2017 की सारी यादें तरोताजा हो गई। रेणुकूट से पटना के लिए मेरी ट्रैन रात में 08:55 में थी। शाम के 05:00 बजे तक हम स्टेशन परिसर में थे। परिसर में बैठे-बैठे लगभग ये जो 04-05 दिनों की यात्रा संपन्न हुई थी उसका विश्लेषण करते रहें।

बाजत बाs भोजपुरी में गन्दा गाना



बाजत बाs भोजपुरी में गन्दा गाना


बाजत बाs भोजपुरी में अइसन-अइसन गाना। 

राह चलन कठीन भइल, भागत बाड़ी जनाना।।  


केहु के बहिन त केहु के बेटी के नाम गावत बा लो।

आ कामाये खातिर भोजपुरी के, माटी में मिलावत बा लो।।


के हु स्टार तs के हूँ सुपर स्टार कहाई लोग। 

ओही खातिर गंदा आ अश्लील गाना गाई लोग ।।


साफ-सुधरा गावे वाला इज्जत आपन बचावे ले

बेपर्दा होके गावे वाला फर्चूनर दउरावेले ।।


भोजपुरी के इज्जत सगरो निलाम ई कइले। 

मान-मरयादा धूल में मिलल, अइसन गाना गइले।।


 शादीयो विवाह में गंदा गाना बाजेला।

आ लोगो कम नइखे, एही पर निर्लज होखे नाचेला।।

 

देखी समाज के कइसन ई रीत बा। 

पुछेब तs खराबे कहि हन, मन के भीतर प्रीत😍 बा।।


तबे तs आरकेष्टा में डाड़ ई चमकावे ले। 

आ घरे आ के भोजपुरी के अश्लीलता पर गरिआवे ले।।


ई दोहरा चरित्र से समाज होता भ्रष्ट बा। 

आ सिंगर का करिहें, पब्लिक जे मांगत बाs 

उ देवे में मस्त बा ।।


रोजे विवाद बाs गाना भोजपुरी पर-2 

काहे बाजे ला गाना होली में चोली पर।।


गावे वाला दोषी बाड़े तs रउरा कवन भगत बानी। 

 उ गाना निकालस तs रउरा काहे सुनत बानी।।


गंदा गाना गावला से बेटी बहिन ताबाह बाड़ी।

स्कूल-कॉलेज गइल मुश्किल गइल।

अइसन आज रोजगार भइल ।।


ढेला आ टेम्पू में इहे गाना बाजेला।

गाँव के ट्रेक्टर तs साउन्ड बढ़ा के भागेला।। 


पूजा होखे, तिलक होखे, चाहे होखे भासान। 

ऐपर नइखे कौनो प्रशासन के कामान।।


जेने देखी ओने त्राही-त्राही बाटे गाना से।

रउरा दरद का जानव, जा के पुछी राह चलत जनाना🤦🏻‍♀️ से।।


 केतना शरमिंदा होली, मुंह छीपा के भागेली। 

केकरा से उ दरद कहस, हनुमान जी के भाखेली।।


अभी समय बा चेत जाई, ना त भोजपुरी के सत्यानाश बा।

अइसन गंदा दौर चलल बा, बिहार के आन पर आंच बा।।


 गावे वाला के गावे दी, सुनल रउरा बन्द करी। 

तनिका रउरा टाइट होखी, सबन के रुउवा टंच करी।। 


फेर देखी शारदा सिन्हा, भरत शर्मा के गाना होखी। किशोर रफी के गाना बाजी, भोजपुरी सिरमौर होखी।।


 साफ-सुधरा भोजपुरी होखे, हमरो इ अरमान बा।

हे भोजपुरिया समाज आज, अमित के प्रणाम बा🙏🏻।।


अमित रंजन सिन्हा✍🏻

दहेज लोभी के साथे, बेटी मत करीं विदाई।

श्रीगणेशाय नमः 🙏🏻



दहेज लोभी के साथे, बेटी मत करीं विदाई 




लड़का देखे गइनी हम त भोपाल। 

साथे रहेले साढू भाई नाम रहे गोपाल

 

