दृश्य - 01
क्लास में बच्चे एक दूसरे पर कागज की जहाज बनाकर उड़ा रहे हैं और उनके द्वारा भयंकर शोरगुल किया जा रहा है। तभी एक मास्टर साहब धोती कुर्ता पहने और कंधों पर बैग लटकाए हुए कक्षा में प्रवेश करते हैं। उनके आते ही सब बच्चे शांत होकर बैठ जाते हैं और वह मास्टर साहब बच्चों को संबोधित करते हुए कहते हैं -
मास्टर साहब - सभी छात्र एवं छात्राओं की ओर देखकर हल्की मुस्कान के साथ कहते हैं - GOoD MorninG Students.
सभी बच्चे एकसाथ - Gooood Morniiing Siiir 🙏🏻. कहते हुए अपने हाथ ऊपर कर लेते हैं।
मास्टर साहब - ठीक हैं!!!, ठीक हैं!!! हाथ निचे करो।
फिर मास्टर साहब अपने कंधे पर का थैला सामने पड़े टेबल पर रखते हैं और उसमें से एक किताब निकालते हैं जो कि एकदम से पीली पड़ गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि शायद इसी किताब से मास्टर साहब भी स्वं अपनी पढ़ाई पूरी किये होंगे। पुनः एक बार अपना चेहरा बच्चों की ओर करके बोलते हैं -
तो बच्चों आज हम पढ़ेंगे - "गुरुत्वाकर्षण का नियम" "Law of Gravitation"
कौन सा गाड़ी सर??? कुछ बच्चे एक साथ पूछते हैं।
गाड़ी नहीं छात्रों ग्रेविटी यानी की गुरुत्वाकर्षण।
क्लास का एक शरारती बच्चा उठकर उनसे पूछता है - कौन सा आकर्षण सर??
मास्टर साहब को गुस्सा तो आता है लेकिन उसे मुस्कान में बदलकर फिर से बताते हैं - आकर्षण नहीं बचवाँ गुरुत्वाकर्षण, गुरुत्वाकर्षण।
लेकिन बच्चे कहां मानने वाले थे फिर से वही क्वेश्चन, सर!!! हम भी तो वही पूछ रहे हैं कौन सा आकर्षण?? गुरु का या.....
बच्चे अपनी बात पूरी करते हैं उससे पहले मास्टर साहब गुस्से में एकदम से चिल्लाते हुए बोलते हैं चुप एकदम चुप, कोई कुछ नहीं बोलेगा।
पूरे क्लास में एकदम Pin drop silence वाली स्थिति हो जाती है।
मास्टर साहब अपनी विजय पर मन ही मन मुस्कुराते😊 हुए किताब खोलते हैं एवं ब्लैक बोर्ड पर बड़े -बड़े अक्षरों मे लिखते हैं -
गुरुत्वाकर्षण
बच्चे भी धीरे -धीरे अक्षरों को मिलाकर पढ़ना शुरू करते हैं। गु... र. र. रु... त... वा... क.. ष... ण... गुरु तवा कषण
मास्टर साहब बच्चो को फिर से समझाते हैं - बच्चों मेरे साथ बोलो - गुरु
सभी बच्चे एक साथ जोर से बोलते हैं - गुरु
शिक्षक - तवा
बच्चे - तवा
शिक्षक - कर सन
बच्चे - कर सन
तो बच्चों एक साथ बोलो - गुरुत्वाकर्षण
सभी बच्चे एक साथ जोर से बोलते है - गुरुत्वाकर्षण
बच्चों की आवाज इतनी तेज थी की स्कूल से बाहर खेतो मे कार्य करने वाले लोग भी एक बार चौक कर स्कूल की तरफ देखने लगते हैं।
टीचर बच्चों की तरफ मुखातिब होकर उनसे प्रश्न पूछते हैं - अच्छा बताओ गुरुत्वाकर्षण किसे कहते हैं ?
सभी बच्चे एक दूसरे का चेहरा देखने लगते हैं तभी एक होनहार सा दिखने वाला बच्चा खड़ा होता है और पूरे आत्मविश्वास से बोलता है - सर!!! सर, गुरु के द्वारा प्रदान किए गए आकर्षण को गुरुत्वाकर्षण कहते हैं।
टीचर फिर उन्हें समझाते हुए कहना प्रारंभ करते हैं - नहीं!!! नहीं!!! गुरुत्वाकर्षण का मतलब गुरु का आकर्षण नहीं बल्कि पृथ्वी का आकर्षण होता है।
एक छात्र - वह कैसे सर?
टीचर - पृथ्वी जो है ना!!! वह अपनी ओर सभी वस्तुओं को आकर्षित करती है इसी बल को विज्ञान की भाषा में गुरुत्वाकर्षण कहते हैं। जैसे तुम लोग भी किसी न किसी की ओर आकर्षित होते हो ना!!!
सभी बच्चे एक साथ - हम्म्म्म!!!
