छठ पूजा की समाप्ति के बाद ठेकुआं को पैक किये और घर से रतनसराय स्टेशन ससमय तो नहीं लेकिन एक घंटा विलम्ब से आये क्योंकि ट्रैन ही विलम्ब से आने वाली थी। मेरे स्टेशन आने के उपरांत ट्रेन ने विलम्ब नही किया और वो अपने नियत समय से 02 घंटे की देरी से स्टेशन पर आ ही गई। ट्रेन के आने से थोड़ी देर पहले हम स्टेशन पर बैठकर छठ पूजा के विडियो को एडिट कर रहे थे तभी मेरे कानो में एक आवाज सुनाई दी।
- विडियो एडिट कर रहे है क्या ?
- कौन सा App है ?
- एक विडियो को एडिट करने में कितना समय लगता है ?
- कुछ कमाई होता है ई सब से ?
पुरी ट्रैन मच्छरो🦟 की गुनगुनाहट से संगीतमय🎶 हो रहा था। मैं तो अपने मोबाईल में और बाकी लोग सोने में व्यस्त थे। एक व्यक्ति अपने मोबाइल का फुल स्पीकर करके छठ का गाना बजा रहे थे। "बहँगी लचकत जाओ"🎶🎶 ट्रेन चलने की स्पीड से ट्रैन में बैठे और सोये लोग भी बहँगी की तरह ही लचक रहे थे। छठ बीतने के बाद भी उसका गाना सुनना सुखद अनुभूति करा रहा था। हमारे सामने की सीट पर बैठे ललित जी कभी सो रहे थे तो कभी-कभी अपने मोबाइल से कुछ नोट्स को पढ़ रहे थे पुरी ट्रैन में कुछ ऐसे भी लोग थे जो की इन सभी से बेखबर ऊँची-ऊँची खराटे💤 ले रहे थे। यह वही लोग थे जो इस कहावत को चरितार्थ कर रहे थे की "स्थिति कोई भी हो हमें अपने कार्य में मग्न रहना चाहिए" पुरी ट्रैन में बाकी लोग तो कुछ-कुछ अंतराल पर अपने कार्यों में परिवर्तन कर रहे थे लेकिन दो ही कार्य था जो कि लगातार चल रहा था और वह यह था -
- एक सोने वाले का खराटा 💤 और
- दुसरा मच्छरो🦟 का सुरमई संगीत🎶.
अचानक से मेरा ध्यान ट्रेन की बोगी में आ गया क्योंकि जो सज्जन तभी से छठ का गाना बजा रहे थे अचानक से वह भोजपुरी की ओर शिफ्ट कर गए थे। किसी एक गाने में नायक के द्वारा नायिका से प्रश्न किया जा रहा था।
प्रश्न - बताओ लिंग केतना तरह के होला?
उत्तर - तीन
नायक - कौन-कौन
नायिका - स्त्रीलिंग, पुलिंग, और डार्लिंग।
हम यह उत्तर सुनकर भोजपुरी के लेखकों को झुककर नमस्ते 🙏🏻 करने का मन हुआ। लेकिन हम यह नहीं कर पायें क्योंकि तबतक हमारी ट्रेन रफ्तार पकड़ चुकी थी और रफ्तार ऐसी की सीधे हम पटना जंक्शन पहुँच चुके थे। मैंने ललित से पूछा - आपकी पढ़ाई पूरी हो गई ?
उसने कहा - हां, थोड़ा सा बचा हुआ है।
तब मैंने पूछा - किस चीज की परीक्षा है, तब उसने कहा - STET
मैंने आश्चर्य से पूछा - आपका अभी उम्र बचा हुआ है ? आपने B.Ed. कब किया ? CTET निकला है या नहीं ?
इस बार मैंने एक साथ कई प्रश्न पूछ दिए थे जिनसे वो बचने की कोशिश कर रहे थे। अबकी बार मुझे मेरा पंसदीदा टॉपिक मिल गया था। उसने बस इतना कहा - UP से किये है और बिहार सरकार ने उम्र में छुट दे रखी है। उस समय तक ट्रेन थोड़ी धीरे हो गई थी लेकिन रुकी नही थी लेकिन वो चलती ट्रेन से उतर गए और जाते-जाते बोले - By Sir👋🏻.
मै ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा उन्हें जाते हुए देख रहा था शायद वो अपनी मंजिल की ओर तेज कदमो से बढ़ चले, हमारी ट्रेन अब पूरी तरह से रुक गई थी। ट्रेन से उतरने के बाद मेरी नजरे उन्हें ढुढने की कोशिस की लेकिन वह नही दिखे, शायद!!! पटना जंक्शन की इस भीड़ में कही खो चूके थे। अक्सर कई प्रतिभायें नित्य दिन यूँ ही भीड़ में खोती जा रही है और कुछ उसमे से निकलकर आसमां में अपनी बुलंदी का पटाखा भी फहरा रही है। हम स्टेशन से बाहर आ गए थे और रात के 02:00 बजे जब ऑटो नही मिला तो पैदल ही रूम आयें। रूम आने के उपरांत वही ठेकुआं निकाले जो घर से लाये थे और उसे खाते हुए आज की यात्रा की विवेचना करते रहे।