भूख पिआस से तड़पत पहुच गईनी दुआरी 

घोपड़ास भाई के देख के इयाद आइल इयारी

 

जाते-जाते स्वागत में घोपड़ास भाई भेटइले। 

दौउर के लगे अइले, गले से लग गइले 


दु आदमी के बीच में चार गो बिस्कुट आइल 

दु गो मरले घोपड़ास भाई, दिमाग चकराइल 


एगो बिस्कुट खा के जान में जान आइल। 

एक ही गो हमरा साढू भाई के भेटाइल 


हे भगवान!!! कइसन आज हमरा घर भेटाइल बा

कहले लीस्ट दे दींहीं, घर में सब कुछ टाइट बा 


सौख पुरावेला दहेज लेवे के भाखल बा।

ना तs रउरा देख लीं, सगरी समान घर में राखल बा


नगद दे दी दस लाख, फर्चूनर एगो गाड़ी 

लइका बाड़ा शौखीन ह, बढ़वले रहेला दाढ़ी


 M.Tec. के पढ़ाई क के, जॉब में घोराइल बा। 

अपने बल पर पढ़ाई कइलस, बहुते पेराइल बा


कहनी गरीब बानी कल्यान कुछ करीं। 

लड़की हमार सुनर बिया, कही त गोड़ राउर धरी


तले परदा हटल मलकीनी दउर के अइली

हाथ मे काग़ज अउरी पेन के धरइली


कहली जलदी लिस्ट बनाई, तबे चाय पिआएब 

चक्कर-पकर मत करी, ना त घर से बहरी जाएब 


खाली हाथ विवाह करे में, सरम नाहीं आवेला 

आपन अवकात देख केनु बेटी जनमावेला 


साढू भाई भड़क गइले, भगले घर के बहरी

चली एजा बिआह ना होई, बेहुद्दा बाडन सन ई 


 दु गो रूम बनइले ना फर्चूनर इनका चाही 

जाई कवनो गदही से, बेटा आपन बिहाई 


चल देहनी ओजा से, करेजा गइल टुट 

रास्ता में भेटा गइले हमरो सार के पुत  


कहले फुफा जी ऐजा कंहा से अइनी 

अच्छा भइल उ भेड़ा के आपन बेटी नाही धरइनी


काम कुछुओ उ करे ना, खाली टीक-टोक बनावेला 

सतरे गो रोटी आ तेरे गो, फारावढा उड़ावेला


एक रुपिया के इनकम नइखे, कैमरा ले के घुमेला

सुअर कटिंग बाल कटवलस, पाड़ा अइसन झुमेला


ओकर हीस्ट्री हमरा से पुछती, हम पुरा बतइती

आ उ बेटा बेचवा के, भर मतलब गरीअइती 


दु-दु गो विवाह त सागाई के बाद टुटल बाs

जिनकर विवाह भइल, बुझी भाग उनकर फुटल बाs


एगो त भूखाइल रहनी, ऐने धक-2 करेजा करे 

जुग-जमाना देख के भझ्या भीतरे मन लागल डरे

 

सब कुछ जान बुझ के, विआह सेट रउरो करब

बेटी के बाप बानी, कौनो के गोड कबो ना परब

  

बेटी घर के इज्जत होली, इज्जते से कहीं जइहे

दहेज लोभियन के साथे, बेटी मत करेम विदाई 


दहेज बनल कैंसर बा, एतना जल्दी ना जाई

लोग दहेज खातिर बहु के, देता जाराई


एही से सतर्क रही, लोभी परिवार के छोड़ी 

साफ-सुधरा परिवार होखे, अमित ओहिजा रिश्ता जोड़ी


जय भोजपुरी - जय बिहार


अमित रंजन सिन्हा✍🏻

सोमवार, 6 जून 2022

डाक विभाग📨 द्वारा जारी डाक टिकट। Postage stamp issued by the Department of Posts.