टीचर बोलना प्रारंभ रखते हैं - जिस बल के द्वारा आप किसी की ओर आकर्षित होते चले जाते हैं और तुम्हारे ऊपर जो बल कार्य करता हैं उसे भी हम गुरुत्वाकर्षण का बल कह सकते हैं। हमारी पृथ्वी भी एक चुंबक की तरह कार्य करती है एवं अपनी ओर सभी चीजों को आकर्षित करती रहती है। चाहे वह सजीव हो या निर्जीव। सजीव एवं निर्जीव का मतलब यह है चाहे वह मनुष्य हो या वस्तु।
एक छात्र बड़ी देर से उनकी बातें सुन रहा था अचानक से बोल उठता है - सर वह पार्टी भी हो सकती है क्या ?
क्योंकि सर पढ़ाने में व्यस्त रहते हैं इसलिए वह हां बोल देते हैं। उन्हें शायद यह लगा होगा की गुरुत्वाकर्षण तो हर जगह एक तरह से ही कार्य करता होगा।
अब उस छात्र का मुख्य प्रश्न उनके सामने आता है - वह कुछ सोचते हुए उनसे पूछता है सर, हमें लग रहा है कि वह गुरुत्वाकर्षण भी ना!!! हमारे नीतीसे कुमार है। जो कि कुछ-कुछ समय उपरांत पार्टियों को अपनी ओर आकर्षित करते रहते हैं।
शिक्षक जो कि अभी तक आराम से पढ़ा रहे थे छात्र की राजनीतिक समझ को देखकर अपना सर खुजाने लगते हैं। और जब उन्हें कोई जवाब नही सुझता तब अपनी किताब में लिखी गई बातों को दुहराने लगते हैं -
दृश्य - 02
सभी बच्चे डरे सहमे से शांत बैठे हैं। क्लास मे एक लम्बा चौड़ा सा आदमी हाथ मे एक लम्बी सी लाठी लिये हुये खड़ा हैं और बच्चों की ओर घूरते हुये पूछता हैं -
कौन था वो छोरा जो हमारे बगीचे मे चलने को बोल रहा था?
मास्टर साहब थोड़ा घबड़ाते हुये उन्हें समझाते हैं, नहीं-नहीं मैं तो इन्हे एक नियम समझा रहा था।
पहलवान जी मास्टर जी को घूरते हुए - समझाने के लिये मेरा ही बगीचा मिला।
मास्टर जी फिर से हिम्मत कर के पहलवान जी को समझाते हैं - देखिये हम इन्हे गुरुत्वाकर्षण का नियम समझा रहे थे की कैसे कोई चीज़ ऊपर से गिरने पर वापस धरती पर आ जाती हैं। जैसे आपके पेड़ से जब आम गिरता हैं तो धरती पर ही क्यों आता हैं? कभी वो आकाश मे क्यों नहीं जाता?
अब पहलवान जी भी थोड़ा सोचने लगते हैं।
मास्टर साहब पहलवान जी को सोचता देखकर अपनी अप्रत्याशीत जीत की परिकल्पना करने लगते हैं और आगे बोलते हैं। जानते हैं ऐसा क्यों होता हैं??
मास्टर जी को उम्मीद थी की उत्तर उनके मन मुताबिक मिलेगा लेकिन हुआ कुछ और....
पहलवान जी कहते हैं - बिल्कुल बुझते हैं। फिर बच्चों की ओर मुख़ातिफ होकर, आम खाने वाले निचे हैं या ऊपर??
सभी बच्चे एक साथ - निचे।
पहलवान जी - तब आम कहां जायेगा
सभी बच्चे एक साथ - निचे।
मास्टर जी हार मानने वाले नहीं थे क्योंकि वो अभी-अभी BPSC का tag लेकर स्कूल ज्वाइन किये थे।
आगे बोलते हैं - अच्छा बोलिये, आप कोई मिट्टी का ढेला जब आसमान में ऊपर की ओर फ़ेंकते है तो वह निचे क्यों आता हैं, ऊपर क्यों नहीं चला जाता। यह जो मिट्टी का ढेला हैं जिस वजह से निचे आता हैं उसी वजह को गुरुत्वाकर्षण कहते....
मास्टर जी अपनी बात पूरी करते उससे पूर्व ही पहलवान जी बीच में टोंकते हुये कहते हैं -
मिट्टी का जन्मा हैं तु मिट्टी में मिल जायेगा...
सारे बच्चे भी एक साथ जोर से गाने लगते हैं -
मिट्टी का जन्मा हैं तु मिट्टी में मिल जायेगा...
आगे-आगे पहलवान जी एवं पीछे-पीछे बच्चे -
मिट्टी का जन्मा हैं तु मिट्टी में मिल जायेगा...
मिट्टी में मिल जायेगा... तु मिट्टी में मिल जायेगा...