       भारत सरकार के डाक विभाग📨 द्वारा विभिन्न चित्रों पर जारी किया गया डाक टिकट।


    यह लेख✍️ सभी कला प्रतियोगी छात्रों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। कृपया आप सभी लोग इसको एक बार जरूर अध्ययन करें।🙏



तीन संगीतज्ञ (Three Musicians) पाब्लो पिकासो के द्वारा निर्मित कलाकृति।


भारत की मोनालिसा, बनी-ठनी, राधा-किशनगढ़, इत्यादि नामों से प्रसिद्ध निहालचंद्र द्वारा निर्मित कलाकृति।


नंदलाल बोस को समर्पित डाक टिकट।


यूनेस्को की 25वी जयंती पर निर्मित अजंता की एक कलाकृति।



केरल के प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा पर संबंधित डाक टिकट।


पाश्चात्य कलाकार माइकल एंजेलो की कलाकृतियों पर आधारित डाक टिकट।


भारतीय लोक कला को अपने चित्रों का आधार बनाकर चित्रित करने वाले बंगाल के सुप्रसिद्ध चित्रकार यामिनी राय पर समर्पित डाक टिकट।


शैलोज मुखर्जी की कलाकृति पर निर्मित डाक टिकट।


विश्व कवि, महान गुरु, लेखक, नाटककार एवं चित्रकार रविंद्रनाथ टैगोर जी को समर्पित डाक टिकट।


चोल कालीन प्रसिद्ध मूर्तिकला नटराज पर समर्पित डाक टिकट।





बाल दिवस (Children Day) पर बना भारतीय डाक टिकट।



India 1973 इंडियन मिनिएचर पेंटिंग कथक डांस पर आधारित डाक टिकट।


विश्व कवि, महान गुरु, लेखक, नाटककार एवं चित्रकार रविंद्रनाथ टैगोर जी की कलाकृति पर आधारित डाक टिकट।


चित्रकार आसित कुमार हलदर जी को समर्पित डाक टिकट।


बंगाल के सुप्रसिद्ध चित्रकार गगनेंद्रनाथ टैगोर पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


कालिदास की प्रमुख कृति अभिज्ञान शकुंतलम पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


भारतीय लघु चित्रकला पर आधारित डाक टिकट। (Postage Stamp on Indian Miniature Painting.)


कालिदास की सुप्रसिद्ध रचना मेघदूत पर आधारित डाक टिकट। 


पहली आधुनिक भारतीय महिला चित्रकार अमृता शेरगिल के चित्र पर आधारित डाक टिकट। 



बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी चित्रकला पर आधारित डाक टिकट।


बम्बई आर्ट सोसाइटी पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


नंदलाल बोस की कलाकृति प्रतीक्षा पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


के.जी. सुब्रमण्यम की कलाकृति खिड़की पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


बाल गंगाधर तिलक का नारा स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


मकबूल फिदा हुसैन की कलाकृति मकड़ी पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


हेमंत पौष कलाकृति पर आधारित भारतीय डाक टिकट।


Ajanta Panel की कलाकृतियों पर आधारित डाक टिकट।


आसित कुमार हलदर की कलाकृतियों पर निर्मित डाक टिकट।


भगवान बुद्ध की कलाकृतियों पर आधारित डाक टिकट।


ग्रीष्म ऋतु ज्येष्ठ शीर्षक की कलाकृति पर निर्मित डाक टिकट।


बसंत : रागनी बसंती शीर्षक कलाकृति पर निर्मित डाक टिकट।



1857 के वीरों के ऊपर निर्मित डाक टिकट।


भारतीय चित्रकार रज़ा की कलाकृति पर निर्मित डाक टिकट।


संत अलायसियस कॉलेज चैपल चित्रकला पर आधारित डाक टिकट।


Indian Elephant पर आधारित डाक टिकट।


अभिसारिका अवनींद्रनाथ टैगोर की कलाकृति पर आधारित डाक टिकट।


भारतीय लघु चित्रकला (Indian Miniature Painting) पर आधारित डाक टिकट।





शौक़ बहराइची (Shauk Bahraichi)


 बर्बाद गुलिस्तां करने को, 

बस एक ही उल्लू काफ़ी है।

हर शाख पे उल्लू बैठें हैं, 

अंजाम ऐ गुलिस्तां क्या होगा।


      भ्रष्ट नेताओं और भ्रष्टाचार में डूबे बेइमानों पर कटाक्ष करने के लिए इस शेर का अक्सर इस्तेमाल किया जाता है पर बहुत कम लोग जानते हैं कि इस शेर को लिखने वाले शायर 'शौक़ बहराइची' है। 

      शौक़ बहराइची का जन्म 06 जून 1884 को अयोध्या के सैयदवाड़ा में हुआ था। इनके बचपन का नाम रियासत हुसैन रिज़वी था जो बाद में बहराइच में रहने के कारण बहराइची हुआ। उन्होंने अपनी शायरी को अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध के तौर पर इस्तेमाल किया। उन्होंने ग़रीबी में भी शायरी से नाता जमाए रखा और ‘शौक़ बहराइची’ के नाम से शायरी के नए आयाम गढ़ने लगे, जो 13 जनवरी 1964 में हुई उनके इंतकाल तक बदस्तूर जारी रहा।  

       उनका मशहूर शेर आज भी भ्रष्टाचार की कलई खोल देता है। 'शौक़ बहराइची' आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शायरी हमारे जुबां पर हमेशा जिंदा रहेगी।

रविवार, 5 जून 2022

चित्रकला एवं मूर्तिकला (Painting and Sculpture)

 चित्रकला एवं मूर्तिकला 


1. केरल के राजा रवि वर्मा प्रसिद्ध थे ? - चित्रकला 

2. नन्दलाल बोस ने किस क्षेत्र में ख्याति अर्जित की ? - चित्रकला 

3. चित्रकला की मुगल शैली का प्रारम्भ किया था - हुमायूँ ने 

4. उस्ताद मंसूर खां किस मुगल शासक के शासन काल के प्रसिद्ध चित्रकार थे ? - जहाँगीर 

5. मुगलकालीन शासकों में किस शासक का काल को 'चित्रकारी का स्वर्णकाल' कहा जाता है ? - जहाँगीर 

6. किस मुगल शासक को चित्रकला का महान पारखी कहा जाता है ? - जहाँगीर 

7. मुगल शैली के विश्वप्रसिद्ध चित्र 'बैलगाड़ी' का चित्रण किसने किया है ? - अबुल हसन 

8. भारतीय चित्रकला में पुनरुज्जीवनवादी विचारधारा का प्रवर्तक कौन थे ? - जैमिनी राय

9. 'भारतमाता' नामक प्रसिद्ध पेंटिंग के चित्रकार कौन थे ? - अवनींद्र नाथ टैगोर

10. किसके शासनकाल में अजंता की गुफाएँ निर्मित की गयी ? - गुप्त 

11. अजंता चित्रकारी का विषय वस्तु निम्न में से किससे सम्बंधित है ? - बौद्ध धर्म 

12. अजंता चित्रकारी में क्या निरूपित किया गया है ? - जातक कथा

13. 'औरत' नामक चित्र का चित्रांकन किसने किया है ? रविंद्रनाथ ठाकुर 


14. 'काला चाँद' नामक चित्र का चित्रांकन किसने किया है ? - सतीश गुजराल 

15. लोक चित्रकला की मधुबनी शैली भारत के किस राज्य में प्रचलित है ? - बिहार 

16. तीन संगीतज्ञ किसकी प्रसिद्ध पेंटिंग है ? - पिकासो


 17. विख्यात चित्रकारी 'द लास्ट जजमेंट' किस चित्रकार की है ? माइकल एंजलो 

18. 'लास्ट सफर' एक प्रसिद्ध रिनेसस चित्रकारी किसकी श्रेष्ठ कृति है ? - लियोनार्डो द विन्ची 

19. मोनालिसा का सुप्रसिद्ध चित्र किसने बनाया था ? - लियोनार्डो द विन्ची