इन पंक्तियों को सुनकर अचानक से बच्चों के अंदर देशभक्ति की भावना जागृत हो जाती है और जोर से चिल्लाते हुए कहते हैं - भारत माता की - जय।💪🏻
तभी शोरगुल सुनकर कक्षा में प्रिंसिपल साहब पहुँचते हैं वो आते तो हैं एकदम से गुस्से में क्योंकि कक्षा का शोरगुल उनके केबिन तक पहुँच चूका था लेकिन सामने पहलवान जी को देखकर एकदम से शांत होकर नमस्ते 🙏🏻 करते हुये पहलवान जी से पूछते हैं - प..ह..ल..वा..न जी आप यहां, हमारी कक्षा में। चलिए ऑफिस में चलकर बात करते हैं।
पहलवान जी फिर वही गुस्से में पूछते हैं - ई माटर कउन हैं ??? ई बच्चा सब को हमरे बगीचा में चलने को बोल रहा था।
प्रिंसिपल साहब थोड़ा हिचकिचाते हुये कहते हैं - ई BPSC से पास मास्टर हैं आज ही विद्यालय ज्वाइन किये हैं और ई इनका पहिला क्लास हैं।
पहलवान जी - इनको बता दीजिये, हमरा बगईचा कोई महतो जी का दालान ना हैं जो जेंकरा मन करें उ घुसी आवें।
प्रिंसिपल साहब मास्टर की ओर देखते हैं और कहते हैं - क्या मास्टर जी, बच्चों को क्या पढ़ा रहे थे ?
मास्टर साहब - अरे सर!!! हम बच्चों को गुरुत्वाकर्षण का नियम समझा रहे थे।
मास्टर जी कुछ बोलते हैं उससे पहले ही पहलवान जी अपनी लाठी पटकते हुए बोलते हैं - समझाने के लिये हमरे बगीचा मिला, केतना साल बाद तो पेड़ पर टिकोरा धड़ा है और अभीये से ई सब का नजर पड़ गया।
प्रिंसिपल साहब पहलवान जी को समझाते हुए कहते हैं - आरे!!! नहीं-नहीं पहलवान जी, बिना हमारे अनुमति के कोई कैसे विद्यालय से जा सकता हैं और ना ही आपके बगीचे को नुकसान पहुंचा सकता हैं।
लेकिन पहलवान जी समझने वाले नहीं थे वह फिर से उसी गुस्से में बोलते हैं - आप अनुमति की बात करते हैं ई लईका सब तs क्लास से निकल चूका था। हम इन सब को क्लास में बैठाये हैं।
अब प्रिंसिपल साहब फिर से मास्टर जी की ओर देखते हैं लेकिन मास्टर साहब हल्की आंखे बंद करके स्कूल की छत की ओर देख रहे होते हैं जैसे वहां लिखा हुआ कोई जवाब उन्हें मिल जाए। लेकिन जब उन्हें वहां भी निराशा हाथ लगती है तब बुदबूदाते हुए कहते हैं - "क्या भाई न्यूटन, तूने क्या नियम बना दिया"
अचानक से पहलवान जी के कान खड़े हो जाते हैं और जोर से बोलते हैं - "विदेशी हाथ"
मास्टर जी और प्रिंसिपल साहब एक साथ पहलवान जी को देखते हैं...
पहलवान जी लगातार बोले जा रहे थे - आजकल हर बड़े घोटालो एवं कांडो में हमें दिखता है - विदेशी हाथ।
चाहे वो कोई वस्तु हो या सेवा हर धंधे में जुड़ गया है - विदेशी हाथ।
हम क्या पहने और कौन सी भाषा बोले यह सब अब तय करने लगे हैं - विदेशी हाथ।
पहलवान जी को इतनी शुद्ध हिंदी बोलते देख प्रिंसिपल साहब और मास्टर साहब भी अचंभित होकर उन्हें देख रहे थे सभी बच्चे भी इस ना समझ आने वाली लेक्चर को सुन रहे थे। तभी स्कूल के बाहर एक बस के रुकने की आवाज सुनाई दी। प्रिंसिपल साहब ने हाथ के इशारे से मास्टर साहब को भागने का इशारा किया, मास्टर साहब भी मौक़े की नजाक़त को समझते हुये ऐसे भागे की सीधे बस की सीट पर बैठने के बाद ही रुके।
उधर पहलवान जी लगातार बोले जा रहे थे - इधर विदेशी हाथ, उधर विदेशी हाथ और अब मेरे बगीचे में भी विदेशी हाथ!!! यह कहते हुये वह मास्टर साहब का गर्दन पकड़ने के लिए उनके तरफ हाथ बढ़ाते हैं लेकिन यह क्या??? उनका हाथ तो खाली रह जाता है क्योंकि मास्टर साहब तो कब के नौ दो ग्यारह हो चुके रहते हैं।
प्रिंसिपल साहब पहलवान जी को सांत्वना देते हुए कहते हैं - ...और इसी तरह पोल खुलते ही गायब हो जाते हैं - विदेशी हाथ।